गेहूं, चना, सरसों समेत 6 रबी फसलों का MSP बढ़ा, जानें किसानों को अब कितना मिलेगा नया भाव
इस बार MSP में सबसे बड़ी बढ़ोतरी कुसुम पर हुई है। कुसुम का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 675 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है। इसके बाद सरसों के MSP में 413 रुपए और मसूर में 390 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। वहीं गेहूं के MSP में सबसे कम 25 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा हुआ है।
एक नजर में देखें रबी फसल का नया MSP
| फसल | पुराना MSP | नया MSP | बढ़ोतरी |
| गेहूं | ₹2,585 | ₹2,610 | ₹25 |
| जौ | ₹2,150 | ₹2,286 | ₹136 |
| चना | ₹5,875 | ₹5,958 | ₹83 |
| मसूर | ₹7,000 | ₹7,390 | ₹390 |
| रेपसीड-सरसों | ₹6,200 | ₹6,613 | ₹413 |
| कुसुम | ₹6,540 | ₹7,215 | ₹675 |
प्रतिशत में कुसुम को सबसे बड़ा फायदा
सिर्फ रुपए की बढ़ोतरी ही नहीं, प्रतिशत के हिसाब से भी कुसुम सबसे आगे है। पिछले एमएसपी के मुकाबले कुसुम का समर्थन मूल्य करीब 10.3 फीसदी बढ़ा है।
सरसों में करीब 6.7 फीसदी और जौ में करीब 6.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मसूर का MSP करीब 5.6 फीसदी बढ़ा है। चने में करीब 1.4 फीसदी और गेहूं में करीब एक फीसदी बढ़ोतरी हुई है।
इससे साफ है कि इस बार तिलहन और कुछ दलहन फसलों में अपेक्षाकृत ज्यादा बढ़ोतरी की गई है।
गेहूं का MSP 25 रुपए बढ़ा
गेहूं का नया MSP 2 हजार 610 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। पिछले सीजन में यह 2 हजार 585 रुपए प्रति क्विंटल था। यानी इस बार गेहूं के एमएसपी में 25 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP- Commission for Agricultural Costs and Prices) के मुताबिक गेहूं की अनुमानित उत्पादन लागत 1 हजार 264 रुपए प्रति क्विंटल है। नए MSP पर उत्पादन लागत के मुकाबले करीब 106 फीसदी का मार्जिन रहने का अनुमान है।
गेहूं की बढ़ोतरी रकम के हिसाब से बाकी पांच फसलों से कम है। इसके बावजूद गेहूं देश की प्रमुख रबी फसल होने के कारण इस फैसले का असर बड़ी संख्या में किसानों पर पड़ता है।
सरसों के एमएसपी में 413 रुपए की वृद्धि
रेपसीड और सरसों का MSP बढ़ाकर 6 हजार 613 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है। पिछले साल यह 6 हजार 200 रुपए प्रति क्विंटल था।
इस तरह किसानों को प्रति क्विंटल 413 रुपए ज्यादा MSP मिलेगा। पिछले साल के मुकाबले यह बढ़ोतरी करीब 6.7 फीसदी है।
सरसों की अनुमानित उत्पादन लागत 3 हजार 367 रुपए प्रति क्विंटल बताई गई है। नए MSP पर लागत के मुकाबले करीब 96 फीसदी मार्जिन रहने का अनुमान है।
मसूर में 390 रुपए का इजाफा
मसूर का नया MSP 7 हजार 390 रुपए प्रति क्विंटल तय हुआ है। पिछले साल यह 7 हजार रुपए प्रति क्विंटल था।
इस बार मसूर के MSP में 390 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। प्रतिशत के हिसाब से यह बढ़ोतरी करीब 5.6 फीसदी बैठती है।
दलहन किसानों के लिए यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि MSP में सीधी बढ़ोतरी उनकी उपज के लिए सरकारी खरीद का न्यूनतम मूल्य बढ़ाती है।
चने के MSP में 83 रुपए बढ़े
चना किसानों के लिए नया MSP 5 हजार 958 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। पिछले सीजन में यह 5 हजार 875 रुपए प्रति क्विंटल था।
इस तरह चने में 83 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। पुराने MSP के मुकाबले यह करीब 1.4 फीसदी ज्यादा है।
जौ का MSP 136 रुपए बढ़ा
जौ का नया MSP 2 हजार 286 रुपए प्रति क्विंटल किया गया है। पिछले साल यह 2 हजार 150 रुपए प्रति क्विंटल था।
इस तरह जौ के MSP में 136 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा हुआ है। प्रतिशत में देखें तो बढ़ोतरी करीब 6.3 फीसदी है।
कुसुम में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
छह रबी फसलों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम के MSP में हुई है। इसका नया MSP 7 हजार 215 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है।
पिछले साल कुसुम का MSP 6 हजार 540 रुपए प्रति क्विंटल था। यानी किसानों को अब 675 रुपए प्रति क्विंटल ज्यादा MSP मिलेगा।
प्रतिशत के हिसाब से यह बढ़ोतरी करीब 10.3 फीसदी है। छह फसलों में यह सबसे ज्यादा वृद्धि है।
CACP के मुताबिक कुसुम की अनुमानित उत्पादन लागत 4 हजार 810 रुपए प्रति क्विंटल है। नए MSP पर लागत के मुकाबले करीब 50 फीसदी मार्जिन रहने का अनुमान है।
किसानों को कितना अतिरिक्त मिल सकता है
MSP में बढ़ोतरी का फायदा किसान की बेची गई उपज पर निर्भर करेगा। उदाहरण के तौर पर कोई किसान 100 क्विंटल सरसों MSP पर बेचता है तो पिछली दर की तुलना में उसे 41 हजार 300 रुपए अतिरिक्त मिल सकते हैं।
इसी तरह 100 क्विंटल कुसुम बेचने पर अंतर 67 हजार 500 रुपए होगा। 100 क्विंटल मसूर पर यह अंतर 39 हजार रुपए बनता है।
हालांकि वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि किसान की कितनी उपज MSP पर खरीदी जाती है।
MSP बढ़ने से क्या होगा
MSP वह न्यूनतम कीमत है जिस पर सरकार तय फसलों की खरीद कर सकती है। इसका उद्देश्य किसानों को बाजार में कीमत गिरने की स्थिति में न्यूनतम मूल्य का आधार देना है।
MSP की घोषणा होने का अर्थ यह नहीं है कि देश में पैदा होने वाली पूरी फसल इसी कीमत पर खरीदी जाएगी। वास्तविक सरकारी खरीद फसल, राज्य, खरीद व्यवस्था और संबंधित एजेंसियों पर निर्भर करती है।
यही वजह है कि MSP बढ़ने के साथ सरकारी खरीद की मात्रा भी किसानों के वास्तविक लाभ के लिए महत्वपूर्ण रहती है।
MSP कैसे तय होता है?
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) रबी फसलों के MSP की सिफारिश करता है। इसके बाद केंद्र सरकार (Central government) इन सिफारिशों के आधार पर MSP पर फैसला करती है।
MSP तय करते समय उत्पादन लागत और किसानों को मिलने वाले रिटर्न को देखा जाता है। बाजार की मांग और आपूर्ति भी महत्वपूर्ण रहती है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों को भी ध्यान में रखा जाता है।
इसके अलावा अलग-अलग फसलों के बीच मूल्य संतुलन और कृषि क्षेत्र से जुड़े आर्थिक पहलुओं का आकलन किया जाता है। सरकार के अनुसार उत्पादन लागत के ऊपर कम से कम 50 फीसदी मार्जिन सुनिश्चित करने के सिद्धांत को भी ध्यान में रखा जाता है।