चढ़ावा चोरी के बीच राम मंदिर ट्रस्ट संतों की शरण में, बनाई नई समिति

Aman Vaishnav | Jul 26, 2026, 14:30 IST
राम मंदिर चढ़ावा चोरी
राम मंदिर में दान विवाद के बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नौ संतों की स्थायी धार्मिक समिति बनाई है। यह समिति मंदिर की पूजा-परंपरा तय करेगी।

जब भरोसा डगमगाए तो संतों की तरफ देखा जाता है

सोचिए, किसी संस्था पर पैसों की गड़बड़ी के आरोप लगें तो वह क्या करेगी? राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसका जवाब पुराने तरीके से दिया है, संतों को आगे करके।



समझें क्या है मामला

दरअसल ट्रस्ट ने नौ संतों और विद्वानों की एक स्थायी धार्मिक समिति बनाई है। यह समिति राम मंदिर की पूजा, अनुष्ठान और परंपराएं तय करेगी।



बता दें कि यह फैसला दान में गड़बड़ी के आरोपों के बीच आया है। समिति में पुराने और नए, दोनों तरह के चेहरे हैं। एक संत तो TEDx में भाषण देते हैं और LinkedIn पर भी सक्रिय हैं।



यह आपसे क्यों जुड़ा है

अगर आप राम मंदिर से आस्था रखते हैं तो यह जानना जरूरी है कि अब मंदिर की रोज की पूजा और परंपराएं कौन तय करेगा। यह सिर्फ प्रशासनिक खबर नहीं है, यह सीधे उस श्रद्धा से जुड़ी है जो करोड़ों लोग मंदिर से रखते हैं।



पहले क्या था

ट्रस्ट पिछले कुछ महीनों से भरोसे के गंभीर संकट से गुजर रहा है। दान में कथित गबन के आरोपों के बाद जांच शुरू हुई। इसी क्रम में महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।



इसके बाद ट्रस्ट ने कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव बनाया। यह विवाद इतना बड़ा हुआ कि उत्तर प्रदेश सरकार को भी इसमें दखल देना पड़ा।



क्या हुआ और क्यों

22 जुलाई की बैठक में ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने नौ सदस्यीय धार्मिक समिति को मंजूरी दी। यह बैठक मणिराम दास छावनी में हुई, जो राम मंदिर आंदोलन के दौरान एक अहम केंद्र रही थी।



ट्रस्ट का कहना है कि यह कदम खासकर अयोध्या के संतों और स्थानीय निवासियों का भरोसा फिर मजबूत करेगा। संदेश साफ है, चाहे प्रबंधन में जो भी हलचल हो मंदिर की पूजा-परंपरा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।



क्या संतों को आगे करने से भरोसा लौट आएगा?

समिति के अध्यक्ष खुद ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास हैं। उनकी बढ़ती उम्र और गिरती सेहत के चलते अब कमल नयन दास ज्यादातर बैठकों में उनका प्रतिनिधित्व करते हैं। वे उनके उत्तराधिकारी माने जाते हैं।



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समिति में एक और अहम नाम- दिनेंद्र दास

समिति में एक और अहम नाम है, दिनेंद्र दास का। वे निर्मोही अखाड़े से जुड़े हैं और राम जन्मभूमि विवाद में एक याचिकाकर्ता भी रहे हैं।



दिनेंद्र दास की नियुक्ति ऐसे समय आई है जब अखाड़े के भीतर कुछ लोग उन्हें बदलने की मांग कर रहे थे। इस नियुक्ति ने उनकी स्थिति को मजबूत किया है।



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आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण

तीसरा नाम आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण का है। वे संस्कृत के विद्वान हैं और TEDx Youth जैसे मंचों पर सनातन धर्म पर बोलते रहे हैं।



कहा जाता है कि मंदिर उद्घाटन के समय युवा पुजारियों को प्रशिक्षण देने में भी उनकी भूमिका थी, और राम लला की मूर्ति चुनने में भी उनकी राय ली गई थी।



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स्वामी रामानंद दास और स्वामी राजकुमार दास

इसके अलावा बाकी दो अयोध्या के संत, स्वामी रामानंद दास और स्वामी राजकुमार दास, रामानंदी परंपरा से जुड़े हैं और रामकथा सुनाने के लिए जाने जाते हैं।



अयोध्या के बाहर से आने वाले तीन संत भी ट्रस्ट के लिए नए नहीं हैं। स्वामी गोविंद देव गिरि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं और शुरू से इससे जुड़े हैं।



वहीं स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ज्योतिर्मठ से हैं, स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ उडुपी के पेजावर मठ से हैं, और स्वामी परमानंद महाराज रायबरेली के पास मावई धाम से जुड़े हैं।



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कौन-कौन शामिल है

नौ सदस्यों की सूची इस तरह है: महंत नृत्य गोपाल दास, कमल नयन दास, दिनेंद्र दास, आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण, स्वामी रामानंद दास और स्वामी राजकुमार दास (सभी अयोध्या से), और स्वामी गोविंद देव गिरि, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती व स्वामी परमानंद महाराज (अयोध्या के बाहर से)।



दोनों पक्षों की बात

ट्रस्ट का पक्ष यह है कि यह समिति सिर्फ धार्मिक मामलों तक सीमित है और प्रबंधन के संकट से इसका कोई सीधा संबंध नहीं।



दूसरी तरफ आलोचकों का कहना है कि यह कदम असल में ट्रस्ट की साख को बचाने की कोशिश है, ठीक उसी समय जब CEO की नियुक्ति पर फैसला टाल दिया गया। दान गबन के आरोप अभी जांच के दायरे में हैं, इसलिए किसी भी व्यक्ति पर दोष तय नहीं हुआ है।



और यही वो मोड़ है जहां प्रशासनिक संकट और धार्मिक आस्था आपस में उलझते नजर आते हैं।



आगे क्या होगा

ट्रस्ट की अगली बड़ी परीक्षा नए CEO की नियुक्ति होगी, जिस पर फैसला एक महीने के लिए टाल दिया गया है। तब तक धार्मिक समिति के जरिए भरोसा बनाए रखने की कोशिश जारी रहेगी।



एक बात जो आप नहीं जानते थे

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि मंदिर की पूजा-व्यवस्था सीधे ट्रस्ट प्रबंधन के अधिकारी तय करते हैं। असल में अब यह अधिकार पूरी तरह इस नौ सदस्यीय संत समिति के पास होगा, प्रशासनिक अधिकारियों के पास नहीं।



अब आप क्या करें

अयोध्या का राम मंदिर से जुड़ी आधिकारिक घोषणाओं के लिए ट्रस्ट के आधिकारिक बयानों पर भरोसा करें, अफवाहों पर नहीं।



FAQ

  1. राम मंदिर की धार्मिक समिति में कितने सदस्य हैं?
    इस समिति में कुल नौ सदस्य हैं। इनमें पांच अयोध्या के संत और चार अयोध्या के बाहर के संत शामिल हैं। यह समिति मंदिर की पूजा और परंपराएं तय करेगी।
  2. राम मंदिर की धार्मिक समिति क्यों बनाई गई?
    यह समिति ट्रस्ट में दान गबन के आरोपों के बाद बनी है। ट्रस्ट चाहता है कि मंदिर की धार्मिक परंपराएं इस विवाद से अलग और सुरक्षित रहें।
  3. क्या राम मंदिर के CEO की नियुक्ति हो गई?
    नहीं, CEO पर फैसला एक महीने के लिए टाल दिया गया है। फिलहाल सिर्फ धार्मिक समिति को मंजूरी मिली है।

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