भारत में कर्मचारियों को भविष्य का डर, आधी आबादी के पास इमरजेंसी फंड तक नहीं
समझें क्या है पूरा मामला...
- भारत में 10में से 7नौकरीपेशा लोगरिटायरमेंट को लेकरबेहद चिंतितहैं।
- हर दूसराकर्मचारी नौकरी छूटने के लिए मानसिक रूपसे तैयार नहीं है।
- निवेश बढ़ा है लेकिनबचत और आर्थिक सुरक्षा अब भी कमजोर बनी हुई है।
- बुजुर्ग माता पिता की जिम्मेदारी भी तेजी से बढ़ती जा रही है।
शेयर बाजार में बढ़ा भरोसा
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां सामने आई हैं। सर्वे में शामिल करीब चार हजार 532 नौकरीपेशा लोगों में से बड़ी संख्या ने माना कि, वे अपने भविष्य को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। यह चिंता खासतौर पर रिटायरमेंट के बाद के जीवन और बच्चों की पढ़ाई को लेकर सबसे ज्यादा देखी गई।
निवेश बढ़ने के बावजूद बचत की आदत में सुधार नहीं आया है। कई कर्मचारी बाजार में पैसा लगा तो रहे हैं, लेकिन उसे सही दिशा और अनुशासन के साथ नहीं संभाल पा रहे। यही वजह है कि आर्थिक सुरक्षा का स्तर कमजोर बना हुआ है।
रिपोर्ट की 5 बड़ी बातें
- सर्वे में पांच अहम बिंदु सामने आए हैं, जो कर्मचारियों की असली स्थिति बताते हैं।
- पहला, करीब 70% कर्मचारी रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए तैयार नहीं पाए गए।
- दूसरा, लगभग 30% कर्मचारियों को इमरजेंसी फंड की सही जानकारी ही नहीं है।
- तीसरा, करीब 55% कर्मचारी पेंशन से जुड़े निवेश विकल्पों को लेकर उलझन में हैं।
- चौथा, लगभग 45% कर्मचारियों को अपने हेल्थ इंश्योरेंस कवर पर पूरा भरोसा नहीं है।
- पांचवां, करीब 13% कर्मचारियों के पास अब भी कोई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं है।
निवेश तो बढ़ा, तैयारी नहीं
सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि 63% कर्मचारी कम से कम एक निवेश विकल्प, जैसे शेयर या म्यूचुअल फंड, के बारे में जानकारी रखते हैं।
वहीं इनमें से सिर्फ 9.5% ही परिवार की पूरी आर्थिक जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हैं। करीब 90% कर्मचारी बाजार आधारित निवेश से जुड़ने को इच्छुक जरूर हैं, लेकिन इनमें से 36% को रिटायरमेंट प्लानिंग की बुनियादी जानकारी तक नहीं है।
निवेश की तैयारी दर्शाने वाला इंडेक्स भी गिरावट दिखा रहा है। सर्वे के मुताबिक 58% कर्मचारियों ने शेयर बाजार में पैसा लगाया है, लेकिन इनमें से 37% को जोखिम की सही समझ नहीं है। करीब आधे कर्मचारियों को क्रिप्टोकरेंसी जैसे नए निवेश विकल्पों की जानकारी भी नहीं है।
बुजुर्ग माता पिता की बढ़ती जिम्मेदारी
सर्वे में एक और अहम पहलू सामने आया है। बुजुर्ग माता पिता की देखभाल की जिम्मेदारी अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। कई कर्मचारी अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा इस जिम्मेदारी में खर्च कर रहे हैं, जिससे उनकी खुद की बचत और भविष्य की योजना प्रभावित हो रही है।
आर्थिक सुरक्षा के लिए सलाह
सर्वे टीम ने कर्मचारियों को कुछ जरूरी सुझाव भी दिए हैं। सबसे पहले, कम से कम 6 महीने के खर्च जितना इमरजेंसी फंड बनाकर रखें।
हेल्थ इंश्योरेंस के साथ टॉप अप स्कीम भी जरूर लें। क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन जैसे कर्ज पर नियंत्रण रखें। नियमित रूप से एसआईपी जैसे अनुशासित निवेश साधनों का इस्तेमाल करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ निवेश बढ़ाना काफी नहीं है। सही जानकारी और अनुशासन के बिना आर्थिक सुरक्षा अधूरी रहती है। कर्मचारियों को अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग जल्द शुरू करने और नियमित रूप से समीक्षा करने की सलाह दी गई है।
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