पीएम मोदी ने किया दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन : 6 घंटे का सफर अब 2.5 घंटे में, जानें क्या है खासियत

Sanjay Dhiman | Apr 14, 2026, 19:38 IST
Photograph: (the sootr)
प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। अब दिल्ली से देहरादून का सफर सिर्फ 2.5 घंटे में पूरा होगा। जानिए इस इकोनॉमिक कॉरिडोर की खासियतें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 14 अप्रैल मंगलवार को देहरादून में दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन किया। यह परियोजना दिल्ली से देहरादून तक सफर के समय को छह घंटे से घटाकर मात्र ढाई घंटे कर देगी। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे देश की “भाग्य-रेखा” बताते हुए इस प्रोजेक्ट को भारत के विकास में महत्वपूर्ण कदम कहा। इसके उद्घाटन में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित थे।



पीएम ने राजमार्गों को भाग्य-रेखा बताया

प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन के दौरान कहा कि किसी भी देश की तरक्की उसके विकासशील इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करती है। उन्होंने इसे "भाग्य-रेखा" बताते हुए कहा कि सड़कें और एक्सप्रेसवे, एक राष्ट्र की विकास यात्रा की दिशा तय करते हैं। यह सिर्फ एक कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह भारत के विकास की नई दिशा दिखाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर जोर दिया कि पिछले एक दशक में भारत ने खुद को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए ऐसे प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित किया है।



एक नजर में एक्सप्रेसवे की विशेषताएं

  • 12,000 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से हुआ निर्माण
  • 6 लेन का होगा यह एक्सेस-कंट्रोल्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर
  • 8 लेन तक विस्तार देने का है प्लान भविष्य में इस एक्सप्रेसवे को
  • 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार का सफल ट्रायल हुआ इसमें
  • हाथियों के लिए 200-200 मीटर लंबे दो अंडरपास बनाए गए हैं
  • 60 से अधिक बस शेल्टर, बस-बे, फुट ओवरब्रिज, क्रैश बैरियर, साउंड बैरियर और नाइट रिफ्लेक्टर्स
  • 12 किलोमीटर लंबा एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर
  • देहरादून के पास डात काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी विशेष टनल बनाई गई।

12,000 करोड़ रुपए की विशाल परियोजना

इस एक्सप्रेसवे परियोजना की लागत 12,000 करोड़ रुपए है। इस परियोजना के निर्माण से हजारों श्रमिकों को रोजगार मिला और इंजीनियरों एवं पेशेवरों को भी बड़े पैमाने पर अवसर मिले। इसके अलावा, उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग के लिए यह परियोजना बहुत फायदेमंद साबित होगी। एक्सप्रेसवे से पर्यटकों को पहाड़ों की सुंदरता तक पहुंचने में आसानी होंगी, जिससे स्थानीय व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा।



एक्सप्रेसवे की विशेषताएं

इस 12,000 करोड़ रुपए की परियोजना में 10 इंटरचेंज, तीन रेलवे ओवर ब्रिज, चार बड़े पुल और 12 अन्य सुविधाएं शामिल हैं। ये सभी सुविधाएं यात्रियों को तेज और सुरक्षित यात्रा का अनुभव प्रदान करेंगी। इसके साथ ही, सड़क सुरक्षा के लिए एक उन्नत ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली (ATMS) भी लागू की गई है, जो ट्रैफिक फ्लो को नियंत्रित करेगी। यह तकनीक आपातकालीन स्थिति में जल्द रिस्पांस भी करेगी।



एशिया का सबसे लंबा वन्यजीव कॉरिडोर

इस एक्सप्रेसवे को सिर्फ इंसानों के लिए नहीं, बल्कि वन्यजीवों को भी ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें 12 किलोमीटर लंबा एक 'एलीवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर' है, जो एशिया में अपनी तरह का सबसे लंबा कॉरिडोर है। इस कॉरिडोर में ऊपर गाड़ियां दौड़ेंगी और नीचे जंगल के शेर, हाथी और दूसरे जानवर बिना किसी डर के घूम सकेंगे।



हाथियों के लिए तो अलग से 200-200 मीटर के दो स्पेशल अंडरपास बनाए गए हैं। इसका मतलब ये है कि अब इंसानों और जानवरों के बीच टकराव कम होगा। विकास भी होगा और प्रकृति भी सुरक्षित रहेगी। इसके अलावा, मां डाट काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी एक सुरंग भी बनाई गई है, जो सफर को और रोमांचक बना देती है।



हाई-टेक सुरक्षा: एक्सीडेंट का खतरा होगा कम

आजकल एक्सप्रेसवे पर सबसे ज्यादा डर ओवरस्पीडिंग और एक्सीडेंट का होता है। लेकिन सरकार ने यहां 'एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' (ATMS) लगाया है। ये सिस्टम हर गाड़ी पर नजर रखेगा। अगर कहीं जाम लगता है या कोई हादसा होता है, तो तुरंत मदद पहुंचेगी। इसमें 10 इंटरचेंज और 4 बड़े पुल बनाए गए हैं ताकि ट्रैफिक एकदम स्मूथ रहे।



दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का महत्व

इस एक्सप्रेस वे से न केवल उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि पर्यटन और व्यापार को भी एक नई दिशा मिलेगी। इसे एक मजबूत विकास मॉडल के रूप में देखा जा सकता है, जो भारत के भविष्य के विकास का प्रतीक बनेगा।



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