मिडिल ईस्ट तनाव: RBI ने बेचा 1.14 लाख करोड़ का सोना, होर्मुज संकट से महामंदी का खतरा

Jitendra Shrivastava | Jun 02, 2026, 18:00 IST
Photograph: (THESOOTR)
NEW DELHI. RBI ने 1.14 लाख करोड़ रुपए का सोना बेचा। वहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट से वैश्विक महामंदी का खतरा भी बढ़ गया है। रुपया 95.17 के निचले स्तर पर पहुंच गया है।

ऐसे समझें पूरा मामला...

  • RBI ने दो हफ्तों में 1.14 लाख करोड़ का सोना बेचा।
  • होर्मुज बंद रहा तो 2008 जैसी महामंदी का खतरा।
  • रुपया गिरकर 95.17 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर।
  • ब्रेंट क्रूड 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।
  • भारत का 77% सोना अब घरेलू तिजोरियों में सुरक्षित।

एक तरफ मिडिल ईस्ट में जंग की आग, दूसरी तरफ होर्मुज जलमार्ग बंद होने का संकट, इन दोनों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 1.14 लाख करोड़ रुपए का सोना बेच दिया।



साथ ही रैपिडन एनर्जी ग्रुप ने चेतावनी दी है कि अगस्त तक होर्मुज बंद रहा तो 2008 जैसी वैश्विक महामंदी (Great Recession) का खतरा पैदा हो सकता है।



RBI की चौंकाने वाली सोना बिक्री

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI Gold Sale) ने बीते कुछ हफ्तों में एक असाधारण निर्णय लिया। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के वरिष्ठ अर्थशास्त्री अभिषेक गुप्ता की रिपोर्ट ने यह खुलासा किया।



22 मई को खत्म हुए दो हफ्तों के भीतर यह पूरी बिक्री हुई है। केंद्रीय बैंक ने इसी दौरान 7.5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (Foreign Exchange Assets) भी खरीदीं।



बिना किसी सार्वजनिक घोषणा के इतने बड़े पैमाने पर सोना बेचा जाना असामान्य है। RBI की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है।





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मिडिल ईस्ट युद्ध और तेल संकट

मध्य पूर्व यानी पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने की आशंका गहरा गई है। इसने कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर पहुंचा दी हैं।



भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। इस कारण देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) तेजी से खर्च हो रहा है। इस दबाव को थामने के लिए RBI को सोना बेचने पर विवश होना पड़ा।



होर्मुज बंद तो महामंदी का खतरा

रैपिडन एनर्जी ग्रुप ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। एडवाइजरी फर्म के अनुसार, अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अगस्त तक बंद रहा तो 2008 जैसी वैश्विक महामंदी (Great Recession) का जोखिम पैदा हो जाएगा।



फर्म का अनुमान है कि यह जलडमरूमध्य जुलाई में खुल सकता है। यदि ऐसा हुआ तो कच्चे तेल की मांग में रोजाना 26 लाख बैरल की कमी आएगी। ब्रेंट क्रूड की कीमत गर्मियों में 130 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। यह आँकड़ा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।



तेल आपूर्ति में भारी कमी का अनुमान

जुलाई के बाद भी होर्मुज में बाधा जारी रही तो संकट और गहरा जाएगा। अगस्त-सितंबर में आपूर्ति की कमी बढ़कर 60 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। रैपिडन के मुताबिक, तीसरी तिमाही में भंडार परिचालन संबंधी चुनौतियों की सीमा तक पहुंच जाएंगे।



अगस्त की शुरुआत में उत्पादन फिर शुरू होने पर भी बाजार तुरंत राहत महसूस नहीं करेंगे। सितंबर तक कच्चे तेल का भंडार घटता रहेगा। अरब खाड़ी का उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ेगा और शिपमेंट अपने गंतव्य तक पहुंचेगी।



रुपए की गिरावट और चालू खाता घाटा

भारत का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) लगातार बढ़ रहा है। इस कारण रुपये पर भारी दबाव बन गया है। मंगलवार को रुपया गिरकर 95.17 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया।



RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ब्याज दरें बढ़ाने जैसे कड़े विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाने की कोशिशें भी जारी हैं। हालिया हस्तक्षेपों की बदौलत रुपए ने अन्य एशियाई मुद्राओं की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है।



अमेरिका-ईरान के बीच गहरा टकराव

अमेरिका और ईरान यूरेनियम भंडार और होर्मुज नियंत्रण पर अपने-अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने वार्ता में कुछ सकारात्मक संकेत मिलने की बात कही है। लेकिन समाधान अभी दूर नजर आता है।



राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेताया है कि सही जवाब न मिले तो सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हो सकती है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जवाबी कार्रवाई का संकेत दिया है। फरवरी से अब तक तेल की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं।



लिक्विडिटी को मिली प्राथमिकता

केंद्रीय बैंक इस समय सोने की जगह अधिक तरल परिसंपत्तियों को प्राथमिकता दे रहा है। अमेरिकी डॉलर जैसी मुद्राएं बाजार में तत्काल उपयोग की जा सकती हैं। सोना मूल्यवान है, लेकिन इसे तुरंत बाजार में लगाना आसान नहीं।



RBI ने इसीलिए सोने को डॉलर में परिवर्तित किया ताकि बाजार में तरलता (Liquidity) बनी रहे। सरकार ने कीमती धातुओं पर आयात शुल्क भी बढ़ाया, फिर भी सोने के भंडार की कीमत में गिरावट दर्ज की गई। यही RBI की सोना बिक्री का सबसे ठोस प्रमाण माना जा रहा है।



घरेलू तिजोरियों में बढ़ा सोना

मार्च के अंत तक RBI के पास 880.52 मीट्रिक टन सोना था। इसमें से 77 प्रतिशत घरेलू तिजोरियों में सुरक्षित था। छह महीने पहले यह अनुपात केवल 66 प्रतिशत था। बाकी हिस्सा बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के पास रखा है।



यह रणनीतिक बदलाव रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद तेज हुआ। पश्चिमी देशों द्वारा रूसी संपत्तियां जब्त किए जाने के बाद कई देशों ने अपना सोना स्वदेश वापस मंगाना शुरू किया।



महामंदी का जोखिम कितना वास्तविक?

रैपिडन के विश्लेषकों ने माना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक ढांचा 1970 के दशक या 2007-08 की स्थिति जितना चरम नहीं है। कम तेल-निर्भर अर्थव्यवस्थाएं और बेहतर मौद्रिक नीतियां (Monetary Policy) कुछ राहत देती हैं, लेकिन विश्लेषकों ने साफ चेताया है कि तेल की बढ़ती कीमतें वित्तीय और समष्टि आर्थिक (Macroeconomic) कमजोरियों को और गहरा कर सकती हैं।



महंगाई बढ़ेगी, विकास दर घटेगी और वैश्विक माँग को गहरी ठेस पहुंचेगी। संकट के स्थायी समाधान तक दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं इस दबाव को झेलती रहेंगी।



भारत का स्वर्ण भंडार और शेयर बाजार

सोना बेचने के बाद भी भारत का स्वर्ण भंडार (Gold Reserve) मजबूत बना हुआ है। अनुमानतः 83 मीट्रिक टन सोना बेचा गया और देश के पास लगभग 797 मीट्रिक टन का भंडार बचेगा। RBI की यह रणनीति भू-राजनीतिक जोखिम (Geopolitical Risk) से देश को सुरक्षित रखने के लिए बनाई गई है।



इसी बीच भारतीय शेयर बाजार वैश्विक रैंकिंग में खिसककर 7वें स्थान पर आ गया है। दक्षिण कोरिया के बाजार में 86 प्रतिशत उछाल और ताइवान के आगे निकलने ने यह स्थिति पैदा की है। RBI की नीतियां इस चुनौती से निपटने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।



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