जुड़वां बहनों की अजब-गजब कहानी: एक की पहचान पत्र बनी,दूसरे में आई परेशानी,मामला पहुंचा दिल्ली
खबरों के मुताबिक, आधार कार्ड बनवाते समय बायोमीट्रिक जांच में दोनों का डेटा एक जैसा पाया गया था। बता दें फिंगरप्रिंट और रेटिना स्कैन में समानता आने की वजह से एप्लिकेशन प्रोसेस रोक दी गई थी। इसकी वजह से बच्ची के स्कूल से जुड़े कामों में परेशानियों का सामना करना पड़ा गया। इसके बाद बच्ची के परिवार वालों ने मामले का समाधान के लिए प्रशासन से मदद मांगी।
जुड़वां बहनों की समानता बनी बड़ी चुनौती
दरअसल, आधार नामांकन में बायोमीट्रिक जानकारी महत्वपूर्ण होती है। इसमें फिंगरप्रिंट और आंखों की रेटिना शामिल होती है। तुबा और खिजरा के मामले में दोनों के बायोमीट्रिक डेटा काफी मिलते-जुलते पाए गए। यही वजह रही कि सिस्टम को अलग पहचान तय करने में परेशानी हुई। इसके बाद मामला तकनीकी जांच का विषय बन गया।
प्रशासन से की शिकायत
खबरों के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर सॉल्यूशन नहीं मिलने के बाद जुबैर इलियास प्रशासन के पास पहुंचे। उन्होंने डीएम (जिलाधिकारी) अजय कुमार द्विवेदी को समस्या बताई थी। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए।
इसके बाद प्रशासन ने बच्चियों के डॉक्यूमेंट्स की जांच कराई। उनकी पहचान का वेरिफिकेशन भी कराया गया था। इसके बाद पूरी रिपोर्ट तैयार करके UIDAI को भेजी गई।
UIDAI मुख्यालय तक पहुंचा मामला
मामले की जांच शुरू होने के बाद अधिकारी ने UIDAI अधिकारियों से संपर्क किया। इसके बाद मामला दिल्ली मुख्यालय भेजा गया है। UIDAI विशेषज्ञों ने पूरे मामले की तकनीकी जांच की। जुड़वां बहनों के बायोमीट्रिक डेटा की समानता को ध्यान में रखा गया है। परिवार की ओर से दिए गए डॉक्यूमेंट्स की भी जांच की गई है। वेरिफिकेशन प्रोसेस पूरी होने के बाद समाधान निकाला गया है। इसके बाद दूसरी बच्ची का आधार नामांकन पूरा हो सका। इस पूरी प्रक्रिया में करीब तीन महीने का समय लग गया था। आखिरकार तुबा और खिजरा दोनों के आधार कार्ड बन गए हैं। परिवार के लिए यह लंबे इंतजार के बाद बड़ी राहत थी।
आधार मिलने के बाद परिवार ने जताई खुशी
जुबैर इलियास दोनों बेटियों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने प्रशासन और अधिकारियों का धन्यवाद किया। उनके लिए आधार कार्ड सिर्फ दस्तावेज नहीं थे। यह उनकी बेटियों की अलग पहचान का प्रमाण बन गए। एक तकनीकी समस्या ने परिवार को लंबे समय तक परेशान किया। लेकिन प्रशासन और UIDAI के प्रयासों से समाधान निकल गया। यह मामला बताता है कि तकनीक के साथ संवेदनशीलता भी जरूरी है। तुबा और खिजरा की कहानी अब एक अलग अनुभव बन गई है। दोनों बहनों को आखिरकार अपनी अलग पहचान मिल चुकी है।
- तुबा और खिजरा की पहचान पत्र में समस्या क्यों आई?
- तुबा और खिजरा जुड़वां बहनें होने के कारण बायोमीट्रिक प्रणाली ने उनके डेटा में समानता पाई, जिसके कारण एक बहन का पहचान पत्र आसानी से बना जबकि दूसरी बहन का आवेदन प्रक्रिया में रुक गया।
- इस समस्या का समाधान कैसे निकाला गया?
परिवार ने स्थानीय प्रशासन से मदद मांगी, जिसके बाद जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए UIDAI मुख्यालय से संपर्क किया। तकनीकी विशेषज्ञों ने रिकॉर्ड की जांच की और अंततः दोनों बहनों के लिए अलग पहचान पत्र जारी किया। - पहचान पत्र मिलने के बाद जुबैर इलियास का क्या प्रतिक्रिया थी?
पहचान पत्र मिलने के बाद जुबैर इलियास ने प्रशासन का धन्यवाद किया और बताया कि यह पहचान पत्र उनके लिए केवल दस्तावेज नहीं बल्कि लंबे इंतजार का प्रमाण था।