प्लास्टिक नोट छापने के लिए RBI ने बदले टेंडर के नियम, कंपनियों के सामने ने रखीं 2 शर्तें
भारतीय रिजर्व बैंक अब 10 और 20 रुपये के छोटे नोटों को कागज के बजाय पॉलीमर पर छाप कर देश में करेंसी का एक नया अध्याय लिखने की तैयारी कर रहा है।
वहीं इस तकनीकी क्रांति के साथ RBI ने एक ऐसा सख्त प्रावधान जोड़ा है, जिसे इतिहास के पन्नों से जोड़कर देखा जाए तो इसे करेंसी सिस्टम का मंगल पांडे फॉर्मूला कहा जा सकता है।
जिस तरह 1857 में मंगल पांडे ने जानवरों की चर्बी वाले कारतूसों के खिलाफ आवाज उठाकर एक ऐतिहासिक संदेश दिया था, ठीक उसी तर्ज पर RBI ने टेंडर में पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि नए पॉलीमर नोट में किसी भी तरह की जानवरों की चर्बी या DNA का इस्तेमाल सख्त मना है।
ब्रिटेन जैसे देशों में पॉलीमर नोटों में एनिमल फैट को लेकर हुए बड़े विवादों से सबक लेते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक ने सुरक्षा के साथ-साथ देश की धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का पूरा ध्यान रखा है।
टेंडर किसने जारी किया
इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए RBI की कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड ने टेंडर जारी किया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस टेंडर के लिए दो विदेशी कंपनियों और एक भारतीय कंपनी ने बोली जमा की है। पॉलीमर नोटों को लेकर इस बार कुछ खास शर्तें भी तय की गई हैं।
ब्रिटेन जैसे देशों में एनिमल फैट को लेकर पहले विवाद हो चुका है। इसी को देखते हुए RBI ने इस बार सख्त प्रावधान जोड़े हैं।
कड़ी शर्तें भी लागू
BRBNMPL ने बोली लगाने वाली कंपनियों के लिए दो बड़ी शर्तें रखी हैं। पहली शर्त यह है कि कंपनियों को हलफनामा देना होगा।
इस हलफनामे में साबित करना होगा कि भारत में उनका कामकाज चीन और पाकिस्तान की गतिविधियों से पूरी तरह अलग है। यह शर्त सुरक्षा को ध्यान में रखकर जोड़ी गई है।
दूसरी शर्त पॉलीमर शीट से जुड़ी है। कंपनियों को यह प्रमाणित करना होगा कि इस्तेमाल होने वाली शीट में किसी भी तरह की जानवरों की चर्बी या DNA मौजूद नहीं होगी।
कितनी शीट की जरूरत
रिपोर्ट्स के अनुसार BRBNMPL को शुरुआत में 68 हजार रीम पॉलीमर सबस्ट्रेट की तुरंत जरूरत है। एक रीम में पॉलीमर फिल्म की 500 शीट्स शामिल होती हैं।
टेंडर में शामिल कंपनियों को अपने सैंपल भी जमा करने होंगे। इन सैंपल्स की टेस्टिंग भारत के अलग-अलग जलवायु क्षेत्रों में की जाएगी।
इससे यह पता चलेगा कि अलग-अलग मौसम में पॉलीमर सबस्ट्रेट कितना टिकाऊ साबित होता है। यह टेस्टिंग योजना के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
टेंडर में कौन-कौन शामिल
इस टेंडर में भारतीय और विदेशी, दोनों तरह की कंपनियां शामिल हैं। भारत की सबसे बड़ी BOPP (Biaxially Oriented Polypropylene) एक्सपोर्टर कंपनी कॉस्मो फर्स्ट ने हिस्सा लिया है।
कॉस्मो फर्स्ट ने ब्रिटेन की कंपनी डी ला रू को अपना टेक्निकल पार्टनर बनाया है। यह कंपनी सिक्योरिटी फीचर्स और पॉलीमर तकनीक उपलब्ध कराएगी।
ऑस्ट्रेलिया की कंपनी सीसीएल सिक्योर ने भी बोली जमा की है। यह कंपनी दुनिया के 40 से ज्यादा केंद्रीय बैंकों को पॉलीमर नोट सोल्यूशन्स देती है।
कंपनी का दावा है कि उसके पॉलीमर सबस्ट्रेट सामान्य नोटों से छह गुना ज्यादा टिकाऊ होते हैं। वियतनाम की कंपनी क्यूएंडटी हाई-टेक पॉलीमर ने भी बोली जमा की है।
इस कंपनी ने दावा किया है कि उसकी तकनीक से कॉटन करेंसी के मुकाबले 78% तक कम लागत आती है। यह दावा टेंडर प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकता है।
पॉलीमर प्लास्टिक नोट में क्या रहेगा खास
पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा मजबूत माने जाते हैं। पानी, नमी और धूल-मिट्टी का इन पर असर कम पड़ता है।
इनकी उम्र सामान्य पेपर नोटों से कई गुना ज्यादा हो सकती है। इससे नोटों को बार-बार छापने की जरूरत कम पड़ेगी।
इन नोटों में विंडो ट्रांसपेरेंसी जैसे आधुनिक सिक्योरिटी फीचर्स भी शामिल हो सकते हैं। इससे नकली नोट बनाना मुश्किल हो सकता है।
पॉलीमर की सतह को साफ रखना भी अपेक्षाकृत आसान होता है। यह आम लोगों के लिए भी सुविधाजनक साबित हो सकता है।
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