AI से तैयार फर्जी फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी चेतावनी, कहा- यह एक गंभीर समस्या
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया। कोर्ट ने एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा तैयार किए गए काल्पनिक फैसलों के हवाले को गंभीर समस्या करार दिया। न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा कि यह समस्या केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में तेजी से फैल रही है। कोर्ट ने कहा कि यह प्रवृत्ति बेहद खतरनाक हो सकती है और इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
क्या था मामला?
यह मामला उस समय सामने आया जब बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक कंपनी के निदेशक द्वारा दायर याचिका पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि अपीलकर्ता ने अपनी दलीलें 'चैटजीपीटी' (chat gpt) जैसे एआई टूल से तैयार की थी। इसमें एक ऐसा निर्णय भी शामिल था, जो असल में कभी दिया ही नहीं गया था। कोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि यह कृत्य अदालत के समय की बर्बादी कर रहा है।
क्या थी हाई कोर्ट की टिप्पणी?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि प्रतिवादी द्वारा प्रस्तुत दलीलें में 'टिक-मार्क', 'बुलेट प्वॉइंट्स', और एकजुट रूप से दोहराई गई बातें ऐसी थीं जो एआई से बनी होने की पहचान देती हैं। खासकर, एक कथित मामले 'ज्योति पत्नी दिनेश तुलसियानी बनाम एलीगेंट एसोसिएट्स' का हवाला दिया गया था, जो कोर्ट में कहीं भी उपलब्ध नहीं था।
एआई का दुरुपयोग रोकने के उपाय
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एआई टूल्स का उपयोग केवल शोध कार्य में किया जा सकता है, लेकिन इसका दुरुपयोग रुकना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि पक्षकारों की जिम्मेदारी है कि वे एआई से प्राप्त जानकारी और संदर्भों का सत्यापन ठीक से करें, ताकि किसी भी प्रकार की गलत जानकारी कोर्ट में न प्रस्तुत की जा सके।
क्या कहती है अदालत की यह टिप्पणी?
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि एआई से तैयार फैसलों का हवाला देना एक बढ़ती हुई समस्या बन चुका है। कोर्ट ने इस मुद्दे पर सावधानी बरतने की जरूरत को रेखांकित किया। यह समस्या केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में बढ़ रही है।
AI के गलत उपयोग पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह प्रवृत्ति पूरी दुनिया में बढ़ रही है और इसे लेकर सभी अदालतों को सतर्क रहने की जरूरत है। अदालत ने मामले को संज्ञान में लिया और कहा कि यह पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी होनी चाहिए।
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