Parliament special session: परिसीमन बिल फिर आएगा, बहुमत कहां से आएगा? संसद में सरकार की अग्निपरीक्षा
विशेष सत्र में कौन से तीन बिल आ सकते हैं
पहला, संविधान (131वां संशोधन) बिल है। यही लोकसभा सीटें बढ़ाने (Lok Sabha seats increase) का रास्ता खोलेगा। दूसरा, परिसीमन (संशोधन) बिल। तीसरा, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल।परिसीमन (चुनाव क्षेत्रों की सीमा और संख्या नए सिरे से तय करना) इस पूरी कवायद की धुरी है। विशेष सत्र की सूचना करीब एक हफ्ते पहले दी जा सकती है।
अप्रैल में क्यों गिरा परिसीमन बिल
सरकार ने 15 से 17 अप्रैल तक तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया था। 17 अप्रैल को महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल पर वोटिंग हुई। लेकिन बिल पास नहीं हो सका। वोटिंग के समय लोकसभा में 528 सांसद मौजूद थे। पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े। पास होने के लिए 352 वोट चाहिए थे। यानी बिल 54 वोट से गिर गया। बिल गिरने के बाद एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की महिला सांसदों ने प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन संसद परिसर में हुआ था।
दो-तिहाई बहुमत का पूरा गणित
किसी भी संविधान संशोधन बिल (constitution amendment bill) के लिए खास बहुमत चाहिए। 131वां संविधान संशोधन बिल भी इसी कसौटी से गुजरेगा। दोनों सदनों में सरकार को दो-तिहाई समर्थन जुटाना होगा।
लोकसभा में करीब 20 सांसदों की कमी
लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं। इनमें से 3 सीटें खाली हैं। एनडीए के पास 318 सांसद हैं। बिल पास कराने के लिए 360 वोट चाहिए। मान लीजिए DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के 22 सांसद साथ आ जाएं। तब भी आंकड़ा 340 तक ही पहुंचेगा। यानी भाजपा को करीब 20 और सांसद चाहिए।
राज्यसभा में 9 सांसदों की जरूरत
राज्यसभा में 245 सीटें हैं। इनमें से 3 सीटें खाली हैं। यहां एनडीए के 153 सांसद हैं। बिल पास कराने के लिए 162 सांसदों का समर्थन चाहिए। यानी यहां भी छोटे दलों के 9 सांसद चाहिए। सवाल यही है, दोनों सदनों के ये 29 सांसद कहां से आएंगे?
अप्रैल के बाद क्या बदला
लेकिन असली कहानी यहीं से शुरू होती है। अप्रैल के बाद लोकसभा का समीकरण काफी बदल चुका है। तमिलनाडु चुनाव के बाद DMK का कांग्रेस से अलगाव हो गया। फिर वह इंडिया गठबंधन से भी औपचारिक रूप से अलग हो गई।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बड़ी बगावत हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, उसके 21 सांसद टूटकर NCPI में शामिल हो गए। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 6 सांसदों ने भी पाला बदला। उन्होंने अलग गुट बनाकर NDA को समर्थन दिया।
DMK और छोटे दलों से बातचीत जारी
केंद्र सरकार अब DMK से समर्थन के लिए बातचीत कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार कुछ छोटे दलों के संपर्क में भी है। इस बातचीत का मकसद सदन में संख्याबल मजबूत करना है।
खड़गे का मोदी को पत्र, क्या मांगा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा। उन्होंने परिसीमन बिल पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। खड़गे के मुताबिक, प्रस्ताव संसद में रखने से पहले सभी दलों से चर्चा होनी चाहिए।
खड़गे का मोदी को पत्र एक चेतावनी भी है। उन्होंने लिखा कि सरकार बिल को फिर जबरन पास कराने की कोशिश न करे। यह बात व्यापक संविधान संशोधन बिल को लेकर कही गई। खड़गे ने याद दिलाया कि ऐसी कोशिश पहले भी नाकाम रही है।
मानसून सत्र का सत्रावसान अटका
खड़गे ने मानसून सत्र का सत्रावसान न होने पर भी सवाल उठाया। सत्रावसान (सत्र को औपचारिक रूप से खत्म करना) अब तक नहीं हुआ है। मानसून सत्र की आखिरी बैठक 13 अगस्त को हुई थी। खड़गे के मुताबिक 64 दिन बाद भी दोनों सदनों का सत्रावसान नहीं हुआ।
यह अपने आप में सबसे लंबी अवधि है। इससे पहले 1989 में दोनों सदन 63 दिन ऐसी स्थिति में रहे थे।
FAQs
- विशेष सत्र में कौन से तीन बिल पेश किए जा सकते हैं?
विशेष सत्र में पेश किए जाने वाले तीन बिल हैं: संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन (संशोधन) बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल। - परिसीमन बिल क्यों गिर गया था?
परिसीमन बिल 17 अप्रैल को वोटिंग के दौरान गिर गया था, जब 528 सांसदों में से 298 ने समर्थन दिया लेकिन पास होने के लिए 352 वोट की आवश्यकता थी, जिससे यह 54 वोट से गिर गया। - कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र क्यों लिखा?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन बिल पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की, यह कहते हुए कि सभी दलों से चर्चा किए बिना प्रस्ताव नहीं लाना चाहिए।