CJP के सौरव दास ने बार काउंसिल से पूछा हिसाब, सालभर में 14 करोड़ कैसे खर्च हुए.?
समझें क्या है पूरा मामला
- सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास ने बीसीआई पर सवाल उठाए।
- उन्होंने दावा किया कि बीसीआई ने एक साल में 14 करोड़ रुपए खर्च किए।
- यह खर्च मीटिंग-कॉन्फ्रेंस और यात्रा पर बताया गया।
- दास की यह पोस्ट नालसार आदेश वापसी वाले दिन आई।
- भारत के राजपत्र में प्रकाशित ऑडिट रिपोर्ट से दास का दावा सही साबित हुआ।
सौरव दास ने एक पोस्ट से बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को घेर लिया। उन्होंने बीसीआई के खर्च पर सीधा सवाल उठाया। सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक दास ने लिखा कि बीसीआई ने एक साल में 14 करोड़ रुपए खर्च किए। यह खर्च मीटिंग और कॉन्फ्रेंस पर हुआ। उनका सवाल था कि यह पैसा कहां और कैसे खर्च हुआ।
दास ने एक और आंकड़ा भी दिया। इसमें से 12 करोड़ रुपए यात्रा और ठहरने पर गए। उनकी यह पोस्ट उसी दिन आई। उसी दिन बीसीआई ने नालसार छात्रों पर अपना आदेश वापस लिया।
दास का सवाल था कि बीसीआई छात्रों पर सख्त आदेश दे सकती है। तो युवा वकीलों के लिए उसने क्या किया। उन्होंने बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को सीधे निशाने पर लिया। दास ने लिखा कि मिश्रा लंबे समय से इस पद पर हैं। उनके मुताबिक अब जवाबदेही तय होने का समय आ गया है।
अब सवाल है कि दास का यह दावा कितना सही है। भारत के राजपत्र में प्रकाशित बीसीआई की ऑडिट रिपोर्ट में इसका जवाब मिलता है। रिपोर्ट के मुताबिक बीसीआई ने काउंसिल की गतिविधियों और बैठकों पर बड़ा खर्च किया। यह खर्च वित्त वर्ष 2024-25 में 14 करोड़ 22 लाख रुपए से ज्यादा रहा। यानी दास का आंकड़ा आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल खाता है।
क्या था नालसार वाला विवाद
दास की पोस्ट का सीधा संबंध नालसार यूनिवर्सिटी हैदराबाद से भी है। बीसीआई ने 2026 बैच के छात्रों के नामांकन पर अस्थायी रोक लगाई थी। वजह बताई गई कि कुछ छात्रों ने विरोध किया था। यह विरोध सीजेआई (चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया) सूर्यकांत को लेकर था। वजह उनका दीक्षांत समारोह में आना था।
आदेश जारी होते ही वकीलों और छात्रों में नाराजगी फैल गई। कई सीनियर वकीलों ने भी इस फैसले की आलोचना की। आखिरकार बीसीआई ने कुछ ही घंटों में अपना आदेश वापस ले लिया।
दास ने इसी घटनाक्रम को अपनी पोस्ट में जोड़ा। उन्होंने लिखा कि आदेश एक घंटे में वापस लेना कुछ दिखाता है। इससे लगता है कि फैसला जल्दबाजी में हुआ था। उनका कहना था कि यही जल्दबाजी खर्च के मामलों में भी दिखनी चाहिए। यानी खर्च का हिसाब भी उतनी ही तेजी से सार्वजनिक होना चाहिए।
गजट में दर्ज असली आंकड़े
भारत के राजपत्र में बीसीआई की ऑडिट रिपोर्ट छपी है। यह रिपोर्ट 24 सितंबर 2025 को तैयार हुई थी। इसे 8 अप्रैल 2026 को अधिसूचित किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2025 तक के वित्त वर्ष का ब्यौरा इसमें है। इस वित्त वर्ष में बीसीआई का कुल खर्च दर्ज है। यह आंकड़ा 14 करोड़ 22 लाख 14 हजार 456 रुपए है।
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा यात्रा और बैठक खर्च का है। यह आंकड़ा 12 करोड़ 65 लाख 19 हजार रुपए से ज्यादा है। दास के दावे के मुताबिक यह रकम भी करीब 12 करोड़ रुपए ही थी। काउंसिल सदस्यों की यात्रा पर करीब 4 करोड़ 78 लाख रुपए खर्च हुए। विदेश यात्रा पर 2 करोड़ 50 लाख रुपए खर्च किए गए। अनुशासन समिति की बैठकों की यात्रा पर 1 करोड़ 51 लाख रुपए गए। सामान्य बैठक खर्च 1 करोड़ 44 लाख रुपए रहा।
गोवा में हुई काउंसिल की बैठक पर भी खर्च दर्ज है। यह आंकड़ा 50 लाख रुपए से ज्यादा है। कानूनी शिक्षा समिति की बैठकों की यात्रा पर 36 लाख रुपए खर्च हुए। इसके अलावा कॉन्फ्रेंस, सेमिनार और वर्कशॉप पर करीब 79 लाख रुपए खर्च हुए। पुरस्कार और सम्मान समारोह पर 58 लाख रुपए से ज्यादा खर्च दर्ज है।
पिछले साल से कम रहा खर्च
गजट के आंकड़े बताते हैं कि यह खर्च पिछले वित्त वर्ष से कम है। वित्त वर्ष 2023-24 में बीसीआई का खर्च ज्यादा था। उस साल यह आंकड़ा करीब 18 करोड़ 82 लाख रुपए था। यानी एक साल में कुल खर्च घटा है। यह कमी करीब साढ़े चार करोड़ रुपए की है। हालांकि यात्रा और बैठक खर्च का आंकड़ा दोनों साल लगभग बराबर रहा।
मिश्रा और बीसीआई ने क्या कहा
बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने आदेश वापस लिया। इस पर उन्होंने एक्स पर पोस्ट लिखी थी। उन्होंने कहा कि सीनियर वकीलों और छात्रों की प्रतिक्रिया पर विचार किया गया। मिश्रा ने लिखा कि नालसार का 2026 बैच किसी प्रदर्शन में शामिल नहीं था। उन्होंने छात्रों को शुभकामनाएं भी दीं।
मिश्रा ने अपनी पोस्ट में एक बात और कही। लोकतंत्र में असहमति का स्वागत है। लेकिन उन्होंने जोड़ा कि संवैधानिक संस्थाओं का सार्वजनिक मजाक बनाना सही नहीं है। दास की खर्च वाली पोस्ट पर बीसीआई ने अभी जवाब नहीं दिया है। मिश्रा बीसीआई के चेयरमैन का पद 2014 से संभाल रहे हैं। वे बिहार से राज्यसभा सांसद भी हैं।
अब आगे क्या होगा
फिलहाल नालसार के सभी 2026 बैच के छात्र राहत में हैं। वे अपनी पसंद के राज्य बार काउंसिल में पंजीकरण करा सकेंगे। लेकिन दास की पोस्ट के बाद खर्च को लेकर सवाल तेज हो गए हैं। कई वकील और लॉ स्टूडेंट्स भी अब पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि खर्च का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक तौर पर समझाया जाए। यह देखना अभी बाकी है कि बीसीआई इस पर क्या जवाब देती है।
जरूरी FAQ
सौरव दास ने बीसीआई पर क्या दावा किया?
वकील सौरव दास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि बीसीआई ने एक साल में मीटिंग और कॉन्फ्रेंस पर 14 करोड़ रुपए खर्च किए। इसमें से करीब 12 करोड़ रुपए यात्रा और ठहरने पर खर्च हुए। उन्होंने बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा से इस खर्च का हिसाब मांगा।
क्या सौरव दास का दावा सही निकला?
भारत के राजपत्र में प्रकाशित बीसीआई की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक दास का दावा काफी हद तक सही है। रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2024-25 का कुल खर्च 14 करोड़ 22 लाख रुपए से ज्यादा दर्ज है, जबकि यात्रा और बैठक खर्च करीब 12 करोड़ 65 लाख रुपए है।
सौरव दास की पोस्ट नालसार मामले से कैसे जुड़ी है?
दास की पोस्ट उसी दिन आई, जिस दिन बीसीआई ने नालसार यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के छात्रों पर अपना विवादित आदेश वापस लिया। दास ने कहा कि आदेश एक घंटे में वापस लेना दिखाता है कि फैसला जल्दबाजी में हुआ था, और खर्च का हिसाब भी उतनी ही तेजी से सार्वजनिक होना चाहिए।
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