ब्रह्मचर्य से खराब होती है स्पर्म क्वालिटी, नियमित सेक्स है कारगर: ऑक्सफोर्ड रिसर्च
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) के शोधकर्ताओं ने पाया है कि नियमित सेक्स या स्खलन (शारीरिक प्रक्रिया) से पुरुषों के शुक्राणुओं की गुणवत्ता बेहतर होती है। संयम रखने यानी लंबे समय तक सेक्स न करने से शुक्राणुओं में डीएनए (DNA - Deoxyribonucleic Acid) को नुकसान पहुंचता है।
शोधकर्ताओं ने डब्ल्यूएचओ (WHO - World Health Organisation) की मौजूदा गाइडलाइन पर भी सवाल उठाए हैं। यह रिसर्च ऐसे समय आई है जब दुनिया भर में पुरुष बांझपन एक बड़ी चिंता बनता जा रहा है।
नियमित सेक्स क्यों जरूरी है?
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम ने दावा किया है कि पुरुष जितनी बार स्खलित होता है, उतनी ही उसके शुक्राणुओं की गुणवत्ता बेहतर होती है। यानी जो लोग नियमित सेक्स करते हैं या ज्यादा बार स्खलित होते हैं उनके शुक्राणु बेहतर गुणवत्ता वाले होते हैं।
इसके पीछे की वजह भी शोधकर्ताओं ने बताई है। को-लीड ऑथर डॉ. रेबेका डीन ने बताया कि, शुक्राणु बहुत तेज गति से चलते हैं। इनमें साइटोप्लाज्म (Cytoplasm) बहुत कम होता है। इस वजह से ये अपनी ऊर्जा जल्दी खर्च कर देते हैं। खुद की मरम्मत की क्षमता भी इनमें सीमित होती है।
इसीलिए 'स्टोर' यानी शरीर में लंबे समय तक रुके हुए शुक्राणुओं को दूसरी कोशिकाओं की तुलना में ज्यादा नुकसान होता है। उनके मुताबिक नियमित स्खलन से पुरुष प्रजनन क्षमता को एक छोटा लेकिन सार्थक फायदा मिल सकता है।
संयम से क्या नुकसान होता है?
रिसर्च में पाया गया कि सेक्स या हस्तमैथुन से दूरी बनाने पर शुक्राणुओं में डीएनए डैमेज और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (Oxidative Stress) बढ़ता है। साथ ही शुक्राणुओं की गतिशीलता और जीवन शक्ति भी कम हो जाती है।
इसके नतीजे और भी गंभीर हैं। इससे फर्टिलाइजेशन यानी निषेचन की सफलता दर कम हो जाती है। भ्रूण की गुणवत्ता भी घट जाती है। यह उन दंपतियों के लिए खासतौर पर चिंताजनक है जो संतान प्राप्ति की कोशिश में लगे हैं।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि शरीर में 'स्टोर' रहने वाले शुक्राणु (SPERM) पुरुष की उम्र चाहे जो हो, तेजी से खराब होते हैं।
55 हजार पुरुषों पर रिसर्च
यह कोई छोटी स्टडी नहीं है। इस रिसर्च के लिए टीम ने पहले से हो चुके शोधों का बड़े पैमाने पर विश्लेषण किया। इसमें लगभग 55 हजार पुरुषों पर हुई 115 मानव स्टडीज शामिल थीं। इसके अलावा 30 अलग-अलग प्रजातियों पर हुई 56 स्टडीज का भी विश्लेषण किया गया।
रिसर्च के लीड ऑथर डॉ. कृश संघवी कहते हैं कि, स्खलन को शुक्राणुओं की एक आबादी के रूप में देखा जाना चाहिए। इसमें जन्म, मृत्यु, बुढ़ापा और चयनात्मक मृत्यु दर होती है। यह नजरिया शुक्राणु विज्ञान को एक नई दिशा देता है।
WHO की गाइडलाइन पर सवाल
विश्व स्वास्थ्य संगठन की मौजूदा गाइडलाइन के मुताबिक सहायक प्रजनन यानी असिस्टेड रिप्रोडक्शन (Assisted Reproduction) के लिए सैंपल लेने से पहले दो से सात दिन के संयम की सलाह दी जाती है।
दूसरी तरफ इस रिसर्च की टीम ने चेतावनी दी है कि उनके निष्कर्षों के आधार पर इस गाइडलाइन में सात दिन की ऊपरी सीमा बहुत ज्यादा हो सकती है। यानी डॉक्टर जो सलाह देते आए हैं वह नई रिसर्च के हिसाब से गलत साबित हो सकती है।
बांझपन की बड़ी समस्या
यह रिसर्च ऐसे समय पर आई है जब पुरुष बांझपन एक गंभीर वैश्विक मुद्दा बन चुका है। लगभग हर सात में से एक दंपती बांझपन से जूझता है। बांझपन की परिभाषा यह है कि कम से कम एक साल तक नियमित और असुरक्षित यौन संबंध (शारीरिक संबंध) बनाने के बाद भी गर्भधारण न हो पाना।
ऑक्सफोर्ड की इस रिसर्च ने पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर कई पुरानी मान्यताओं पर नए सिरे से सोचने को मजबूर किया है।
FAQ
- क्या नियमित सेक्स से सच में स्पर्म क्वालिटी बेहतर होती है?
हां, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की नई रिसर्च इसकी पुष्टि करती है। 55 हजार पुरुषों पर हुई 115 स्टडीज के विश्लेषण में पाया गया कि जो पुरुष नियमित रूप से स्खलित होते हैं, उनके शुक्राणुओं की गुणवत्ता बेहतर होती है। इसकी वजह यह है कि शुक्राणु शरीर में जितने लंबे समय तक रहते हैं, उतने ही खराब होते जाते हैं। उनमें डीएनए डैमेज बढ़ता है और गतिशीलता घटती है।
सोर्स: Oxford University, World Health Organization
ये खबरें भी पढ़िए...
ओरल सेक्स बन रहा कैंसर का कारण, जितने ज्यादा पार्टनर उतना ही बड़ा खतरा
AI ने बताया दिल, जिगर और कैंसर का असली राज, थाइमस ग्रंथी है जान का तोता
इंदौर हाईकोर्ट ने पत्नी–पति के शारीरिक संबंध को बलात्कार नहीं माना, याचिका खारिज
Transgender Rights Bill 2024: पहचान की एक और लड़ाई…