Paris Olympics 2024 : स्वप्निल ने कांस्य पदक जीत रचा इतिहास , पहली बार शूटिंग में तीन मेडल
Paris Olympics 2024 : पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत के एक और शूटर ने तिरंगा लहरा दिया है। ओलंपिक के छठे दिन यानी 1 अगस्त को शूटिंग में भारतीय निशानेबाज स्वप्निल कुसाले ने इतिहास रच दिया। स्वप्निल ने पुरुषों की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन के फाइनल में तीसरा स्थान हासिल करके ब्रॉन्ज जीता। ओलंपिक में भारत का ये तीसरा मेडल रहा।
स्वप्निल ने कुल 451.4 अंक हासिल करके ब्रॉन्ज अपने नाम किया। चीन के लियु युकान ने 463.6 प्वाइंट के साथ गोल्ड जीता, जबकि युक्रेन के शूटर शेरी कुलिश ने 461.3 अंक के साथ सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
भारत को दिलाई ऐतिहासिक जीत
स्वप्निल ने ब्रॉन्ज जीतकर भारत को पेरिस में ऐतिहासिक जीत दिलाई। स्वप्निल पहली बार 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बने हैं। कोल्हापुर के 29 साल के इस निशानेबाज ने अपने पहले ही ओलंपिक में मेडल अपने नाम कर लिया। स्वप्निल कुसाले की 12 सालों से ओलंपिक में क्वालिफाई करने की कोशिश जारी थी और इस बार पेरिस में उन्हें मौका मिला तो उन्होंने इतिहास ही रच दिया। बता दें कि स्वप्निल कुसाले ने 17 मई 2024 को भोपाल में आयोजित अंतिम चयन ट्रायल में 2024 ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई किया। 1995 में जन्मे कुसाले किसान परिवार से आते हैं।
वर्ल्ड नंबर 1 शूटर को हराकर जीता ब्रॉन्ज
स्वप्निल कुसाले ने वर्ल्ड नंबर 1 शूटर को हराकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। स्वप्निल भारत के लिए ओलंपिक मेडल जीतने वाले महज 7वें शूटर हैं। पेरिस ओलंपिक में अबतक तीन शूटर्स ने भारत को मेडल दिलाया है। दरअसल, इस ओलंपिक में शूटर मनु भाकर ने 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत के पदक का खाता खोला। इसके बाद मनु भाकर ने सरबजोत सिंह के साथ मिलकर 10 मीटर मिक्स्ड टीम इवेंट में कांस्य पदक अपने नाम किया। मनु भाकर का पेरिस ओलंपिक में यह दूसरा मेडल रहा। वहीं, स्वप्निल कुसाले ने 50 मीटर पुरुष राइफल 3 पोजीशन में कांस्य पदक जीता। उन्होंने ओलंपिक डेब्यू में पदक अपने नाम कर इतिहास रचा। पहली बार ओलंपिक के किसी एक संस्करण में ही एक खेल में तीन मेडल भारत ने जीते हैं।
यूं पलट दिया गेम
स्वप्निल कुसाले ने स्टैंडिंग में पहली सीरीज में 51.1 और दूसरी सीरीज में 50.4 यानी कुल मिलाकर 101.5 का स्कोर किया। यानी उनके पास कुल स्कोर 422.1 और वह तीसरे नंबर पर पहुंच गए। यहां से चुनौती और भी गंभीर थी। यहां से स्वप्निल कुसाले ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने एलिमिनेशन में बेहतर अंदाज में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर लिया।
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