अब दस हजार रुपए भेजते ही करना होगा एक घंटा इंतजार, RBI ला रहा है नया नियम
भारतीय रिजर्व बैंक UPI और IMPS (Immediate Payment Service) से 10 हजार रुपए से ज्यादा के ट्रांसफर पर 1 घंटे का कूलिंग पीरियड लागू करने पर विचार कर रहा है। इस दौरान पैसा अकाउंट में तुरंत नहीं पहुंचेगा।
वहीं अब से 70 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए 50 हजार रुपए से ज्यादा ट्रांसफर पर किसी भरोसेमंद व्यक्ति की मंजूरी जरूरी होगी। RBI ने 8 मई 2026 तक इस प्रस्ताव पर सुझाव मांगे हैं।
क्या है कूलिंग पीरियड का मतलब
डिजिटल इंडिया के इस दौर में हम पलक झपकते ही पैसे भेज देते हैं। लेकिन इसी रफ्तार का फायदा ठग भी उठाते हैं। RBI अब इस रफ्तार पर थोड़ा ब्रेक लगाने की तैयारी में है।
नए प्रस्ताव के मुताबिक अगर आप UPI या IMPS के जरिए किसी को 10 हजार रुपए से ज्यादा भेजते हैं तो वह रकम पाने वाले के खाते में तुरंत नहीं पहुंचेगी।
उस ट्रांसफर पर 1 घंटे का कूलिंग पीरियड यानी प्रतीक्षा अवधि लागू होगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि अगर किसी के साथ ठगी हो जाए तो उसे सोचने और ट्रांजेक्शन रोकने का वक्त मिलेगा।
22 हजार करोड़ का नुकसान
इस प्रस्ताव की सबसे बड़ी वजह डिजिटल फ्रॉड से होने वाला भारी नुकसान है। साल 2025 में अकेले भारत में ऑनलाइन धोखाधड़ी से लोगों ने 22 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा गंवाए हैं। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है।
बड़ी बात यह है कि 10 हजार रुपए से बड़े ट्रांजेक्शन संख्या में भले ही कम हों, लेकिन डिजिटल फ्रॉड की कुल रकम का करीब 98.5 फीसदी हिस्सा इसी श्रेणी से आता है।
ठग अक्सर सोशल इंजीनियरिंग यानी डर या लालच दिखाकर पीड़ित से तुरंत पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं। अब एक घंटे की यह देरी उस जाल को तोड़ने का काम करेगी।
बुजुर्गों के लिए अलग सुरक्षा
बुजुर्गों के साथ डिजिटल फ्रॉड के मामले सबसे ज्यादा होते हैं। इसीलिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 70 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए अलग नियम बनाने का प्रस्ताव रखा है।
इसके तहत अगर कोई बुजुर्ग 50 जहार रुपए से ज्यादा ट्रांसफर करता है तो उनके किसी भरोसेमंद व्यक्ति की अनुमति लेनी होगी। यह कदम उन बुजुर्गों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा जो डिजिटल ठगी का आसान शिकार बन जाते हैं।
25 लाख से ज्यादा जमा पर भी नजर
एक और बड़ा प्रस्ताव यह है कि किसी व्यक्तिगत या छोटे बिजनेस खाते में अचानक 25 लाख रुपए से ज्यादा जमा होते हैं तो बैंक पूरी पुष्टि के बाद ही उसे क्रेडिट करेगा। यह मनी लॉन्ड्रिंग और बड़े फ्रॉड को रोकने में मदद करेगा।
किल स्विच: एक बटन, पूरी सुरक्षा
शायद इस पूरे प्रस्ताव का सबसे क्रांतिकारी हिस्सा है किल स्विच। इस सुविधा के तहत कोई भी ग्राहक फ्रॉड (साइबर क्राइम) का संदेह होते ही एक ही बटन दबाकर अपनी UPI, नेट बैंकिंग और डेबिट-क्रेडिट कार्ड जैसी सभी डिजिटल सेवाओं को तुरंत बंद कर सकेगा। इससे ठगी की स्थिति में तुरंत नुकसान रोका जा सकेगा।
8 मई तक दे सकते हैं सुझाव
RBI ने इस पूरे प्रस्ताव को अभी अंतिम रूप नहीं दिया है। 8 मई 2026 तक आम जनता, बैंक और विशेषज्ञ अपने सुझाव दे सकते हैं। इसके बाद अंतिम गाइडलाइंस जारी की जाएंगी।
यह खबर क्यों जरूरी है
भारत में UPI (UPI ट्रांजैक्शन) अब देश की सबसे बड़ी डिजिटल पेमेंट प्रणाली बन चुकी है। करोड़ों लोग रोज इसका इस्तेमाल करते हैं। इसीलिए इसकी सुरक्षा हर नागरिक के लिए जरूरी है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 300A के तहत नागरिक की संपत्ति की सुरक्षा राज्य की जिम्मेदारी है।
RBI का यह प्रस्ताव उसी भावना को आगे बढ़ाता है। 22 हजार करोड़ रुपए का सालाना नुकसान यह बताता है कि, सख्त नियमों की जरूरत कितनी ज्यादा है। यह बदलाव थोड़ी असुविधा जरूर देगा लेकिन लंबे समय में आम आदमी की जमापूंजी को सुरक्षित रखेगा।
FAQ
- क्या अब से छोटे पेमेंट पर भी 1 घंटे का समय लगेगा?
नहीं, यह नियम केवल 10 हजार से ज्यादा के ट्रांसफर पर है। छोटे पेमेंट पहले की तरह पलक झपकते ही पूरे होंगे। रोजमर्रा के खर्चों पर इसका कोई भी असर नहीं पड़ेगा। - किल स्विच फीचर का इस्तेमाल कैसे होगा?
यह फीचर बैंक के मोबाइल ऐप या वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। ठगी का संदेह होने पर इसे तुरंत दबाना होगा। इससे आपके अकाउंट से जुड़ी सभी डिजिटल सेवाएं रुक जाएंगी। आप दोबारा बैंक जाकर ही इन्हें चालू करवा पाएंगे। - RBI के डिजिटल पैमेंट के नियम कब से लागू होंगे?
अभी आरबीआई ने इस पर केवल प्रस्ताव पेश किया है। 8 मई 2026 तक सभी से सुझाव मांगे गए हैं। इन सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम तारीख आएगी। उम्मीद है कि जल्द ही इसे लागू कर दिया जाएगा।
ये खबरें भी पढ़िए...
जेब में नहीं, मोबाइल में होगा पैसा... क्या है RBI का डिजिटल रुपया और यह कैसे करेगा काम?
RBI का बड़ा प्लान: बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी से मोबाइल नंबर की तरह बदल सकेंगे बैंक
ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड पर मिलोगा 25 हजार तक का मुआवजा, RBI ने जारी की नई गाइडलाइन
बैंक लॉकर में रखा सोना गायब हुआ तो बैंक जिम्मेदार, जानें RBI के नियम