राम मंदिर चंदा विवाद, SIT ने शासन को सौंपी रिपोर्ट, जांच के घेरे में 5 दर्जन लोग
समझें क्या है पूरा मामला...
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच के लिए बनी SIT ने अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंप दी है। जानकारी के अनुसार रिपोर्ट 140 पन्नों की है।
इस रिपोर्ट में कई सेवादारों और अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। SIT ने दोषियों पर FIR दर्ज कराने की संस्तुति की है। अब सरकार के अगले कदम पर सबकी नजर टिकी है।
रामलला के खजाने पर डाका
6 जून 2026 की बात है। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से एक खबर निकली। खबर थी कि दानपात्रों से करोड़ों रुपए की चोरी हुई है। मामला सामने आते ही लखनऊ से दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया।
मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने पहला आरोप लगाया था। उनका कहना था कि मंदिर के दानपात्रों से करीब 7 करोड़ रुपए की चोरी हुई है। यह कोई एक बार की घटना नहीं थी।
महिपाल सिंह ने कहा कि इसकी जानकारी उन्होंने ट्रस्ट के बड़े अधिकारियों को दी थी। शिकायत करने के अगले ही दिन उन्हें पद से हटा दिया गया। आरोप यह भी था कि करीब आठ महीने की CCTV फुटेज भी गायब कर दी गई।
SIT का गठन और छह दिन की तफ्तीश
वहीं विपक्षी दलों ने इस मामले को जोर-शोर से उठाया। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी ने 200 करोड़ से ज्यादा की चोरी का आरोप लगाया था।
मामला बढ़ता देख खुद ट्रस्ट ने जांच की मांग की। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जून को तीन सदस्यीय SIT बनाई।
SIT में तीन बड़े अधिकारी शामिल किए गए। पहले थे लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत। दूसरे थे लखनऊ रेंज के IG किरण एस। तीसरे थे वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन। 15 जून को यह टीम अयोध्या पहुंची और लगातार छह दिन तक जांच की।
टिन्नू नेटवर्क की पोल खुली
SIT की जांच में एक नाम बार-बार सामने आया और वह था टिन्नू। पूरा नाम रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू। यह व्यक्ति ट्रस्ट के बड़े अधिकारियों का करीबी बताया जाता है।
जांच में सामने आया कि मंदिर में चढ़ावे की गिनती का काम SBI (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) को दिया गया था। बैंक ने यह काम एक आउटसोर्सिंग कंपनी को दिया।
वहीं इस कंपनी में काम पर वही लोग रखे गए जिन्हें ट्रस्ट ने तय किया था। ये लोग ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों के रिश्तेदार या जान-पहचान के थे।
टिन्नू ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए 35 से 40 अपने लोगों को इस काम में लगवाया। यही नहीं CCTV निगरानी को पुलिस कंट्रोल रूम से अलग करने में भी इन्हीं लोगों की भूमिका बताई जा रही है।
140 पन्नों में दर्ज है सच
SIT ने छह दिन की जांच के बाद 140 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की है। सूत्रों के मुताबिक इस रिपोर्ट में चढ़ावे की रकम में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की पुष्टि की गई है। सुरक्षा तंत्र में गंभीर चूक का भी जिक्र किया गया है।
रिपोर्ट में एक अहम बात और है। ट्रस्ट का सदस्य न होने के बावजूद गोपाल राव जैसे लोग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। वहीं असली ट्रस्टियों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई।
जानकारी के अनुसार ट्रस्ट के सचिव से बंद कमरे में करीब तीन घंटे तक पूछताछ हुई। गणना कार्य में लगे नौ संदिग्ध कर्मचारियों में से दो की भूमिका सबसे संदिग्ध पाई गई है।
अब ACS गृह के पास है रिपोर्ट
SIT ने अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के ACS गृह संजय प्रसाद को सौंप दी है। पहले यह रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री को दिए जाने की बात थी। रविवार शाम जांच टीम मुख्यमंत्री आवास पहुंची भी थी, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी।
अब शासन स्तर पर दोषियों पर नामजद FIR दर्ज कराने की तैयारी तेज हो गई है।
इस मामले में अब तक लगभग दो करोड़ रुपए की रिकवरी हो चुकी है। लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और टिन्नू जैसे लोगों की निशानदेही पर यह राशि बरामद की गई है। एक कर्मचारी के घर से 10 लाख रुपए नकद भी मिले थे। 13 जून को टिन्नू के घर से सोना भी बरामद हुआ था।
सेवादार जाएंगे, ट्रस्ट बदलेगा?
SIT की रिपोर्ट के बाद अब कई बड़े फैसलों की उम्मीद है। दान राशि गिनने में लगे 35 से 40 कर्मचारियों को पहले ही हटाया जा चुका है। अब और सेवादारों की सेवाएं समाप्त किए जाने की संभावना है।
सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में बड़े सुधारों की जरूरत भी बताई गई है।
राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने इस मामले को गंभीर बताया है। नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि मंदिर का पूरा प्रबंधन बदलने की जरूरत है।
कुछ लोग यह भी मांग कर रहे हैं कि मंदिर प्रशासन को अधिक पेशेवर बनाया जाए। एक CEOकी नियुक्ति हो। इससे श्रद्धालुओं का हर दान पारदर्शी तरीके से इस्तेमाल हो सके।
चंपत राय की भूमिका पर सवाल
वहीं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में हैं। हालांकि सूत्रों के मुताबिक SIT की रिपोर्ट में उनकी कोई प्रत्यक्ष संलिप्तता नहीं पाई गई है। लेकिन उन्हें क्लीन चिट भी नहीं मिली है।
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