राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा एक्शन, टिन्नू यादव समेत 8 के खिलाफ FIR

Pawan Modiya | Jun 25, 2026, 21:22 IST
राम मंदिर चढ़ावा में केस
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। SIT रिपोर्ट और ट्रस्ट की शिकायत के बाद यह कार्रवाई हुई। FIR में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव समेत 8 लोगों को नामजद किया गया है।

    समझें क्या है पूरा मामला

    • अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आया है।
    • ट्रस्ट की शिकायत पर पुलिस ने अब FIR दर्ज कर ली है।
    • FIR में आठ लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।
    • यह कार्रवाई SIT (Special Investigation Team) की जांच रिपोर्ट के बाद हुई है।
    • गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की धाराओं में मामला दर्ज हुआ है।

    ट्रस्ट की शिकायत पर दर्ज हुई FIR

    अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। अब इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। यह एफआईआर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर दर्ज हुई है। शिकायत श्री कृष्ण मोहन की तरफ से दर्ज कराई गई थी। पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह कदम उठाया गया है। FIR में आठ लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। यूपी सरकार के निर्देश पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इनमें धारा 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) शामिल हैं। यह सभी धाराएं गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ी हैं।



    किन आठ लोगों पर दर्ज हुआ मामला

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक एफआईआर में जिन आठ लोगों को नामजद किया गया है, उनमें रमाशंकर यादव शामिल हैं। उन्हें टिन्नू यादव के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला और मनीष यादव का नाम भी एफआईआर में दर्ज है। साथ ही रमाशंकर मिश्रा, सुभाष, करुणेश और लवकुश मिश्रा को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस अब इन सभी आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है। यह देखा जा रहा है कि चढ़ावे से जुड़ी रकम और कीमती सामान में गड़बड़ी में किसकी कितनी भूमिका रही।



    SIT की रिपोर्ट बनी कार्रवाई का आधार

    यह FIR सीधे तौर पर SIT की जांच रिपोर्ट से जुड़ी है। दरअसल कुछ समय पहले राम मंदिर ट्रस्ट के चढ़ावे में वित्तीय गड़बड़ी की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद खुद ट्रस्ट ने जांच की मांग की थी। इसी मांग पर यूपी सरकार ने तीन सदस्यीय SIT का गठन किया। SIT में लखनऊ संभागीय आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक एस. किरण और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया। SIT ने मंदिर परिसर में दान और भेंट से जुड़ी प्रक्रिया की बारीकी से जांच की। जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं। इसी रिपोर्ट के आधार पर अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने का फैसला लिया।



    पहले से चल रहा था विवाद

    राम मंदिर ट्रस्ट का यह मामला नया नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों से इस मुद्दे पर लगातार सवाल उठ रहे थे। मंदिर में रोजाना भारी मात्रा में दान आता है। ट्रस्ट के गठन के बाद से अब तक करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए नकद दान मिल चुका है। इसके अलावा सोना, चांदी और अन्य कीमती चीजें भी भारी मात्रा में दान की जाती हैं। आरोप है कि इन चीजों के रिकॉर्ड रखने में बड़ी लापरवाही हुई। खासतौर पर साल 2025 में महाकुंभ के दौरान गड़बड़ी की आशंका जताई गई है। उस दौरान मंदिर में रोजाना लाखों श्रद्धालु पहुंचे थे और दानपात्र कुछ ही घंटों में भर जाते थे।



    ट्रस्ट के अधिकारियों से हुई पूछताछ

    मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों और मंदिर के कर्मचारियों से भी पूछताछ की। बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान कई अधिकारी यह साफ तौर पर नहीं बता पाए कि कीमती सामान का रिकॉर्ड कैसे रखा जाता है। इससे जांच एजेंसियों का शक और गहरा हो गया। SIT ने एहतियात के तौर पर ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों को शहर छोड़ने से भी मना किया था। इस फैसले से साफ है कि जांच एजेंसियां इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रही हैं।



    सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

    यह विवाद सिर्फ राज्य स्तर तक सीमित नहीं रहा। मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका दाखिल की गई है। याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट की निगरानी में इस मामले की जांच कराई जाए। इसमें यह भी कहा गया है कि जांच के लिए सीबीआई (Central Bureau Of Investigation) जैसी केंद्रीय एजेंसी को शामिल किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने दान रजिस्टर, ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और बैंक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की भी मांग की है। उनका कहना है कि बिना एफआईआर दर्ज किए चल रही जांच की कानूनी अहमियत कम हो सकती है।



    पहले भी मिली थी चेतावनी

    इस पूरे मामले में एक पुरानी रिपोर्ट भी सामने आई है। साल 2020 में ट्रस्ट के गठन के कुछ महीनों बाद ही एक निजी ऑडिट फर्म ने वित्तीय रिकॉर्ड को लेकर चिंता जताई थी। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि लेनदेन और डेटा प्रबंधन में स्पष्ट प्रक्रिया का अभाव है। फर्म ने बैंक रिकॉर्ड मिलान, स्टाफ की ट्रेनिंग और आईटी सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए थे। यह रिपोर्ट नवंबर 2020 में सौंपी गई थी, लेकिन उस वक्त इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। अब जब मामला सामने आया है, तो यह पुरानी चेतावनी फिर से अहम हो गई है।



    आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

    अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे जांच में क्या नतीजे सामने आते हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित चोरी की रकम और सामान कहां गया। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इसमें और कौन लोग शामिल हो सकते हैं। मामले से जुड़े सभी आठ नामजद आरोपियों से पूछताछ की तैयारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



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