अजमेर दरगाह में शिव मंदिर होने का दावा, याचिका कोर्ट में मंजूर
राजस्थान के अजमेर में स्थित प्रसिद्ध दरगाह को हिंदू मंदिर बताने वाली याचिका को निचली अदालत (Lower Court ) ने स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने सभी पक्षकारों को नोटिस भेजा है। साथ ही कोर्ट ने इस मामले में 5 दिसंबर को अगली सुनवाई की तारीख तय की है। बताया जा रहा है कि हिंदू सेना के विष्णु गुप्ता ने अजमेर में ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को हिंदू पूजा स्थल होने की याचिका कोर्ट में दायर की थी।
दरगाह को हिंदू मंदिर बता रहे हिंदू संगठन
हिंदू संगठन महाराणा प्रताप सेना लंबे समय से Ajmer Dargah को मंदिर बता रहा है। साल 2022 में इसके मंदिर होने का दावा करते हुए महाराणा प्रताप सेना ने तत्कालीन राजस्थान और केंद्र सरकार से इसकी जांच कराने के लिए कहा था। महराणा प्रताप सेना (Maharana Pratap Sena ) के पदाधिकारियों ने एक तस्वीर भेजी थी, जिसमें अजमेर दरगाह की खिड़कियों पर स्वस्तिक के निशान होने का दावा किया गया था। संगठन के संस्थापक राजवर्धन सिंह परमार ने दावा किया था कि (Ajmer Dargah ) अजमेर दरगाह एक शिव मंदिर था जिसे बाद में दरगाह बना दिया गया।
संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे पर हिंसा
संभल जिले की शाही जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर बताने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया था। पहले 19 नवंबर को रात में सर्वे हुआ और 24 नवंबर (रविवार) को दूसरी बार सर्वे टीम मस्जिद पहुंची। मस्जिद कमेटी की सहमति से दोनों पक्षों की मौजूदगी में सर्वे होना था, लेकिन मस्जिद के सर्वे के खिलाफ बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। कोर्ट के आदेश पर जब सर्वे शुरू हुआ तो भीड़ ने भड़ककर पुलिस पर हमला कर दिया।
अंजुमन कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती जताया अफसोस
वहीं हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष की इस याचिका को अदालत के स्वीकार करने पर अजमेर में अंजुमन कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती ने अफसोस जताया है।
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