राम मंदिर चंदा विवाद: नृपेंद्र मिश्रा बोले, अयोध्या में भी हो तिरुपति जैसी पारदर्शिता

Pawan Modiya | Jun 28, 2026, 19:41 IST
अयोध्या में तिरूपति मॉडल
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों के बाद मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने तिरुपति मॉडल अपनाने का सुझाव दिया है। जानिए तिरुपति में दान-चढ़ावे की गिनती और निगरानी कैसे होती है और राम मंदिर में क्या बदलाव हो सकते हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा गबन के आरोप लगे हैं।
  • इस मामले में एफआईआर हुई है और आठ लोग गिरफ्तार हुए हैं।
  • मंदिर निर्माण समिति अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने सुझाव दिए हैं।
  • उन्होंने तिरुपति जैसा मॉडल अपनाने की बात कही है।
  • तिरुपति में दान की गिनती बेहद कड़े नियमों से होती है।

अयोध्या के राम मंदिर के लिए करोड़ों भक्तों ने श्रद्धा से दान दिया था। उनका विश्वास था कि उनका पैसा भगवान की सेवा में लगेगा। लेकिन हाल ही में चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप सामने आए। इस खबर ने हर राम भक्त को दुखी कर दिया। मामले की जांच चल रही है और एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।



इस पूरे विवाद के बीच एक नई बहस शुरू हो गई है। यह बहस मंदिरों में दान-चढ़ावे की पारदर्शिता को लेकर है। लोग पूछ रहे हैं कि भक्तों का पैसा कैसे सुरक्षित रहे। इसी सवाल के जवाब में तिरुपति मॉडल की चर्चा तेज हो गई है।



मॉडल पर मिश्रा का सुझाव

नृपेंद्र मिश्रा


राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने चढ़ावा चोरी के आरोपों को पीड़ादायक बताया। उनका कहना था कि अगर भक्तों के दान का एक भी पैसा किसी व्यक्ति के पास गया है तो यह भरोसे की हानि है। उन्होंने कहा कि भक्त इससे ठगा हुआ महसूस करेंगे। मिश्रा ने जोर दिया कि मंदिर को मिलने वाला हर पैसा पारदर्शी तरीके से रखा जाना चाहिए। उनका सुझाव था कि हर दिन के दान की गिनती अगले दिन हो जाए। साथ ही यह गिनती लोगों को भी देखने दी जाए। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में सुधार जरूर होगा।



मिश्रा ने यह भी माना कि मंदिर प्रबंधन में सुधार की हमेशा जरूरत रहती है। उन्होंने कहा कि भविष्य के लिए प्रशासन को औपचारिक रूप देना जरूरी है। उनके मुताबिक हर काम के लिए विजिलेंस यानी सतर्कता की एक तय नियमावली होनी चाहिए। मिश्रा ने मंदिर के लिए एक सीईओ यानी मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि यह सीईओ ट्रस्ट के साथ मिलकर काम करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी कानून या उप-नियम में बदलाव की बात नहीं है। बस एक ऐसा सीईओ चाहिए जिसे उत्तर प्रदेश में काम का अनुभव हो।



तिरुपति की चढ़ावा व्यवस्था

मिश्रा ने तिरुपति के मॉडल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या को समझने के लिए उत्तर प्रदेश को जानना जरूरी है। उनके मुताबिक तिरुपति में एक कमिश्नर रैंक का अधिकारी मुख्य प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालता है। यह अधिकारी पांच से सात साल तक अपने पद पर रहता है। इस दौरान वह पूरी दान व्यवस्था को संभालता है।



तिरुपति बालाजी मंदिर में रोजाना हजारों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। यहां श्रद्धालु बड़े दान पात्रों में अपनी श्रद्धा अनुसार चढ़ावा डालते हैं। इन दान पात्रों को हुंडी कहा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार आम दिनों में भी रोज छह से बारह बड़ी हुंडियां पूरी तरह भर जाती हैं। इनमें नोट, सिक्के और गहने सब शामिल होते हैं। इन हुंडियों को सख्त सुरक्षा में एक खास इमारत में ले जाया जाता है। इस इमारत को परकामणि भवन कहा जाता है। यहीं पर इस पूरे चढ़ावे की गिनती होती है।



तिरुमला तिरुपति देवस्थानम यानी TTD (Tirumala Tirupati Devasthanams) एक संगठित प्रशासनिक ढांचे में काम करता है। यहां मंदिर की देखभाल और दान प्रबंधन के लिए तय प्रक्रियाएं हैं। श्रद्धालु सेवाएं और वित्तीय निगरानी भी इसी ढांचे का हिस्सा हैं। यह व्यवस्था नियमित चेक एंड बैलेंस पर आधारित मानी जाती है।



राम मंदिर में तिरूपति मॉडल


गिनती के सख्त नियम

तिरुपति मॉडल की सबसे ज्यादा चर्चा उसकी वित्तीय निगरानी प्रणाली को लेकर होती है। परकामणि भवन में चंदा गिनने वाले कर्मचारियों के लिए बेहद कड़े नियम हैं। इन कर्मचारियों को सिर्फ पारंपरिक धोती पहनने की अनुमति होती है। इसके अलावा कोई अतिरिक्त कपड़ा या जेब वाली शर्ट पहनना मना है। निजी सामान ले जाने की भी सख्त मनाही है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कोई भी पैसा छिपा न सके।



यहां सुरक्षा का स्तर बहुत ऊंचा है। सिक्के गिनने वाले स्वयंसेवकों को भी हर बार गहन जांच से गुजरना पड़ता है। यह जांच प्रवेश और निकासी दोनों समय होती है। इस पूरे काम की कमान टीटीडी की विशेष विजिलेंस और सिक्योरिटी विंग संभालती है। इस विंग का मुखिया खुद एक आईपीएस यानी IPS (Indian Police Service) रैंक का अधिकारी होता है। यह विंग आंध्र प्रदेश पुलिस के साथ मिलकर काम करती है।



टीटीडी ने तकनीक का भी जोरदार इस्तेमाल किया है। परकामणि भवन में हाई-रिजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। ये कैमरे एआई यानी AI (Artificial Intelligence) पावर्ड सर्विलांस सिस्टम से जुड़े हैं। यह तकनीक हर कर्मचारी की हरकत पर नजर रखती है। कोई भी संदिग्ध गतिविधि तुरंत पकड़ में आ जाती है।



गिनती के लिए मंदिर अपने स्थायी कर्मचारियों का ही इस्तेमाल करता है। यहां किसी आउटसोर्स या कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी को पैसों के काम में नहीं लगाया जाता। पुलिस के बड़े अधिकारी भी हर समय ड्यूटी पर मौजूद रहते हैं। गिनती के दौरान नकदी, सिक्के और गहने अलग-अलग बांट दिए जाते हैं। नोटों के बंडल बनाकर जांच होती है। सिक्कों की गिनती के लिए आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल होता है। सोने-चांदी के गहनों की हर महीने वैल्यूएशन होती है। इसके बाद इन्हें टीटीडी के मुख्य खजाने में भेज दिया जाता है।



क्यों कहा जाता है पारदर्शी मॉडल

इंसानी निगरानी, सख्त नियम और एडवांस तकनीक का यह मेल तिरुपति को खास बनाता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ अक्सर इसी मॉडल को अपनाने की सलाह देते हैं। यह व्यवस्था करोड़ों के चढ़ावे को सुरक्षित रखती है। साथ ही भक्तों का भरोसा भी बना रहता है।



टीटीडी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कुल दान और आय का ब्योरा देता है। इसमें वेतन, धार्मिक गतिविधियां और निर्माण कार्यों का खर्च भी शामिल होता है। हालांकि हर भक्त के व्यक्तिगत दान का अलग रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया जाता। यानी संस्था समग्र जानकारी देती है, हर लेन-देन की नहीं।



टीटीडी पर भी सवाल उठे हैं

टीटीडी को भी पूरी तरह विवादों से परे नहीं माना जा सकता। समय-समय पर हुंडी गिनती और खरीद प्रक्रियाओं पर सवाल उठे हैं। साल 2020 में आंध्र प्रदेश सरकार ने टीटीडी के खातों का सीएजी यानी CAG (Comptroller and Auditor General) से ऑडिट कराने का फैसला लिया था। फिर भी इसकी नियमित ऑडिट व्यवस्था इसे अन्य संस्थाओं से ज्यादा जवाबदेह बनाती है।



अब सवाल यह है कि क्या राम मंदिर ट्रस्ट भी ऐसा मॉडल अपना सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ बुनियादी कदम भरोसा बढ़ा सकते हैं। इनमें नियमित वार्षिक रिपोर्ट और स्वतंत्र ऑडिट शामिल हैं। दान-खर्च की श्रेणीवार जानकारी भी जरूरी है। डिजिटल अकाउंटिंग सिस्टम और समय-समय पर पारदर्शिता रिपोर्ट भी मदद कर सकती हैं। राम मंदिर के चढ़ावा विवाद के बाद ऐसे कदमों की जरूरत और बढ़ गई है।



जरूरी FAQ

तिरुपति मॉडल क्या है?



तिरुपति मॉडल तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की दान-चढ़ावा प्रबंधन व्यवस्था है। इसमें दान की गिनती, रिकॉर्डिंग और निगरानी के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। यहां गिनती करने वाले कर्मचारियों को सिर्फ धोती पहनने की अनुमति होती है। AI आधारित सीसीटीवी कैमरे भी हर हरकत पर नजर रखते हैं। इसी कारण इसे भारत का सबसे पारदर्शी दान प्रबंधन मॉडल माना जाता है।



नृपेंद्र मिश्रा ने राम मंदिर के लिए क्या सुझाव दिया है?



नृपेंद्र मिश्रा ने सुझाव दिया है कि राम मंदिर प्रबंधन में तिरुपति जैसी पारदर्शी व्यवस्था अपनाई जा सकती है। उनका कहना है कि हर दिन के दान की गिनती अगले दिन हो और लोगों को यह देखने दिया जाए। उन्होंने मंदिर के लिए एक अनुभवी सीईओ की नियुक्ति पर भी जोर दिया है।



राम मंदिर चंदा विवाद में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?



उत्तर: राम मंदिर चढ़ावा गबन के आरोपों के बाद एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच अभी जारी है और दोष सिद्ध होना अभी बाकी है।



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