स्कूली किताबों में न्यूटन को पायलट बताने पर बवाल, कक्षा 1 से 8 तक की किताबों में 1678 गलतियां
School Textbook Blunder: बच्चों की शिक्षा को लेकर एक बहुत ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है। ओडिशा के नए शैक्षणिक सत्र की किताबों में एक या दो नहीं, बल्कि सैकड़ों गलतियां मिली हैं। इन गलतियों को देखकर हर कोई दंग रह गया है। सबसे बड़ा ब्लंडर विज्ञान की किताब में देखने को मिला है।
दुनिया के सबसे महान वैज्ञानिकों में से एक सर आइजैक न्यूटन को किताब में महानतम पायलट लिख दिया गया है। यह गलती इतनी बड़ी है कि इससे बच्चों का पूरा बेस ही खराब हो सकता है। जैसे ही ये किताबें स्कूलों में बांटी गईं, वैसे ही शिक्षकों और अभिभावकों ने इस पर आपत्ति जताई।
सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक इस लापरवाही की कड़ी आलोचना हो रही है। जानकारों का कहना है कि ऐसी गलतियां बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। वैज्ञानिक और पायलट में बहुत बड़ा अंतर होता है। अब इस पूरे मामले पर सरकार पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गई है।
नई किताबों में किस तरह की गलतियां मिली हैं
जांच में पता चला है कि कक्षा 1 से लेकर 8वीं तक की किताबों (Newton principle) में कुल एक हजार 678 गलतियां मौजूद हैं। इनमें सबसे ज्यादा बुरी हालत कक्षा 8वीं की किताबों की है। अकेले इस कक्षा की किताबों में ही 705 ब्लंडर्स पाए गए हैं। इन किताबों में सिर्फ शब्दों की नहीं, बल्कि बड़े-बड़े कॉन्सेप्ट्स की भी गलतियां हैं।
किताबों (Education Department)में कई जगहों पर वस्तुओं के नाम और तस्वीरें पूरी तरह बदल दी गईं। उदाहरण के लिए, गेहूं की फसल की जगह धान लिख दिया गया है। कांच के गिलास को कप बताया गया है। विज्ञान की बात करें तो तापमान को दबाव लिख दिया गया है। इसके अलावा, फूड वेब यानी खाद्य जाल को भूलवश फूड साइकिल यानी खाद्य चक्र छाप दिया गया है।
इतना ही नहीं, भूगोल की किताब में Equinox को Equator बता दिया गया है। ये ऐसी बुनियादी बातें हैं जो बच्चों को आगे की परीक्षाओं के लिए तैयार करती हैं। इन गलतियों की वजह से अब स्कूल के टीचर्स भी परेशान हैं कि वे बच्चों को सही ज्ञान कैसे दें।
इतिहास-भूगोल के किताबों में भी गलतियां
इस लापरवाही का दायरा केवल विज्ञान तक ही सीमित नहीं है। इतिहास और भूगोल जैसी जरूरी किताबों में भी कई ऐतिहासिक स्मारकों की तस्वीरें गलत छप गई हैं। एक दूसरी विधानसभा की तस्वीर को किसी और राज्य की विधानसभा बताकर छाप दिया गया है।
इसी तरह, एक प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर परिसर की फोटो को दूसरे मशहूर सूर्य मंदिर के नाम से दिखा दिया गया है। इससे बच्चों को देश की धरोहरों के बारे में पूरी तरह से गलत जानकारी मिल रही थी।
नक्शों और जिलों की जानकारी में भी भारी गड़बड़ की गई है। एक राज्य की मशहूर पहाड़ियों को पड़ोसी राज्य के हिस्से में दिखा दिया गया। इसके अलावा, एक जाने-माने बड़े शहर को सीधे नया जिला घोषित कर दिया गया। इस तरह के ब्लंडर्स ने पूरी शिक्षा प्रणाली की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
ये पूरा मामला कहां का है
यह पूरा मामला ओडिशा राज्य का है। ओडिशा के स्कूल और जनशिक्षा विभाग की नई किताबों में यह भारी लापरवाही सामने आई है। हैरान करने वाली बात यह है कि इन किताबों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत तैयार किया गया था। ओडिशा की इन किताबों को तैयार करने की जिम्मेदारी डायरेक्टरेट ऑफ टीचर एजुकेशन और SCERT जैसी बड़ी सरकारी संस्थाओं के पास थी।
इतने बड़े एक्सपर्ट्स की देखरेख में बनी किताबों में ऐसी बचकानी और गंभीर गलतियां मिलना सच में चिंताजनक है। मामला बढ़ता देख मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने तुरंत एक इमरजेंसी और हाई लेवल मीटिंग बुलाई। इस बैठक में शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव समेत कई बड़े अधिकारी शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने इस बड़ी लापरवाही पर सख्त नाराजगी जताई है। उन्होंने इस मामले की पूरी जांच के लिए एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी बना दी है। मुख्यमंत्री ने इस कमेटी को ठीक 7 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि इस लापरवाही के पीछे जो भी अधिकारी या प्रिंटिंग एजेंसी जिम्मेदार होगी, उसे बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
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