अजगर के खून से कम होगा मोटापा, वैज्ञानिकों ने खोजा वजन घटाने वाला मॉलिक्यूल, नहीं होगा साइड इफैक्ट

Jitendra Shrivastava | Mar 23, 2026, 20:03 IST
Photograph: (thesootr)
वैज्ञानिकों ने अजगर के खून में एक मॉलिक्यूल पाया, जो इंसानों में बिना साइड इफेक्ट के वजन घटाने में मदद कर सकता है। चूहों पर हुआ ट्रायल सफल रहा।

News In Short

  • अजगर के खून में पाया गया वजन घटाने का मॉलिक्यूल।
  • चूहों पर सफल ट्रायल, कोई साइड इफेक्ट नहीं।
  • मॉलिक्यूल का असर इंसानों में भी होगा।
  • अजगर का मॉलिक्यूल भूख नियंत्रण करता है।
  • वजन घटाने के लिए सुरक्षित तरीका मिल सकता है।

News In Detail

अजगर के खून में वैज्ञानिकों ने एक ऐसा अनोखा मॉलिक्यूल पाया है, जो इंसानों का मोटापा कम करने या वजन घटाने वाली दवाओं का आधार बन सकता है। चूहों पर हुए ट्रायल में इस मॉलिक्यूल ने भूख को कम किया और वजन घटाने में मदद की, बिना किसी साइड इफेक्ट के।



कोलोराडो यूनिवर्सिटी बोल्डर की स्टडी में पाया गया कि यह नेचुरल कंपाउंड सीधे दिमाग के उस हिस्से पर काम करता है जो भूख को नियंत्रित करता है। यह खोज मोटापे के इलाज में एक गेमचेंजर साबित हो सकती है। यह मॉलिक्यूल इंसानों में भी पाया जाता है।



वजन घटाने वाला मॉलिक्यूल

हाल ही में वैज्ञानिकों ने अजगर के खून (python-blood) में एक अद्वितीय मॉलिक्यूल खोजा है, जो इंसानों में बिना किसी साइड इफेक्ट के वजन घटाने में मदद कर सकता है। इस मॉलिक्यूल को pTOS नाम दिया गया है।



नेचर मेटाबॉलिज्म जर्नल में पब्लिस रिसर्च के मुताबिक, यह मॉलिक्यूल अजगर के खून में पाया गया, जो भारी शिकार खाने के बाद महीनों तक बिना भोजन के जीवित रहते हैं। जब अजगर भारी शिकार निगलते हैं, तो उनके खून में यह मॉलिक्यूल 1000 गुना तक बढ़ जाता है, जिससे वे भूख महसूस नहीं करते और ऊर्जा के स्तर पर कोई कमी नहीं आती।



चूहों पर सफल ट्रायल

वैज्ञानिकों ने इस मॉलिक्यूल का परीक्षण चूहों पर किया। ट्रायल में पाया गया कि जब चूहों को pTOS मॉलिक्यूल दिया गया, तो उन्होंने खाना कम करना शुरू कर दिया और उनका वजन घटने लगा।



यह प्रक्रिया बिना किसी कमजोरी, उल्टी या मसल्स लॉस के हुई। चूहों ने बिना किसी शारीरिक नुकसान के अपना वजन घटाया, जो इस शोध को और भी महत्वपूर्ण बनाता है।



यह मॉलिक्यूल इंसानों में भी काम करेगा

अच्छी बात यह है कि यह मॉलिक्यूल इंसानों में भी पाया जाता है, हालांकि बहुत कम मात्रा में। जब हम पेट भरकर खाना खाते हैं, तो हमारे शरीर में भी pTOS का स्तर बढ़ता है, लेकिन यह कम मात्रा में होता है।



वैज्ञानिकों का मानना है कि इस मॉलिक्यूल के आधार पर भविष्य में ऐसी दवाइयां बनाई जा सकती हैं जो बिना साइड इफेक्ट के वजन घटाने में मदद करेंगी। यह न सिर्फ वजन घटाने में सहायक होगा, बल्कि मांसपेशियों को भी मजबूत रखेगा और उम्र के साथ होने वाली कमजोरी को भी रोकेगा।



भविष्य में इस खोज का महत्व

यह मॉलिक्यूल भविष्य में वजन घटाने वाली दवाइयों का एक नया विकल्प हो सकता है। यह दवाएं न केवल सुरक्षित होंगी, बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों को भी बिना नुकसान पहुंचाए वजन घटाने में मदद करेंगी। अगर यह दवा इंसानों में काम करती है, तो यह मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है।



कैसे काम करता है यह मॉलिक्यूल?

अजगर के पेट में पाए जाने वाले बैक्टीरिया pTOS मॉलिक्यूल का निर्माण करते हैं, जो पेट भरने के बाद सीधे दिमाग के हाइपोथैलेमस (जो भूख को नियंत्रित करता है) को संदेश भेजता है कि पेट भर चुका है। इससे व्यक्ति को भूख नहीं लगती, और वे लंबी अवधि तक भोजन के बिना स्वस्थ रहते हैं। यह मॉलिक्यूल इंसानों में भी पाया जाता है, हालांकि इसकी मात्रा कम होती है।



FAQ

  1. अजगर के खून में किस मॉलिक्यूल की खोज हुई है?
    वैज्ञानिकों ने अजगर के खून में pTOS नामक मॉलिक्यूल की खोज की है, जो इंसानों में वजन घटाने में मदद कर सकता है।
  2. चूहों पर इस मॉलिक्यूल का क्या प्रभाव पड़ा?
    चूहों पर ट्रायल में पाया गया कि pTOS मॉलिक्यूल से चूहों ने खाना कम किया और उनका वजन घटने लगा, बिना किसी साइड इफेक्ट के।
  3. क्या यह मॉलिक्यूल इंसानों में भी काम करेगा?
    जी हां, यह मॉलिक्यूल इंसानों में भी पाया जाता है, हालांकि कम मात्रा में। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसे वजन घटाने वाली दवाओं में इस्तेमाल किया जा सकता है।

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