राम मंदिर चढ़ावा गबन: SOP तोड़ी गई, ड्राइवर के पास मिली हुंडियों की चाबियां
समझें क्या है पूरा मामला
- राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला सामने आया था।
- इसकी जांच के लिए SIT बनाई गई थी।
- SIT की रिपोर्ट में SOP का उल्लंघन मिला है।
- आरोपी टिन्नू यादव के पास हुंडियों की चाबियां थीं।
- मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया है।
SBI और ट्रस्ट की SOP का पालन नहीं हुआ
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के गबन का मामला लगातार चर्चा में है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT यानी Special Investigation Team) बनाया था। SIT की शुरुआती रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के बीच एक SOP यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तय की गई थी। लेकिन बाद में चढ़ावा गिनने के दौरान इस SOP का पालन नहीं किया गया। SIT ने इसे गंभीर और जानबूझकर की गई लापरवाही माना है।
सितंबर 2024 में हुई थी SOP पर बातचीत
सूत्रों के मुताबिक सितंबर 2024 और फरवरी 2025 में ट्रस्ट और SBI के अधिकारियों के बीच कई बैठकें हुई थीं। इन बैठकों में चढ़ावे की गिनती, हुंडियों यानी दान पात्र की सुरक्षा और नकदी के प्रबंधन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद एक तय प्रक्रिया यानी SOP बनाई गई। इस SOP पर SBI की तरफ से अधिकारी गोविंद मिश्र ने हस्ताक्षर किए थे। ट्रस्ट की तरफ से अनिल मिश्रा ने इस पर साइन किया था। लेकिन जांच में पता चला कि वास्तविक चढ़ावा गिनती में यह तय प्रक्रिया अपनाई ही नहीं गई। यह बात SIT की रिपोर्ट में साफ तौर पर दर्ज है।
ड्राइवर के पास थी हुंडियों की चाबियां
SIT रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास हुंडियों की चाबियां थीं। हैरानी की बात यह है कि उसके पास इसके लिए कोई अधिकृत आदेश नहीं था। टिन्नू मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का ड्राइवर बताया जाता है। जांच में यह भी पता चला कि ट्रस्ट को पहले से ही चढ़ावे में गड़बड़ी की आशंका हो गई थी। इसी वजह से SOP बनाई गई थी। लेकिन इसके बावजूद तय नियमों को लागू नहीं किया गया। यह बात जांच में सबसे गंभीर मानी जा रही है।
नकदी प्रबंधन में मिलीं कई खामियां
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में चढ़ावा गणना कक्ष से जुड़ी कई और गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में नकदी के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि गणना व्यवस्था में भी कई स्तर पर लापरवाही मिली है। जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में कुछ सख्त सिफारिशें भी की हैं। इन सिफारिशों के आधार पर आगे की कार्रवाई हो सकती है। SIT अब इस मामले की और गहराई से जांच कर रही है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा
इस पूरे मामले के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दिया है। दोनों ने यह कदम नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उठाया बताया जा रहा है। हालांकि ट्रस्ट की तरफ से अभी इस पर कोई औपचारिक और विस्तृत बयान जारी नहीं हुआ है। इस्तीफों को SIT जांच और एफआईआर की कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है। बता दें कि चंपत राय और अनिल मिश्रा पर सीधे कोई वित्तीय आरोप दर्ज नहीं है। फिर भी निगरानी में चूक के चलते उन पर लगातार दबाव बना हुआ था।
आठ आरोपियों पर FIR, सभी गिरफ्तार
SIT की सिफारिश के आधार पर इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। अयोध्या पुलिस ने एफआईआर में नामजद सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा शामिल हैं। इनके अलावा मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और रामाशंकर मिश्रा भी गिरफ्तार हुए हैं। सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू पर भी एफआईआर दर्ज हुई है। इन सभी पर चढ़ावे की नकदी और कीमती सामान की गिनती व प्रबंधन से जुड़े होने का आरोप है। यह बताना जरूरी है कि एफआईआर दर्ज होना दोष सिद्ध होना नहीं माना जाता। मामले की जांच अभी जारी है।
सीएम योगी का सख्त बयान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर साफ और सख्त रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि SIT की रिपोर्ट मिलते ही कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उनका कहना था कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार सच और झूठ को अलग करके रहेगी। उन्होंने यह संदेश भी दिया कि जनता की आस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह बयान मामले की गंभीरता को साफ दिखाता है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
इस पूरी कार्रवाई पर विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी का कहना है कि एफआईआर में ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई है। विपक्ष का आरोप है कि सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर ही कार्रवाई हो रही है। हालांकि राज्य सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से चल रही है। SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार गरमाया हुआ है।
जरूरी FAQ
राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में SIT रिपोर्ट में क्या मिला?
SIT रिपोर्ट में पाया गया कि चढ़ावे की गिनती के लिए बनी SOP यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पालन नहीं हुआ। यह SOP ट्रस्ट और SBI के बीच सितंबर 2024 और फरवरी 2025 में तय हुई थी। रिपोर्ट में इसे गंभीर और जानबूझकर की गई लापरवाही बताया गया है। आरोपी टिन्नू यादव के पास भी हुंडियों की चाबियां मिलीं, जिसके लिए कोई अधिकृत आदेश नहीं था।
चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा क्यों दिया?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। यह इस्तीफा SIT जांच रिपोर्ट और एफआईआर दर्ज होने के बाद आया है। दोनों पर सीधे कोई वित्तीय आरोप दर्ज नहीं है। ट्रस्ट की तरफ से अभी इस्तीफे की औपचारिक वजह नहीं बताई गई है।
इस मामले में कितने लोगों पर FIR हुई और क्या कार्रवाई हुई?
इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। अयोध्या पुलिस ने सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं। इन पर चढ़ावे की नकदी और कीमती सामान की गिनती से जुड़े होने का आरोप है। एफआईआर दर्ज होना दोष सिद्ध होना नहीं माना जाता।
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