एशिया की टॉप-100 यूनिवर्सिटी से बाहर हुआ दिल्ली विश्वविद्यालय, IIT दिल्ली की रैंकिंग भी गिरी
IIT दिल्ली की रैंकिंग 59 से गिरकर 66 पर पहुंची
IIT दिल्ली इस बार भी एशिया में भारत का सबसे बेहतर रैंक हासिल करने वाला संस्थान बना हुआ है। हालांकि, QS एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में इसकी स्थिति पिछले साल के मुकाबले कमजोर हुई है।
- पिछले साल रैंक: 59
- इस साल रैंक: 66
- गिरावट: 7 स्थान
भारतीय संस्थानों में सबसे आगे रहने के बावजूद एशियाई स्तर पर IIT दिल्ली को अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
दिल्ली विश्वविद्यालय टॉप-100 से बाहर
दिल्ली विश्वविद्यालय के लिए इस बार रैंकिंग में गिरावट अधिक चर्चा का विषय बनी है। पिछले साल एशिया में 95वें स्थान पर रहने वाला DU इस बार 106वें स्थान पर पहुंच गया है।
इस गिरावट के साथ विश्वविद्यालय एशिया की टॉप-100 यूनिवर्सिटी की सूची से बाहर हो गया है। देश के प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शामिल DU में बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एशिया की टॉप-100 में भारत के 6 संस्थान
QS एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भारत के छह संस्थानों ने एशिया की टॉप-100 सूची में जगह बनाई है। इनमें पांच IIT शामिल हैं।
- टॉप-100 में भारत के 6 संस्थान
- टॉप-200 में भारत के 21 संस्थान
- टॉप-500 में भारत के 67 संस्थान
यह आंकड़े एशियाई स्तर पर भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों की मौजूदगी को दर्शाते हैं।
JNU और जामिया की रैंकिंग में सुधार
दिल्ली के दो प्रमुख विश्वविद्यालयों ने इस बार बेहतर प्रदर्शन किया है।
- JNU: पिछले साल के मुकाबले 2 स्थान ऊपर आकर 128वें स्थान पर पहुंचा।
- जामिया मिल्लिया इस्लामिया: 197वें स्थान से सुधार करते हुए 183वें स्थान पर पहुंचा।
दोनों संस्थानों की रैंकिंग में सुधार दिल्ली के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
यह खबर क्यों जरूरी है
अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी रैंकिंग विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए संस्थानों की शैक्षणिक स्थिति समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। रैंकिंग में गिरावट और सुधार से विश्वविद्यालयों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा, शोध क्षमता और शैक्षणिक गुणवत्ता पर चर्चा को दिशा मिलती है।
आगे क्या?
भारतीय विश्वविद्यालयों के सामने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी रैंकिंग बेहतर करने की चुनौती है। शोध, शैक्षणिक गुणवत्ता और वैश्विक सहयोग जैसे क्षेत्रों में सुधार से संस्थानों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत हो सकती है।