MP के मंदसौर समेत भारत के सात ऐसे अनोखे गांव, जहां विजयादशमी पर होती है रावण की पूजा
Ravan Dahan 2026: हर साल विजयादशमी के दिन चारों तरफ उत्सव का माहौल रहता है। मैदानों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के ऊंचे पुतले बनाए जाते हैं। आतिशबाजी के साथ रावण दहन की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लोग बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाते हैं।
लेकिन भारत की विविध संस्कृति में कुछ स्थान बहुत अलग हैं। हमारे देश में सात ऐसी खास जगहें मौजूद हैं। इन स्थानों पर दशहरे के दिन रावण का पुतला नहीं जलाया जाता है। इसके विपरीत, यहां लंकापति रावण की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है।
कहीं रावण को गांव का बेटा और दामाद माना जाता है। कहीं लोग रावण को अपना पूर्वज और कुल देवता मानते हैं। कई जगहों पर रावण के प्रकांड ज्ञान का सम्मान किया जाता है। लोग उन्हें भगवान शिव का सबसे बड़ा भक्त मानकर पूजते हैं। आइए जानते हैं भारत की इन अनोखी जगहों की पूरी कहानी।
बिसरख गांव: रावण का जन्मस्थान
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में बिसरख गांव स्थित है। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, यह गांव रावण का जन्मस्थान माना जाता है। यह स्थान रावण के पिता ऋषि विश्रवा से भी संबंधित है।
ऋषि विश्रवा के नाम पर ही इस गांव का नाम बिसरख पड़ा। गांव के लोग रावण को अपने गांव का बेटा मानते हैं। इसलिए यहां के लोग रावण का विशेष सम्मान और आदर करते हैं। बिसरख गांव में दशहरे पर रावण का पुतला कभी नहीं जलाया जाता।
दशहरे के दिन गांव में शोक का माहौल रहता है। लोग इस दिन रामलीला का आयोजन भी बिल्कुल नहीं करते हैं। गांव में रावण का एक बहुत बड़ा और भव्य मंदिर है। यहां विजयादशमी पर लोग रावण की प्रतिमा की पूजा करते हैं।
मंदसौर: रावण का पौराणिक ससुराल
मध्य प्रदेश का मंदसौर शहर धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, मंदसौर का पुराना नाम दशपुर हुआ करता था। माना जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी इसी शहर की रहने वाली थीं। इस वजह से मंदसौर को रावण का पौराणिक ससुराल माना जाता है।
भारतीय संस्कृति में दामाद को बहुत अधिक सम्मान दिया जाता है। इसी परंपरा के तहत स्थानीय लोग रावण को दामाद मानते हैं। मंदसौर के खानपुरा इलाके में रावण की विशाल प्रतिमा स्थापित है।
विजयादशमी के दिन महिलाएं प्रतिमा के सामने घूंघट निकालकर जाती हैं। लोग रावण के पैरों में लच्छा बांधकर आशीर्वाद मांगते हैं। यहां दशहरे पर पुतला जलाने के बजाय ढोल-नगाड़ों से पूजा होती है।
रावनग्राम: रावण को समर्पित गांव
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में रावनग्राम नाम का गांव है। यह प्रसिद्ध गांव विदिशा शहर से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित है। इस गांव का नाम ही रावण के नाम पर रखा गया है। गांव में रावण की एक विशाल लेटी हुई प्रतिमा स्थापित है।
गांव के लोग किसी भी शुभ काम से पहले पूजा करते हैं। शादी-विवाह या फसल कटाई पर रावण का आशीर्वाद लिया जाता है। विजयादशमी के अवसर पर यहां रावण का दहन नहीं किया जाता।पूरा गांव एक जगह इकट्ठा होकर विशेष पूजा-अर्चना करता है। लोग रावण को गांव का रक्षक और बाबा मानकर पूजते हैं। यहां रावण को सुख-समृद्धि देने वाला देवता माना जाता है।
कानपुर: दशानन मंदिर की परंपरा
उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में प्रसिद्ध दशानन मंदिर स्थित है। यह ऐतिहासिक मंदिर करीब 135 साल से भी अधिक पुराना है। यह मंदिर साल में सिर्फ एक बार दशहरे पर खुलता है।
विजयादशमी के दिन सुबह मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। श्रद्धालु प्रतिमा को दूध से स्नान कराते हैं और फूल चढ़ाते हैं। लोग रावण की आरती उतारते हैं और तेल के दीये जलाते हैं।
शाम को रावण दहन के बाद मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं। बाकी पूरे साल यह मंदिर पूरी तरह से बंद रहता है। मान्यता है कि रावण महान ज्ञानी और पंडित था। लोग रावण से बुद्धि, ज्ञान और शक्ति का वरदान मांगते हैं।
जोधपुर: पूर्वज मानकर होती है पूजा
राजस्थान के जोधपुर शहर में रावण का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। यहां के मुद्गल ब्राह्मण समाज के लोग रावण की पूजा करते हैं। ये लोग रावण को अपना पूर्वज और कुल देवता मानते हैं।
मान्यता है कि रावण के विवाह में उनके पूर्वज शामिल हुए थे। विवाह के बाद कुछ लोग यहीं जोधपुर में ही बस गए थे। वे खुद को रावण का वंशज और संबंधी मानते हैं। दशहरे के दिन ये लोग रावण दहन में शामिल नहीं होते।
वे इस दिन रावण की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करते हैं। मंदिर में स्थापित रावण की मूर्ति की विशेष पूजा की जाती है। लोग अपने पूर्वज का स्मरण कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
काकिनाडा: शिवभक्त के रूप में सम्मान
आंध्र प्रदेश के काकिनाडा में रावण का सुंदर मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर समुद्र तट के बिल्कुल पास में स्थित है। यहां रावण को एक महान और पराक्रमी शासक माना जाता है। इसके साथ ही उन्हें भगवान शिव का परम भक्त माना जाता है।
मंदिर में रावण की एक बहुत बड़ी प्रतिमा स्थापित की गई है। प्रतिमा के पास ही एक विशाल शिवलिंग भी मौजूद है। यहां आने वाले श्रद्धालु शिवलिंग और रावण दोनों की पूजा करते हैं।
स्थानीय लोग रावण की शिवभक्ति का बहुत सम्मान करते हैं। काकिनाडा में रावण को बुराई का प्रतीक बिल्कुल नहीं मानते। विजयादशमी पर यहां रावण की भक्ति और शक्ति की पूजा होती है।
कांगड़ा: भगवान शिव के परम उपासक
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में बैजनाथ धाम स्थित है। यहां का प्रसिद्ध बैजनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मान्यता है कि रावण ने यहीं पर कठोर तपस्या की थी। रावण ने अपने दसों सिर काटकर शिवजी को अर्पित कर दिए थे।
प्रसन्न होकर भगवान शिव ने रावण को अमृत्व का वरदान दिया था। इसलिए स्थानीय लोग रावण को भगवान शिव का सच्चा भक्त मानते हैं। कांगड़ा के बैजनाथ क्षेत्र में रावण का पुतला नहीं जलाया जाता।
लोगों का मानना है कि ऐसा करने से भगवान शिव नाराज हो जाएंगे। दशहरे पर लोग रावण की भक्ति और साधना को याद करते हैं। यहां रावण को एक सिद्ध तपस्वी और महान ज्ञानी माना जाता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQs:
- कौन-कौन सी विशेष जगहें हैं जहां विजयादशमी पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता?
भारत में ऐसी सात विशेष जगहें हैं जहां विजयादशमी पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता। इनमें बिसरख, मंदसौर, रावणग्राम, कानपुर, जोधपुर, काकिनाडा, और कांगड़ा शामिल हैं। - बिसरख गांव की रावण से जुड़ी मान्यताएं क्या हैं?
बिसरख गांव उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में स्थित है, जिसे रावण का जन्मस्थान माना जाता है। यहां के लोग रावण को अपने गांव का बेटा मानते हैं और विजयादशमी पर रावण का पुतला नहीं जलाते, बल्कि उसे विशेष सम्मान दिया जाता है। - काकिनाडा में रावण की पूजा कैसे की जाती है?
आंध्र प्रदेश के काकिनाडा में रावण को एक महान शिव भक्त माना जाता है। विजयादशमी पर यहां रावण की भक्ति और शक्ति की पूजा की जाती है, और श्रद्धालु रावण के साथ-साथ भगवान शिव की भी पूजा करते हैं।