खत्म होगा एलपीजी सिलेंडर का झंझट, सरकारी की इस स्कीम से सीधे घर पहुंचेगी गैस

Aman Vaishnav | Aug 20, 2026, 11:54 IST
PNG इंसेंटिव स्कीम
एलपीजी आयात पर निर्भरता घटाने के लिए सरकार 1 सितंबर से PNG इंसेंटिव स्कीम शुरू कर रही है। इससेPNG कनेक्शन आसान होंगे और रसोई का खर्च कम होगा।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते भारत में एलपीजी आयात प्रभावित हो रहा है।
  • इसे देखते हुए सरकार अब पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने पर जोर दे रही है।
  • इसके लिए 1 सितंबर 2026 से नई इंसेंटिव स्कीम लागू होगी।
  • यह स्कीम गैस डिस्ट्रीब्यूटर कंपनियों को अतिरिक्त सस्ती गैस देगी।
  • इससे आम लोगों को भी सस्ती और आसान गैस सप्लाई मिल सकेगी।

क्यों आई यह स्कीम

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव ने वैश्विक ईंधन सप्लाई को बाधित किया है। इसका सीधा असर तेल और गैस के दाम पर पड़ा है। भारत अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।



ऐसे में सरकार पीएनजी यानी पाइप्ड नेचुरल गैस को बढ़ावा देना चाहती है। इससे आयातित एलपीजी (LPG – Liquefied Petroleum Gas) पर निर्भरता कम होगी। साथ ही सब्सिडी का खर्च भी घट सकता है।



स्कीम का नाम और समय

इस योजना का नाम है इन्सेंटिव स्कीम फॉर प्रमोशन ऑफ डोमेस्टिक पीएनजी कनेक्शंस। यह अगले महीने की शुरुआत यानी 1 सितंबर 2026 से शुरू होगी।



इसे दो चरणों में लागू किया जाएगा। हर चरण छह-छह महीने का होगा। सरकार शहरी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स को इसके तहत इंसेंटिव देगी।



नए कनेक्शन होंगे आसान

नए पीएनजी कनेक्शन का आवेदन अब आसान बनाया जा रहा है। इसके लिए सरकार एक सिंगल विंडो रजिस्ट्रेशन पोर्टल भी तैयार कर रही है।



इससे लोगों को अलग-अलग जगह भागदौड़ नहीं करनी होगी। पूरी प्रक्रिया एक ही जगह से पूरी हो सकेगी।



स्कीम की पूरी डिटेल

इस स्कीम के तहत गैस वितरण कंपनियों को हर नए घरेलू कनेक्शन पर फायदा मिलेगा। कंपनी को हर ऐसे घर के लिए 200 मानक घन मीटर अतिरिक्त सस्ती गैस दी जाएगी।



शर्त यह है कि उपभोक्ता कनेक्शन लेकर गैस का इस्तेमाल शुरू करे। साथ ही नियमित रूप से बिल भी भरे। इससे कंपनियों की गैस खरीद लागत में कमी आने की उम्मीद है।



निष्क्रिय कनेक्शन भी होंगे सक्रिय

इस स्कीम से डिस्ट्रीब्यूटर कंपनियों को एक और फायदा मिलेगा। जो पीएनजी कनेक्शन अभी इस्तेमाल में नहीं हैं, उन्हें सक्रिय करने में मदद मिलेगी।



इससे कंपनियां अपने मौजूदा नेटवर्क का बेहतर इस्तेमाल कर सकेंगी। साथ ही ज्यादा घरों तक पहुंच बनाना भी आसान होगा।



निवेश जल्दी होगा वसूल

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, इस स्कीम से कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी। नए कनेक्शन में किया गया निवेश अभी वसूलने में करीब 10 साल लगते हैं।



इस स्कीम के बाद यह समय घटकर सिर्फ तीन साल रह जाएगा। इससे कंपनियां तेजी से अपना नेटवर्क बढ़ा सकेंगी।



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यूजर्स को क्या मिलेगा फायदा

इंसेंटिव भले ही कंपनियों को मिलेगा, लेकिन असली फायदा आम उपभोक्ता को भी होगा। पीएनजी यूजर्स को एलपीजी सिलेंडर बुकिंग की झंझट नहीं झेलनी पड़ेगी।



डिलीवरी में देरी जैसी परेशानी भी खत्म होगी। साथ ही एलपीजी के मुकाबले पीएनजी सस्ती पड़ती है। इससे घर का रसोई बजट भी संभल सकेगा।



एलपीजी आयात का बड़ा बोझ

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक देश है। देश अपनी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इसका बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से ही आता है।



साल 2025 में भारत ने करीब 22 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी आयात किया। इस पर करीब 12 अरब डॉलर खर्च हुए।



अभी कितने पीएनजी कनेक्शन

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में अभी करीब 17.4 मिलियन घरेलू पीएनजी कनेक्शन हैं। नई स्कीम से इस संख्या में तेजी से बढ़ोतरी की उम्मीद है।



इंद्रप्रस्थ गैस और महानगर गैस जैसी कंपनियों को अपने नेटवर्क का विस्तार करने का बड़ा मौका मिलेगा। आने वाले महीनों में और शहर इस दायरे में आ सकते हैं।



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