अदालतों में AI के उपयोग पर ड्राफ्ट नियम जारी, 20 जून तक दे सकेंगे सुझाव

Aman Vaishnav | Jun 05, 2026, 16:05 IST
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सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने AI नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है। जजों की जगह AI फैसला नहीं ले सकेगा। तकनीक केवल सहायता के लिए होगी। इस पर लोग 20 जून तक अपना सुझाव दे सकते हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • सुप्रीम कोर्ट की AI कमेटी ने नए ड्राफ्ट नियम पेश किए हैं
  • अदालतों में AI का उपयोग केवल सहायक के रूप में होगा
  • जजों की जगह AI किसी भी हाल में फैसला नहीं सुनाएगा
  • निजी डेटा की सुरक्षा के लिए कड़े नियमों का पालन होगा
  • आम लोग इन नियमों पर 20 जून तक सुझाव दे सकते हैं

अदालतों में AI के उपयोग पर बड़ा फैसला

अदालतों में तकनीक का दखल लगातार बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए नए नियम बनाए हैं। नए ड्राफ्ट के मुताबिक मानवीय विवेक सबसे ऊपर होगा।



तकनीक और न्याय के बीच संतुलन बनाना बहुत जरूरी है। यह नियम न्यायिक स्वतंत्रता को बचाने के लिए लाए गए हैं। AI प्रणाली केवल इंसानी फैसलों की मदद के लिए होगी।



इससे न्याय प्रणाली में पारदर्शिता और आधुनिकता आएगी। इंसानी निगरानी तकनीक के गलत उपयोग को रोकेगी। भविष्य की डिजिटल अदालतों के लिए यह जरूरी कदम है। यह नियम न्याय की गरिमा को सुरक्षित रखेंगे।



AI के इस्तेमाल पर क्या पाबंदियां लगी?

न्यायिक स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए सख्त नियम जरूरी हैं। AI कभी भी अदालती फैसलों के नतीजे तय नहीं करेगा। यह किसी गवाह की विश्वसनीयता की जांच नहीं कर सकता।



ड्राफ्ट के अनुसार रिस्क स्कोरिंग पर पूरी तरह रोक है। AI जमानत या सजा की संभावना तय नहीं करेगा। यह दोबारा अपराध करने के जोखिम का आकलन नहीं करेगा।



किसी भी अस्पष्ट या ओपेक सिस्टम पर पाबंदी होगी। गवाहों की प्रोफाइलिंग करने की अनुमति भी नहीं दी गई। जजों का विवेक किसी भी मशीन से ऊपर रहेगा।



तकनीक को मानवीय नियंत्रण के अधीन रहना होगा। नियमों का पालन न करना न्यायिक कदाचार माना जाएगा। पाबंदियों के बाद अब जानते हैं कि AI का उपयोग कहां होगा।



अदालती कामकाज में AI का इस्तेमाल कहां होगा?

प्रशासनिक कुशलता बढ़ाने में तकनीक बहुत बड़ी भूमिका निभाएगी। अदालतों में मुकदमों का प्रबंधन अब काफी आसान होगा। AI की मदद से केस की सूची तैयार की जाएगी। सुनवाई का समय तय करना भी अब सरल हो जाएगा।



कोर्ट की कार्यवाही का तुरंत लिखित विवरण तैयार होगा। अदालती फैसलों का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद भी किया जाएगा। इससे आम लोगों को कानून समझने में मदद मिलेगी। यह तकनीक अदालती कामकाज की रफ्तार को बढ़ाएगी।



जजों का प्रशासनिक बोझ कम होने से समय बचेगा। वे अपना पूरा ध्यान केवल न्याय करने में लगाएंगे। कामकाज की निगरानी के लिए एक नई संस्था का प्रस्ताव है।



सुप्रीम कोर्ट की एपेक्स बॉडी कैसे काम करेगी?

जवाबदेही और नीति निर्धारण के लिए एक केंद्रीय संस्था बनेगी। यह एपेक्स बॉडी AI के उपयोग की पूरी निगरानी करेगी। इसमें मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित दो सुप्रीम कोर्ट जज होंगे।



दो हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी इसके सदस्य होंगे। इसमें हाई कोर्ट के दो अन्य जज भी शामिल होंगे। तकनीकी संस्थानों से एक विशेषज्ञ सदस्य को भी चुना जाएगा।



आईटी मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी इसमें रहेंगे। इसमें वित्त और साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञ भी शामिल होंगे।



यह संस्था तकनीक को सुरक्षित और जवाबदेह बनाए रखेगी। यह बॉडी डिजिटल न्याय के लिए नई नीतियां बनाएगी। संस्था के गठन के साथ ही लोगों की निजता का ख्याल रखना भी प्राथमिकता है।



डेटा सुरक्षा और भेदभाव रोकने के नियम?

डिजिटल इंडिया में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा जरूरी है। व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा 2023 के कानून के अनुसार होगी। AI सिस्टम में किसी भी प्रकार का भेदभाव वर्जित है। जाति या धर्म के आधार पर पक्षपात नहीं होगा।



लिंग, भाषा या विकलांगता के आधार पर भेदभाव पर रोक है। आर्थिक स्थिति की वजह से भी कोई अंतर नहीं होगा। सभी नागरिकों को बराबर न्याय मिलना सुनिश्चित किया जाएगा।



तकनीक का उपयोग केवल न्याय के हित में होगा। डेटा के गलत इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। तकनीक को समाज के हर वर्ग के लिए सुलभ बनाया जाएगा। न्याय प्रणाली में यह बदलाव भविष्य की अदालतों की तस्वीर बदल देगा।



निष्कर्ष

ये नए नियम आम आदमी के भरोसे को मजबूत करेंगे। इससे न्याय प्रक्रिया अधिक सुलभ और पारदर्शी बनेगी। सुप्रीम कोर्ट ने जनता से लिखित सुझाव मांगे हैं। सुझाव देने की अंतिम तारीख 20 जून तय है। तकनीक और इंसानी विवेक मिलकर बेहतर न्याय देंगे। यह आधुनिक न्याय प्रणाली की दिशा में बड़ा कदम है। न्याय की राह में डिजिटल बाधाएं दूर की जाएंगी। आम आदमी के लिए अदालत पहुंचना अब आसान होगा।



FAQ

  1. क्या भविष्य में AI जज फैसला सुनाएंगे?
    नहीं, AI कभी भी मानव जज की जगह नहीं लेगा। यह केवल प्रशासनिक कार्यों में सहायता के लिए होगा। ड्राफ्ट नियमों के अनुसार अंतिम निर्णय केवल जजों के पास रहेगा। जजों का विवेक और मानवीय सोच ही सर्वोपरि होगी।
  2. एपेक्स बॉडी में कौन-कौन शामिल होगा?
    इसमें दो सुप्रीम कोर्ट और चार हाई कोर्ट जज होंगे। आईटी मंत्रालय के संयुक्त सचिव भी इसके सदस्य होंगे। इनके अलावा वित्त और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ भी शामिल रहेंगे। तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों को भी इसमें जगह मिलेगी।

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