सावधान! ऑनलाइन सेल के नाम पर धोखा खा रहे आप, कीमत से ज्यादा दे रहे दाम
समझें क्या है पूरा मामला...
- ऑनलाइन सेल के भारी डिस्काउंट असल में उतनी बचत नहीं देते जितना दिखते हैं।
- टेकआर्क की रिपोर्ट कहती है कि कंपनियां सेल से पहले कीमतें बढ़ा देती हैं।
- फिर सेल में उतनी ही कीमत घटाकर बड़ा डिस्काउंट दिखाया जाता है।
- पचास स्मार्टफोन में से चौंतीस मॉडल जून में लॉन्च प्राइस से ऊपर बिक रहे थे।
- इसकी बड़ी वजह मेमोरी चिप की बढ़ती लागत बताई जा रही है।
सेल से पहले बढ़े दाम
ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर सेल के दौरान भारी छूट के दावे होते हैं। हर बड़ी सेल से पहले ग्राहक इंतजार करते हैं कि उन्हें अच्छी कीमत पर फोन मिलेगा। लेकिन टेकआर्क की नई रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बताती है।
रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर प्लेटफॉर्म सेल शुरू होने से पहले कीमतें बढ़ा देते हैं। इसके बाद सेल में सिर्फ उतनी ही कीमत घटाई जाती है। नतीजा यह होता है कि ग्राहक को असली फायदा नहीं मिलता।
कई बार तो खरीदार लॉन्च प्राइस से भी ज्यादा पैसे चुका देते हैं। यह तरीका ग्राहकों को भ्रमित करने वाला माना जा रहा है।
10 मॉडलों का हाल
वनप्लस, सैमसंग, नथिंग और लावा के बारह मॉडलों की तुलना की गई। टेकआर्क ने पचास स्मार्टफोन पर पूरी स्टडी की। इनमें से चौंतीस मॉडल यानी अड़सठ प्रतिशत जून तक लॉन्च प्राइस से ऊपर बिक रहे थे। यह हाल सेल शुरू होने से पहले का था। नीचे टेबल में दस मॉडलों का पूरा ब्योरा दिया गया है।
| मॉडल | लॉन्च प्राइस | सेल प्राइस | असली फर्क |
|---|---|---|---|
| वनप्लस 15 | 72 हजार 999 | 81 हजार 999 | 12.3% महंगा |
| फोन 4ए प्रो | 39 हजार 999 | 41 हजार 999 | 5% महंगा |
| गैलेक्सी एफ70ई | 12 हजार 499 | 12 हजार 999 | 4% महंगा |
| फोन 4ए | 31 हजार 999 | 32 हजार 999 | 3% महंगा |
| अग्नि 4 | 24 हजार 999 | 24 हजार 249 | 3% सस्ता |
| वनप्लस 15आर | 47 हजार 999 | 48 हजार 999 | 2.1% महंगा |
| गैलेक्सी एफ36 | 17 हजार 499 | 17 हजार 999 | 2.9% महंगा |
| बोल्ट एन1 5जी | 12 हजार 999 | 13 हजार 249 | 2% महंगा |
| गैलेक्सी एस25 अल्ट्रा | 1 लाख 29 हजार 999 | 84 हजार 999 | 34.6% सस्ता |
| गैलेक्सी एस25 | 80 हजार 999 | 56 हजार 999 | 29.6% सस्ता |
दस में से सात मॉडल सेल में भी लॉन्च प्राइस से महंगे बिके। सिर्फ तीन मॉडल में असली छूट मिली। इनमें गैलेक्सी एस25 अल्ट्रा और गैलेक्सी एस25 सबसे आगे रहे। सैमसंग के फ्लैगशिप मॉडलों में ही असली बचत दिखी।
मेमोरी चिप क्यों महंगी
स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ने की बड़ी वजह मेमोरी चिप है। मेमोरी बनाने वाली कंपनियों ने अपनी क्षमता एआई डेटा सेंटर की तरफ मोड़ दी है। इसके लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की मांग तेजी से बढ़ी है।
इससे smartphoneमें इस्तेमाल होने वाली एलपीडीडीआर (LPDDR – Low Power Double Data Rate) और एनएएनडी (NAND – एक प्रकार की फ्लैश मेमोरी) की सप्लाई घट गई है। माइक्रोन जैसी कंपनी ने 2030 तक के लंबे करार कर लिए हैं।
यह करार पुरानी कीमतों से काफी ऊपर तय हुए हैं। इसका सीधा बोझ कंपनियों ने 2026 की पहली छमाही में ग्राहकों पर डाल दिया। डिस्काउंट के बावजूद ग्राहकों को इससे राहत नहीं मिली।
आगे कब तक राहत?
आईडीसी (IDC – International Data Corporation) इंडिया के एनालिस्ट नवकेंदुर सिंह के मुताबिक हालात जल्दी नहीं सुधरेंगे। उनका कहना है कि मेमोरी चिप की महंगाई का असर 2028 से पहले कम होने की उम्मीद नहीं है।
यह भी संभव है कि यह असर 2029 से 2030 तक बना रहे। यानी स्मार्टफोन खरीदना आने वाले सालों में भी महंगा बना रह सकता है। ग्राहकों को फिलहाल राहत की उम्मीद कम ही रखनी चाहिए।
ग्राहकों के लिए सबक
इस रिपोर्ट से एक बात साफ है। सेल के दौरान बड़े डिस्काउंट के दावों पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। खरीदारी से पहले फोन की पुरानी कीमत जरूर चेक करें।
कई वेबसाइट और ऐप कीमतों का इतिहास दिखाते हैं। इससे पता चल जाता है कि छूट असली है या सिर्फ दिखावा। समझदारी से खरीदारी करने पर ही असली बचत मुमकिन है।
फेस्टिव सीजन में यह सावधानी और भी जरूरी हो जाती है। इस दौरान सबसे ज्यादा सेल और ऑफर आते हैं। ग्राहक जल्दबाजी में बिना कीमत जांचे खरीदारी कर लेते हैं। ऐसे में सही जानकारी ही सबसे बड़ा बचाव है।
कीमतों की तुलना करने वाले टूल्स इस्तेमाल करना एक अच्छा तरीका है। इससे ग्राहक को साफ पता चलता है कि उसे वाकई फायदा मिल रहा है या नहीं।
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