संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम में दर्शन और दीक्षा पर रोक, शिष्य दीपक लोधी की मौत के बाद लिया फैसला
वृंदावन की गलियों में प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए रोज हजारों लोग आते हैं। ऐसी मान्यता है कि उनके मुख से निकले शब्द लोगों के जीवन को बदल देते हैं। लेकिन हाल ही में प्रेमानंद महाराज के आश्रम से एक बड़ी खबर सामने आ रही है।
खबरों के मुताबिक आश्रम में श्रद्धालुओं के दर्शन और दीक्षा प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है। साथ ही साधक-साधिकाओं के लिए वर्षों से चले आ रहे पारंपरिक ड्रेस कोड को भी समाप्त कर दिया गया है।
हालांकि इन बदलावों की आधिकारिक तौर पर पुष्टि होना बाकी है। लेकिन माना जा रहा है कि यह कदम आश्रम से जुड़े साधक रसिक दुलारी शरण (दीपक लोधी) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद उठाया गया है।
25 सितंबर को गुरु कृपा कुंज अपार्टमेंट से गिरकर हुई इस घटना और फॉरेंसिक जांच के बीच आश्रम प्रशासन का यह फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्या है यह पूरी घटना
खबरें के मुताबिक, दीपक लोधी मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। आश्रम में उन्हें रसिक दुलारी शरण के नाम से जाना जाता था। दो साल पहले वे वृंदावन आए थे। यहां उन्होंने प्रेमानंद जी महाराज से दीक्षा ली थी। बिजली का काम जानने के कारण उन्हें आश्रम में यही सेवा सौंपी गई थी। एक साल पहले उनकी मां भी उनसे मिलने वृंदावन आई थीं।
25 सितंबर को दीपक लोधी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। 25 सितंबर की सुबह वे गुरु कृपा कुंज अपार्टमेंट की चौथी मंजिल पर थे। अचानक वे छत से नीचे गिर गए। उनकी मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
सीसीटीवी फुटेज में उनके गिरने की घटना दर्ज हुई है। पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर चोटों की पुष्टि हुई है। इसलिए आश्रम में दर्शन और दीक्षा प्रक्रिया में बदलाव किया गया है।
प्रेमानंद महाराज के आश्रम में हुए बदलाव
इस घटना के बाद प्रेमानंद महाराज ने मंत्र दीक्षा की प्रक्रिया अनिश्चितकाल के लिए रोक दी गई है। अब किसी भी नए व्यक्ति को तुरंत शिष्य नहीं बनाया जाएगा। जब तक साधक में पूर्ण समर्पण न हो, दीक्षा नहीं मिलेगी।
इस फैसले से दीक्षा लेने की उम्मीद में आए लोग निराश हैं। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं को बिना दीक्षा के ही लौटना पड़ रहा है। देश के कोने-कोने से लोग महाराज जी के दर्शन करने आते हैं।
अब दर्शन व्यवस्था पर भी कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। पूछताछ केंद्र से लोगों को वापस लौटाया जा रहा है। आश्रम प्रबंधन अब सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करना चाहता।
इसी वजह से सोशल मीडिया पर भी नए नियमों की जानकारी दी गई है। भक्त अब स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि इन बदलावों की आधिकारिक तौर पर पुष्टि होना बाकी है।
शिष्यों के पहनावे में हुआ बदलाव
आश्रम के शिष्यों की पहचान उनके खास वस्त्रों से होती थी। अब आम शिष्यों के लिए पीले और सफेद कपड़े बंद कर दिए गए हैं। अब वे सामान्य कपड़ों में ही वृंदावन में निवास करेंगे।
केवल महाराज जी के निजी सेवक ही पुरानी वेशभूषा में रहेंगे। वे सफेद अगोछा और पीली लोई ओढ़ेंगे। इस बदलाव का मकसद शिष्यों की पहचान को अलग रखना है। इससे आम लोगों से उनका सीधा संपर्क कम हो सकेगा।
आश्रम में आगे क्या बदलाव हो सकते हैं
आश्रम प्रबंधन की ओर से एक विशेष संदेश सामने आया है। इसमें साधक और साधिकाओं के लिए कई कड़े निर्देश दिए गए हैं। इस घटना के बाद महाराज जी ने यह सख्त फैसला लिया है।
अब ठेला, दुकान या कोई व्यवसाय चलाने वाले गृहस्थ और विरक्त शिष्य सफेद वस्त्र नहीं पहनेंगे। उन्हें सामान्य कपड़े या कुर्ता-पायजामा ही पहनना होगा। सफेद पोशाक पहनने की छूट केवल महाराज जी और केलि कुंज की प्रत्यक्ष सेवा में लगे साधुओं को ही होगी।
आश्रम का कहना है कि यह बदलाव व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी था। परिसर में बाहरी लोगों का प्रवेश सीमित रहेगा। शिष्यों के लिए नए अनुशासन नियम बनाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में सुरक्षा नियम और कड़े हो सकते हैं।