Petrol and Diesel Rate Hike: लोकल सर्कल्स सर्वे रिपोर्ट, लोग कम कर रहे यात्राएं
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- मई 2026 में पेट्रोल और डीजल की कीमतें चार बार बढ़ चुकी हैं।
- हाल ही में ईंधन के दामों में ढाई रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।
- लोकल सर्कल्स के सर्वे में देश के 41 हजार लोग शामिल हुए।
- बढ़ती महंगाई से परेशान 71% लोग अब अपनी यात्राएं कम करेंगे।
- आधे से ज्यादा लोगों का कहना है कि घर का बजट बिगड़ गया है।
मई महीने में चौथी बार बढ़े ईंधन के दाम
आम जनता की जेब पर एक बार फिर बड़ा बोझ बढ़ गया है। मई 2026 के महीने में पेट्रोल-डीजल के दाम (PETROL DIESEL PRICE HIKE) चार बार बढ़े हैं। ताजा बढ़ोतरी 25 मई को दर्ज की गई। इसने लोगों के घर का पूरा बजट हिलाकर रख दिया है।
इस बार बड़े शहरों में तेल की कीमतें काफी ज्यादा बढ़ गईं। पेट्रोल के दाम 2.61 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए। वहीं डीजल भी 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया। इस बढ़ोतरी के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है।
लोकल सर्कल्स के सर्वे में सामने आया जनता का दर्द
तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर एक नया सर्वे सामने आया है। यह सर्वे एजेंसी लोकल सर्कल्स ने तैयार किया है। इस सर्वे में देश के 308 जिलों को शामिल किया गया। यहाँ के लोगों से कुछ जरूरी सवाल पूछे गए थे।
सर्वे में 41 से ज्यादा घरेलू उपभोक्ताओं ने अपनी राय दी। इनमें 62% पुरुष और 38% महिलाएं शामिल थीं। इस रिपोर्ट के आंकड़े देश के जमीनी हालात को बयां कर रहे हैं। महंगाई से हर वर्ग का व्यक्ति परेशान दिखाई दे रहा है।
घर और परिवहन के बजट पर सीधा असर
सर्वे में लोगों से बजट पर पड़ने वाले असर को पूछा गया। इस पर 55% लोगों ने कहा कि परिवहन लागत बढ़ गई है। इतने ही यानी 55% लोगों ने सामान महंगा होने की बात कही। तेल महंगा होने से मालभाड़ा भी अपने आप बढ़ जाता है।
इसके अलावा 50% लोग मानते हैं कि जरूरी सेवाएं महंगी हुई हैं। केवल 30% लोग ऐसे थे जिन पर कोई खास असर नहीं पड़ा। बाकी लोगों के लिए अब रोजमर्रा का खर्च (budget) चलाना मुश्किल हो रहा है।
महंगाई से निपटने के लिए नया प्लान
बढ़ती कीमतों से बचने के लिए लोग नए तरीके अपना रहे हैं। सर्वे के अनुसार 71% लोग गैर-जरूरी यात्राएं कम करेंगे। वे अब बाहर घूमने-फिरने की योजनाओं को टाल रहे हैं। जनता अब सिर्फ बहुत जरूरी काम से ही बाहर निकलेगी।
वहीं 35% लोग एक चक्कर में कई काम निपटाने की सोच रहे हैं। इससे उनकी गाड़ी का ईंधन और पैसा दोनों बच सकेगा। लोग अब फिजूलखर्ची को पूरी तरह से बंद करने की कोशिश में हैं।
सस्ते सफर के विकल्प तलाश रहे हैं उपभोक्ता
तेल के खर्च को संभालने के लिए लोग विकल्प ढूंढ रहे हैं। करीब 29% लोग अब कम लागत वाले साधनों को अपनाएंगे। वे निजी गाड़ियों के बजाय बस या मेट्रो का सफर चुन सकते हैं। कुछ लोग साइकिल का इस्तेमाल भी बढ़ा रहे हैं।
इसके साथ ही 24% लोग सस्ती सेवाओं का उपयोग करेंगे। जबकि 29% लोग ईंधन के लिए दूसरे बजट में कटौती कर रहे हैं। वे कपड़ों या मनोरंजन के खर्च को कम कर रहे हैं। ताकि गाड़ी के लिए पेट्रोल का पैसा निकाला जा सके।
क्या कहते हैं आर्थिक विशेषज्ञ?
आर्थिक जानकारों का कहना है कि यह स्थिति चिंताजनक है। ईंधन महंगा (fuel price) होने से बाजार में हर चीज के दाम बढ़ते हैं। इससे आम आदमी की खरीदने की क्षमता कम हो जाती है। लोग जब पैसा कम खर्च करेंगे तो व्यापार पर असर पड़ेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार को टैक्स कम करके राहत देनी चाहिए। अगर तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो महंगाई और बढ़ेगी। आने वाले दिनों में लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी कंपनियों का खर्च भी बढ़ सकता है।
FAQ
- मई 2026 में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
मई 2026 के महीने में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 25 मई को हुई सबसे हालिया बढ़ोतरी में देश के बड़े शहरों में पेट्रोल के दाम 2.61 रुपये प्रति लीटर बढ़ गए। - लोकल सर्कल्स के सर्वे के अनुसार कितने लोग यात्राओं में कटौती कर रहे हैं?
लोकल सर्कल्स द्वारा देश के 308 जिलों में किए गए इस व्यापक सर्वे में 71% उपभोक्ताओं ने कहा है कि वे ईंधन की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए अपनी गैर-जरूरी यात्राओं और बाहर घूमने-फिरने के प्लान में कटौती करेंगे। - बढ़ती ईंधन कीमतों का आम लोगों के घरेलू खर्चों पर क्या असर पड़ रहा है?
सर्वे के अनुसार, 55% लोगों का मानना है कि परिवहन और जरूरी सामानों की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। इस बढ़ते खर्च को संभालने के लिए 29% लोग घर के दूसरे जरूरी बजट में कटौती कर रहे हैं।
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