ओटीटी और स्ट्रीमिंग ऐप वालों के लिए आने वाला है नया नियम? TRAI ने मंत्रालय को भेजा प्रस्ताव, जानें क्या है पूरा मामला
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लाइसेंस 20 साल के लिए मिलेगा। इसे 10 साल तक बढ़ाने का ऑप्शन भी होगा। मोबाइल ऐप कंपनियां, ऐप स्टोर और स्मार्ट टीवी मैन्युफैक्चरर भी दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, अभी ये नियम लागू नहीं हुए हैं। इन्हें लागू करने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी है।
क्या है ट्राई का पूरा प्रस्ताव?
ट्राई ने स्ट्रीमिंग ऐप के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसमें इंटरनेट पर चैनल दिखाने वाले प्लेटफॉर्म भी शामिल हो सकते हैं। इससे जुड़ी कंपनियों को रजिस्ट्रेशन कराना पड़ सकता है। उन्हें तय शर्तों के अनुसार लाइसेंस भी लेना होगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इस मुद्दे पर पहले से विचार कर रही थी। दिसंबर 2025 में इस विषय पर चर्चा शुरू हुई थी।
इसके बाद अप्रैल 2026 में कंसल्टेशन पेपर जारी किया गया। इससे जुड़े पक्षों से इस बारे में राय भी मांगी गई। अब ट्राई ने अपनी सिफारिशें केंद्रीय मंत्रालय को भेज दी हैं। मंत्रालय की मंजूरी के बाद सरकारी नोटिफिकेशन जारी हो सकती है। अंतिम नियमों की जानकारी नोटिफिकेशन जारी होने पर मिलेगी।
OTT लाइसेंस के लिए कितनी फीस देनी होगी?
- लाइसेंस फीस: एक लाख रुपए।
- आवेदन फीस: 10 हजार रुपए।
- लाइसेंस की अवधि: 20 साल।
- अवधि बढ़ाने का विकल्प: 10 साल तक।
इसका असर किन ऐप और कंपनियों पर पड़ेगा?
- मोबाइल ऐप चलाने वाली कंपनियां।
- वेब आधारित चैनल और वेबसाइट।
- ऐप स्टोर चलाने वाले प्लेटफॉर्म।
- स्मार्ट टीवी बनाने वाली कंपनियां।
- स्मार्ट टीवी में पहले से मौजूद ऐप।
- वेब ब्राउजर से चलने वाले प्लेटफॉर्म।
- ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध कराने वाली कंपनियां।
स्मार्ट टीवी के नियमों में क्या बदलाव हो सकता है?
आजकल स्मार्ट टीवी में कई ऐप पहले से मौजूद होते हैं। इनकी मदद से लोग इंटरनेट पर वीडियो देख सकते हैं। प्रस्ताव में स्मार्ट टीवी से जुड़ी सेवाओं को भी शामिल करने की बात है। टीवी में मौजूद ऐप इसके दायरे में आ सकते हैं। वेब ब्राउजर और ऑपरेटिंग सिस्टम देने वाली कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं।
ऐप स्टोर पर भी नए नियम लागू करने का प्रस्ताव है। इसका मतलब है कि नियम केवल मोबाइल तक सीमित नहीं रह सकते। स्मार्ट टीवी पर वीडियो देखने की व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
किन कंपनियों को मिल सकती है छूट?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ सेवाओं को छूट देने का प्रस्ताव है। जिन कंपनियों के पास सैटेलाइट टीवी चैनल का लाइसेंस है, उनके वेब चैनल बाहर रह सकते हैं। कंपनियों के अपने कर्मचारियों के लिए चलने वाले वेबकास्ट भी छूट पा सकते हैं। प्रचार के लिए किए जाने वाले कुछ प्रसारण भी दायरे से बाहर रह सकते हैं।
हालांकि, छूट के लिए क्या शर्तें होंगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसकी जानकारी अंतिम नियम जारी होने के बाद मिलेगी।
जेन-जी आंदोलन के बाद क्यों तेज हुई चर्चा?
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने दिसंबर 2025 में इस मुद्दे पर विचार शुरू किया था। अप्रैल 2026 में इस संबंध में कंसल्टेशन पेपर जारी हुआ था। इसके बाद भी प्रक्रिया में ज्यादा तेजी नहीं आई थी। रिपोर्ट में जेन-जी आंदोलन के बाद चर्चा तेज होने की बात कही गई है। इस दौरान यूट्यूबर और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर की भूमिका भी चर्चा में रही।
रिपोर्ट के मुताबिक, आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए थे। इनमें कुछ वीडियो अनवेरिफाइड बताए गए थे। सरकार ने कुछ मामलों में इन्हें भ्रम फैलाने वाला माना। इसके बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियमों पर चर्चा तेज हुई।
यूट्यूबर और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर पर क्या असर होगा?
इस प्रस्ताव में यूट्यूबर और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर की भूमिका भी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार कंटेंट की निगरानी पर सख्ती कर सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि हर यूट्यूबर को लाइसेंस लेना होगा। अभी यह प्रस्तावित व्यवस्था है।
सरकार पत्रकारों और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के बीच अंतर तय करने पर भी विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इसका उद्देश्य दोनों की भूमिका अलग-अलग स्पष्ट करना है। पत्रकारों को मिलने वाले प्रिविलेज का मुद्दा भी इसमें शामिल है।
OTT और स्मार्ट टीवी की रेटिंग भी होगी?
प्रस्ताव में दर्शकों की संख्या और रेटिंग का मुद्दा भी शामिल है। टीवी चैनलों की तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म की रेटिंग पर विचार हो सकता है। इसके जरिए पता लगाया जा सकता है कि कितने लोग चैनल देखते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्ट टीवी पर देखे जाने वाले कंटेंट को भी शामिल किया जा सकता है। हालांकि, रेटिंग तय करने का तरीका अभी स्पष्ट नहीं है। यह भी तय होना बाकी है कि किन प्लेटफॉर्म पर नियम लागू होंगे।
फीस और पंजीयन की शर्तें क्या होंगी?
फिलहाल ट्राई की सिफारिशें केंद्रीय मंत्रालय के पास हैं। सरकार की मंजूरी के बाद नोटिफिकेशन जारी हो सकती है। इसके बाद रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस फीस की शर्तें स्पष्ट होंगी। छूट और निगरानी से जुड़े नियम भी सामने आएंगे। अभी ओटीटी ऐप और यूट्यूबर पर नए नियम लागू नहीं हुए हैं। फिलहाल सरकार का अंतिम फैसला आना बाकी है। यह मामला डिजिटल प्लेटफॉर्म चलाने वाली कंपनियों के लिए अहम है। नए नियम लागू होने पर कंटेंट बनाने वालों पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए सभी की नजर सरकार की अंतिम नोटिफिकेशन पर रहेगी।
FAQs
- स्ट्रीमिंग ऐप के लिए लाइसेंस फीस कितनी होगी?
प्रस्ताव के मुताबिक, एक लाख रुपए एकमुश्त लाइसेंस फीस होगी, साथ ही 10 हजार रुपए पंजीयन आवेदन फीस भी लगेगी। - ये नए नियम कब से लागू होंगे?
ये नियम कब से लागू होंगे, इसकी तारीख अभी तय नहीं है। ट्राई की सिफारिशें केंद्रीय मंत्रालय के पास हैं, मंजूरी के बाद अधिसूचना जल्द जारी की जा सकती है। - इन नियमों का क्या असर होगा?
इन नियमों का असर मोबाइल ऐप कंपनियों, ऐप स्टोर और स्मार्ट टीवी निर्माताओं पर होगा, जबकि सैटेलाइट टीवी चैनल लाइसेंस वाली कंपनियों के वेब चैनल बाहर रह सकते हैं।