वर्क लोड से परेशान लोगों के लिए था पावर नैप कॉन्टेस्ट, मौके पर पहुंच कर सो गए हजारों लोग
दक्षिण कोरिया अपनी चकाचौंध भरी नाइट लाइफ और भाग-दौड़ भरी जिंदगी के लिए मशहूर है। लेकिन इस चमक के पीछे एक कड़वा सच भी छिपा है। यहां के लोग नींद की भारी कमी से जूझ रहे हैं। इसी गंभीर समस्या की ओर दुनिया का ध्यान खींचने और अपने नागरिकों को सुकून के कुछ पल देने के लिए सियोल महानगर सरकार ने शनिवार को एक अनोखे पावर नैप कॉन्टेस्ट का आयोजन किया।
सोने के लिए अनोखी शर्तें
इस प्रतियोगिता में शामिल होने के नियम बड़े ही दिलचस्प और मजेदार थे। आयोजकों ने शर्त रखी थी कि प्रतिभागी थके हुए होने चाहिए और घर से पेट भरकर खाना खाकर आएं ताकि उन्हें अच्छी नींद आए।
इसके साथ ही, कई प्रतिभागियों को स्लीपिंग ब्यूटी या स्लीपिंग प्रिंस की तरह जादुई वेशभूषा पहनकर आने की सलाह दी गई थी। शनिवार दोपहर 3 बजे जैसे ही मुकाबला शुरू हुआ, पार्क में सन्नाटा पसर गया और हजारों लोग अपनी आंखों पर मास्क लगाकर गहरी नींद के आगोश में चले गए।
राजा की पोशाक में छात्र और कोआला बनी शिक्षिका
प्रतियोगिता में युवाओं का दर्द साफ दिखाई दिया। 20 साल के छात्र पार्क जून-सियोक जोसियन राजवंश के सम्राट की रेशमी पोशाक पहनकर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि पढ़ाई और पार्ट-टाइम जॉब के कारण (नींद हराम) वे दिन में सिर्फ 3-4 घंटे ही सो पाते हैं।
जून-सियोक यह दिखाने आए थे कि एक राजा की नींद कैसी होती है। वहीं, 24 वर्षीय अंग्रेजी शिक्षिका यू मी-योन, जो अनिद्रा की शिकार हैं, एक कोआला की ड्रेस पहनकर आईं ताकि प्रकृति के बीच चैन से सो सकें।
हार्ट रेट से मापी गई नींद की गहराई
यह केवल सोने का नाटक नहीं था, बल्कि इसे पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से परखा गया। प्रतियोगिता के दौरान सरकारी अधिकारी लगातार प्रतिभागियों की हार्ट रेट की जांच कर रहे थे। जिस व्यक्ति की हार्ट रेट जितनी शांत और स्थिर रही, उसे उतनी ही गहरी नींद का विजेता माना गया। आंकड़ों की मानें तो ओईसीडी देशों में दक्षिण कोरिया के लोग सबसे कम घंटों की नींद लेते हैं और सबसे ज्यादा काम करते हैं।
80 साल के बुजुर्ग ने युवाओं को पछाड़ा
हजारों युवाओं की मौजूदगी के बावजूद इस मुकाबले में बाजी मारी एक 80 वर्षीय बुजुर्ग ने। उन्होंने सबसे शांत और गहरी नींद का प्रदर्शन कर पहला स्थान हासिल किया।
वहीं, दूसरे स्थान पर 37 साल के ऑफिस वर्कर ह्वांग डू-सॉन्ग रहे। ह्वांग ने बताया कि नाइट शिफ्ट और दिनभर की ड्राइविंग ने उन्हें तोड़ दिया था, इसलिए नदी के किनारे चल रही ठंडी हवाओं के बीच खुद को रिचार्ज करने के लिए वे यहां आए थे।
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