ट्रेन में रील देखी या तेज आवाज में चलाए गाने तो हो जाएगी जेल! रेलवे ने तय किए सख्त नियम, कोच से भी होंगे बाहर

Aman Vaishnav | Oct 19, 2026, 11:04 IST
कोच में तेज आवाज में वीडियो चलाने पर साउर्दर्न रेलवे की सख्ती, एक हजार रुपए का जुर्माना और जेल की सजा
आपको भी ट्रेन में फोन चलाने या रील्स देखने की आदत है, तो यह खबर आपको झटका दे सकती है। इतना ही नहीं नियम तोड़ने पर एक हजार रुपए तक का जुर्माना भी लग सकता है। साथ ही यात्रियों को ट्रेन या स्टेशन से बाहर भी निकाला जा सकता है।वहीं बार-बार नियम तोड़ने पर 6 महीने तक की जेल और 5 हजार रुपए तक का जुर्माना भी हो सकता है।

रेलवे में शोर पर कार्रवाई

बता दें कि साउदर्न रेलवे ने इसके लिए जन विश्वास अधिनियम के तहत संशोधित रेलवे एक्ट का सहारा लिया है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह नियम सिर्फ साउदर्न रेलवे तक सीमित नहीं रहेगा। देश के दूसरे रेलवे जोन और मेट्रो रेल सिस्टम भी इसे लागू कर सकते हैं।



नियमों और जुर्माने से जुड़ी मुख्य बातें

  • पहली बार गलती करने पर: एक हजार रुपए का नकद जुर्माना लगेगा। साथ ही यात्री को बोगी या रेलवे स्टेशन परिसर से बाहर निकाल दिया जाएगा।
  • बार-बार वही हरकत दोहराने पर: मामले की गंभीरता को देखते हुए 6 महीने तक की जेल और 5 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
  • कार्रवाई करने का अधिकार: ट्रेन में चल रहे टीटीई (TTE) और रेलवे के वाणिज्यिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर ही यह एक्शन ले सकते हैं।
  • लागू कानूनी धाराएं: इसके लिए रेलवे अधिनियम भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा का प्रावधान लागू किया गया है।

क्या कहता है कानून और बीएनएस की धारा?

रेलवे के नए नियमों (Railway New Rules) के मुताबिक, मेट्रो में हुड़दंग (साउर्दर्न रेलवे सर्कुलर) मचाने या हंगामा करने पर भी जुर्माना लग सकता है। ऐसे यात्रियों को मेट्रो कोच से नीचे भी उतारा जा सकता है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) में भी सार्वजनिक जगह पर उपद्रव करना अपराध माना गया है। अगर किसी के काम से आम लोगों को परेशानी होती है या उनके लिए खतरा पैदा होता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।



सर्कुलर में क्या निर्देश दिए गए ?

साउदर्न रेलवे ने इसी महीने अपने सभी रेल मंडलों को एक सर्कुलर भेजा है। इसकी कॉपी रेलवे बोर्ड को भी भेजी गई है। इसमें साफ कहा गया है कि स्टेशन या ट्रेन में स्पीकर पर तेज आवाज में गाने या ऑडियो चलाना यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी है।



सर्कुलर में जुलाई 2012 में रेलवे बोर्ड की ओर से जारी पुराने निर्देशों का भी जिक्र है। उस समय भी बोर्ड ने ट्रेन के डिब्बों में तेज आवाज में बात करने पर रोक लगाने की बात कही थी। साथ ही फोन पर लंबी बातचीत करने और तेज या आपत्तिजनक रिंगटोन बजाने पर भी रोक लगाने की बात कही थी। यात्रियों को इन नियमों के बारे में जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए थे।



तीन भाषाओं में चलेगा जागरूकता अभियान

बता दें कि साउदर्न रेलवे ने अपने सर्कुलर में माना है कि आज इंटरनेट हर किसी के हाथ में है। ऐसे में लोग सार्वजनिक जगहों पर भी बेझिझक स्पीकर पर वीडियो और रील्स देखने लगते हैं। इससे दूसरे यात्रियों को परेशानी होती है और उनकी शांति भंग होती है। रेलवे का मानना है कि इस पर रोक लगाने के लिए अब सख्त कदम उठाना जरूरी है।



रेलवे ने सभी मंडलों को यात्रियों को नियमों की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए स्टेशनों पर लगे माइक से हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषाओं में लगातार अनाउंसमेंट किए जाएंगे।



टीटीई और कमर्शियल विभाग के अधिकारियों को भी कार्रवाई का अधिकार दिया गया है। वे सफर में दूसरे यात्रियों को परेशान करने वालों पर मौके पर ही हजार रुपए तक का जुर्माना लगा सकते हैं।



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