ICU में परिंदा पर न मार सके, वहां चूहे ने ले ली महिला की जान

Anjali Dwivedi | Mar 17, 2026, 16:53 IST
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ठाणे के सरकारी अस्पताल के ICU में वेंटिलेटर पर भर्ती 89 वर्षीय महिला को चूहे ने कुतर लिया। ज्यादा खून बहने से उनकी मौत हो गई। लापरवाही के आरोप में प्रशासन ने दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है।

महाराष्ट्र के ठाणे के भाईंदर पश्चिम स्थित भारतरत्न पंडित भीमसेन जोशी अस्पताल में एक पीड़ादायक घटना सामने आई है। जहां वेंटिलेटर पर जीवन की जंग लड़ रही एक 89 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत का कारण बीमारी नहीं, बल्कि एक चूहा बना।



परिजनों का आरोप है कि ICU जैसे सुरक्षित क्षेत्र में चूहे ने बुजुर्ग महिला को बुरी तरह कुतर दिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।



12 मार्च को महिला हुई थी भर्ती

89 वर्षीय सुहासिनी माठेकर को 12 मार्च को गंभीर हालत में इस सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें चौथी मंजिल पर स्थित आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा था। जहां डॉक्टरों और नर्सों की 24 घंटे निगरानी की जरूरत होती है, वहां मौत चूहे की शक्ल में मंडरा रही थी।



आधी रात का वो खौफनाक मंजर

परिजनों के मुताबिक, रविवार आधी रात के करीब एक चूहा आईसीयू में घुस आया और वेंटिलेटर पर बेसुध पड़ी सुहासिनी जी के दाहिने हाथ को कुतरना शुरू कर दिया। सोमवार 16 मार्च सुबह करीब 6 बजे जब परिवार वाले उनसे मिलने पहुंचे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।



महिला के हाथ पर गहरा जख्म था और काफी खून बह चुका था। ज्यादा खून बहने और शॉक के कारण सोमवार दोपहर तक उनकी मृत्यु हो गई।



लापरवाही पर पर्दा डालने की कोशिश?

इस घटना ने अस्पताल प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। परिजनों का सीधा सवाल है कि रात में ड्यूटी पर मौजूद मेडिकल स्टाफ को इस बात की भनक क्यों नहीं लगी? मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर जफर तड़वी ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।



साथ ही प्रशासन का तर्क है कि अस्पताल के पीछे चल रहे निर्माण कार्य की वजह से चूहों का प्रकोप बढ़ गया है। हालांकि, आईसीयू जैसे स्टरलाइज्ड जोन में चूहे का पहुंचना सुरक्षा में बड़ी चूक है।



दो कर्मचारी सस्पेंड, जांच जारी

हंगामे और बढ़ते दबाव के बाद (इलाज में लापरवाही) अस्पताल प्रबंधन ने इस मामले में दोषी मानते हुए दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। पीड़ित परिवार ने अब जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने पूरे महाराष्ट्र में सरकारी अस्पतालों की स्वच्छता और मरीजों की जान की कीमत पर एक नई बहस छेड़ दी है।



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