संजय सिंह का दावा, राघव चड्ढा समेत सातों बागी सांसदों की सदस्यता जानी तय
देश की राजनीति में इस समय आम आदमी पार्टी चर्चा में है। पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है। इस बगावत के बाद सांसद संजय सिंह ने मोर्चा संभाल लिया है।
संजय सिंह ने इन सांसदों की सदस्यता को लेकर बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि इन सभी बागियों की राज्यसभा सदस्यता रद्द हो जाएगी। उन्होंने इसके लिए संवैधानिक प्रावधानों और कानूनी आधारों का हवाला दिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने अब बागी सांसदों के खिलाफ निर्णायक कानूनी लड़ाई छेड़ दी है।
सभापति को लेटर और अयोग्यता की मांग
संजय सिंह ने राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन को एक लेटर लिखा है। उन्होंने राघव चड्ढा समेत सभी सात सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। इन सांसदों ने हाल ही में भाजपा में विलय की घोषणा की थी।
संजय सिंह के मुताबिक, यह कदम सीधे तौर पर दल-बदल का मामला बनता है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि बागी सांसदों को किसी भी हाल में रियायत नहीं मिलेगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह अर्जी रविवार को दाखिल की गई है।
कानूनी एक्सपर्ट्स का क्या कहना है
संजय सिंह ने इस मामले में देश के दिग्गज कानूनी एक्सपर्ट्स से सलाह ली है। उन्होंने सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और लोकसभा के पूर्व महासचिवों से बात की है। सभी संविधान एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन सांसदों की सदस्यता जानी तय है।
संजय सिंह ने अपनी याचिका में संविधान की 10वीं अनुसूची का उल्लेख किया है। दलबदल विरोधी कानून के तहत इन सांसदों का कदम पूरी तरह अवैध बताया गया है। उन्होंने कहा कि कानून के प्रावधान इन बागियों के खिलाफ स्पष्ट हैं।
10वीं अनुसूची क्या कहती है
भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची में दल-बदल विरोधी कानून 1985 के 52वें संसोधन में जोड़ा गया था। इसका मकसद निर्वाचित सदस्यों द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए दल बदलने की प्रवृत्ति को रोकना है। यह कानून दलबदल के आधार पर अयोग्यता के नियमों को परिभाषित करता है।
दो-तिहाई बहुमत और दल-बदल विरोधी कानून
आप सांसद संजय सिंह ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु पर भी रोशनी डाली है। उनका दावा है कि राज्यसभा में किसी भी तरह का अलग गुट मान्य नहीं होता। भले ही उस गुट में दो-तिहाई सदस्य ही शामिल क्यों न हों।
कानून के मुताबिक, सदन के भीतर अलग पहचान बनाना अयोग्यता का आधार बनता है। उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों के आधार पर सिद्ध करने की बात कही। संजय सिंह ने कहा कि यह विलय पूरी तरह असंवैधानिक और गैरकानूनी है।
पंजाब की जनता के साथ विश्वासघात
बगावत करने वाले सात सांसदों में से छह सांसद पंजाब से ताल्लुक रखते हैं। संजय सिंह ने इसे पंजाब की जनता के साथ बड़ा धोखा करार दिया है। उन्होंने कहा कि जनता ने इन्हें आप के चुनाव चिन्ह पर चुना था।
पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाना लोकतंत्र की भावनाओं के खिलाफ कार्य है। यह कदम भारत के संविधान के साथ एक बड़ा विश्वासघात माना जाएगा। संजय सिंह ने इस मामले में उपराष्ट्रपति से जल्द सुनवाई का अनुरोध किया है।
क्या होगा बागी सांसदों का भविष्य?
अब सबकी नजरें राज्यसभा के सभापति और सदन की कार्यवाही पर टिकी हुई हैं। संजय सिंह का दावा है कि कानूनी लड़ाई बहुत ही मजबूत होने वाली है। उन्होंने साफ किया कि बागी सांसदों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं है।
अगर सभापति उनकी मांग स्वीकार करते हैं, तो इन सांसदों की कुर्सी जाएगी। यह घटनाक्रम आने वाले समय में देश की राजनीति की नई दिशा तय करेगा। फिलहाल, आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है।
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