रिटायर्ड IAS अफसरों को मिलेगी दोगुनी फीस! IAS जांच के लिए केंद्र सरकार ने बदले नियम
समझें क्या है पूरा मामला...
- केंद्र सरकार ने आईएएस अफसरों की जांच से जुड़े नियम बदल दिए हैं।
- रिटायर्ड आईएएस अफसरों को अब जांच के बदले ज्यादा पैसा मिलेगा।
- हर केस में डेढ़ से दोगुना तक राशि दी जाएगी।
- पैनल में शामिल होने के लिए उम्र 65 साल से कम होनी चाहिए।
- आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाकर 30 सितंबर कर दी गई है।
मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में आईएएस अफसरों की जांच करने वाले रिटायर्ड अधिकारियों के लिए अच्छी खबर है। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने डीओपीटी (Department of Personnel and Training) के पुराने नियमों में बदलाव किया है। अब हर जांच केस में पहले से डेढ़ से दो गुना ज्यादा रकम मिलेगी। साथ ही पैनल में शामिल होने के लिए उम्र सीमा भी तय कर दी गई है।
क्या हुआ है बदलाव
केंद्र सरकार ने 2012 और 2017 के प्रावधानों को रिवाइज किया है। यह प्रावधान आईएएस (Indian Administrative Service) अफसरों की विभागीय जांच से जुड़े हैं। नए नियम के तहत रिटायर्ड आईएएस अफसर ही जांच अधिकारी बन सकते हैं। उनकी उम्र आवेदन के दिन 65 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
यदि वे डीओपीटी के पैनल में चुने जाते हैं तो उनका कार्यकाल तीन साल का रहेगा। इस दौरान वे अलग अलग मामलों की जांच कर सकेंगे। सरकार का मकसद है कि जांच प्रक्रिया जल्दी और साफ तरीके से पूरी हो। पुराने नियमों में यह भत्ता काफी कम था, जिससे अफसर जांच लेने में हिचकते थे।
अब कितनी मिलेगी रकम
नई गाइडलाइन में हर केस के हिसाब से भुगतान तय किया गया है। यदि आरोप पत्र में गवाहों की संख्या 10 से ज्यादा है तो जांच अधिकारी को पेंशन के 90 प्रतिशत के बराबर रकम मिलेगी। गवाहों की संख्या 6 से 10 के बीच होने पर पेंशन का 70 प्रतिशत मिलेगा। यदि गवाह 6 से कम हैं तो पेंशन के 60 प्रतिशत के बराबर राशि दी जाएगी।
इसके अलावा हर केस में 40 हजार रुपए परिवहन भत्ता भी मिलेगा। दैनिक भत्ता उतना ही रहेगा जितना अफसर को रिटायरमेंट से ठीक पहले मिलता था। कॉमन डिसीप्लिनरी मामलों में हर एक्स्ट्रा चार्ज वाले अफसर के लिए जांच अधिकारी को 5000 रुपए अतिरिक्त मानदेय भी मिलेगा।
यह सुविधा रिटायर्ड और सर्विंग दोनों तरह के अफसरों पर लागू होगी। केस पेश करने वाले अधिकारी को हर केस में बेसिक सैलरी के 10 प्रतिशत के बराबर रकम दी जाएगी। यानी हर स्तर पर जांच से जुड़े लोगों को पहले से ज्यादा भुगतान मिलेगा।
कौन कर सकता है आवेदन
पैनल में आवेदन के लिए कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। आवेदन करने वाला अफसर दिमागी और शारीरिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए। यहां दिमागी शब्द से मानसिक स्वास्थ्य का मतलब है। ईमानदारी को सबसे बड़ा क्राइटेरिया बनाया गया है।
पहले आवेदन की अंतिम तारीख 15 सितंबर तय की गई थी। अब इसे बढ़ाकर 30 सितंबर कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक देशभर से 25 से ज्यादा रिटायर्ड अफसरों ने आवेदन किया है। इनमें मध्य प्रदेश के भी 3 से 4 अधिकारी शामिल हैं। तारीख बढ़ने से और अफसरों के आवेदन करने की उम्मीद है।
विवाद की क्या रही वजह
यह पूरा मामला कुछ दिन पहले सुर्खियों में आया था। पैनल से जुड़ा आवेदन मध्य प्रदेश आईएएस एसोसिएशन के ग्रुप में डाला गया था। इसके बाद सीनियर रिटायर्ड अधिकारियों के बीच बहस शुरू हो गई थी। बहस इस बात पर थी कि विभागीय जांच लेनी चाहिए या नहीं।
कुछ अफसरों का मानना था कि जांच से जुड़ना ठीक नहीं है। वहीं कुछ अफसर इसे अपनी जिम्मेदारी मान रहे थे। बता दें कि ताजा मामला पूर्व आईएएस अरविंद जोशी और टीनू जोशी से जुड़ा है। इसी को लेकर अफसरों के बीच चर्चा काफी तेज हुई थी। इस चर्चा ने ही पूरे मुद्दे को सामने ला दिया।
दफ्तर के खर्च पर भी ध्यान
सरकार ने सिर्फ जांच अधिकारी के भत्ते ही नहीं बढ़ाए हैं। कार्यालय सहायता के लिए भी राशि तय कर दी गई है। अगर किसी केस में 10 से ज्यादा गवाह हैं तो 40 हजार रुपए मिलेंगे। छह से 10 गवाह होने पर 30 हजार रुपए दिए जाएंगे। गवाहों की संख्या 6 से कम होने पर 20 हजार रुपए मिलेंगे। यह पैसा दफ्तर के रोजमर्रा के काम में मदद के लिए है। इससे जांच से जुड़ा कागजी काम भी आसान होगा।
10 साल में कितने मामले
यह पहला मौका नहीं है जब आईएएस अफसरों की जांच चर्चा में आई हो। पिछले 10 साल में अखिल भारतीय सेवा के 10 से ज्यादा अफसर जांच के दायरे में आ चुके हैं। इससे साफ है कि प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। नई गाइडलाइन से जांच प्रक्रिया और तेज होने की उम्मीद है। ज्यादा भत्ता मिलने से अनुभवी रिटायर्ड अफसर भी जांच के लिए आगे आएंगे। इससे लंबित मामलों के जल्दी निपटने की संभावना भी बढ़ेगी।
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