बिना इंश्योरेंस नहीं मिलेगा पेट्रोल! SC की सख्ती, कार-बाइक के बीमा नियम भी बदले
समझें क्या है पूरा मामला...
- सुप्रीम कोर्ट ने वाहन बीमा को लेकर बड़ा आदेश दिया है।
- बिना वैध थर्ड पार्टी बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल न देने की योजना बनेगी।
- केंद्र और इरडा (IRDAI) को इसका पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा गया है।
- नई कारों की बीमा अवधि 3 से बढ़ाकर 4 साल कर दी गई है।
- नए दोपहिया वाहनों की अवधि 5 से बढ़ाकर 6 साल हो गई है।
कोर्ट ने क्या आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट की बेंच में जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा शामिल थे। बेंच ने केंद्र सरकार और इरडा (IRDA – Insurance Regulatory and Development Authority of India) को साफ निर्देश दिए।
कोर्ट ने कहा कि बिना बीमा वाहनों को पेट्रोल पंप पर पेट्रोल न मिले, इसके लिए एक पायलट प्रोजेक्ट बनाया जाए। इरडा को तुरंत इस दिशा में निर्देश जारी करने के लिए कहा गया है।
कोर्ट ने नई गाड़ियों की अनिवार्य बीमा अवधि भी बढ़ा दी है। अब नई कार खरीदते समय 4 साल का बीमा कराना अनिवार्य होगा। पहले यह अवधि सिर्फ 3 साल की थी।
साथ ही दोपहिया वाहनों के लिए यह अवधि 5 साल से बढ़ाकर 6 साल कर दी गई है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। नई गाड़ी खरीदते समय बीमा के लिए ज्यादा रकम एकमुश्त चुकानी होगी।
2018 से चल रही है व्यवस्था
बेंच ने अपने आदेश में बताया कि लंबी अवधि का बीमा 2018 में अनिवार्य किया गया था। इसके बावजूद आठ साल बाद भी हालात नहीं सुधरे हैं।
आज भी बड़ी संख्या में वाहन बिना बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि हादसा पीड़ितों के हित में यह जरूरी कदम है। इसी वजह से बीमा अवधि को एक साल और बढ़ाया गया है।
हाईवे पर लगेंगे खास कैमरे
कोर्ट ने केंद्र सरकार को कई अहम निर्देश दिए हैं। हाईवे पर लगे कैमरों को इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो से जोड़ने को कहा गया है।
इन कैमरों को वाहन पोर्टल से भी जोड़ा जाएगा। चुनिंदा हाईवे पर टोल प्लाजा की जगह ऑटोमेटिक वाहन पहचान व्यवस्था लागू होगी।
इन जगहों पर लगे कैमरे बिना बीमा वाले वाहनों को खुद पहचान लेंगे। ऐसे वाहनों का ऑटोमेटिक ई-चालान जारी होगा। यानी अब चालक को रोकने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। सिस्टम खुद ही उल्लंघन पकड़ लेगा।
पुलिस और आम नागरिकों के लिए सुविधा
कोर्ट ने कहा कि पुलिसकर्मियों को भी नई सुविधा दी जाए। उन्हें वाहनों के बीमा की रियल टाइम जांच के लिए एप या हैंडहेल्ड डिवाइस दिए जाएं। इससे मौके पर ही बीमा की स्थिति पता चल सकेगी।
आम नागरिकों के लिए भी सुविधा शुरू होगी। कोई भी व्यक्ति अपने वाहन का बीमा स्टेटस आसानी से जांच सकेगा। इसमें थर्ड पार्टी और कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी दोनों की जानकारी दिखेगी। इससे पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
आंकड़े बताते हैं गंभीरता
एक संसदीय समिति की रिपोर्ट में चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। देश में कुल 30.48 करोड़ वाहन रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 16.54 करोड़ वाहनों के पास वैध बीमा नहीं है। यानी देश के करीब 56% वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं।
यह आंकड़ा सड़क सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर है। बिना बीमा वाहन से हादसा होने पर पीड़ित को मुआवजा मिलना मुश्किल हो जाता है। कोर्ट का यह आदेश इसी समस्या को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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