शेफाली वर्मा: कभी लड़का बनकर खेलती थीं क्रिकेट, दलदल में पड़ी गेंदों से करती थी बैंटिंग प्रैक्टिस, आज बनी भारत की स्टार बल्लेबाज
कभी लड़का बनकर क्रिकेट सीखने वाली शेफाली आज स्टार बल्लेबाज हैं। आइए जानते हैं गली क्रिकेट से बेस्ट बैटर और उनके संघर्ष भरी सफलता की कहानी...
कैच छूटने पर शेफाली को आया गुस्सा
भारतीय क्रिकेटर शेफाली वर्मा को गुस्सा दिखाना भारी पड़ गया है। हाल ही में आईसीसी ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। मामला 18 अक्टूबर 2026 का है। रायपुर में भारत और जिम्बाब्वे के बीच दूसरा टी20 मैच खेला गया था।
मैच के 12वें ओवर में शेफाली से एक कैच छूट गया। उस समय वह मिड-ऑफ पर फील्डिंग कर रही थीं। कैच छूटने से शेफाली इतनी नाराज हुईं कि उन्होंने गेंद जमीन पर पटक दी।
आईसीसी ने उनकी इस हरकत को नियमों का उल्लंघन माना है। इसके बाद लेवल-1 के अनुच्छेद 2.2 के तहत कार्रवाई की गई। शेफाली को आधिकारिक चेतावनी दी गई। उनके रिकॉर्ड में एक डिमेरिट पॉइंट भी जुड़ गया।
हालांकि इसी मैच में शेफाली ने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने महज 25 गेंदों पर 55 रन बनाए थे।
सितंबर में शेफाली को मिला आईसीसी अवॉर्ड
अनुशासनात्मक कार्रवाई से पहले शेफाली वर्मा को बड़ी सफलता मिली थी। सितंबर 2026 में उन्हें आईसीसी विमेंस प्लेयर ऑफ द मंथ चुना गया था। यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का दूसरा मंथली आईसीसी अवॉर्ड था।
शेफाली अपनी तेज और आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जानी जाती हैं। वह मैदान पर उतरते ही बड़े शॉट लगाने लगती हैं। उनकी कोशिश शुरू से गेंदबाजों पर दबाव बनाने की रहती है। बड़े शॉट लगाने की उनकी काबिलियत भारतीय महिला टीम की ताकत है।
हालांकि यहां तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। उन्हें अपने करियर में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकि उनका संघर्ष इससे भी ज्यादा खास है।
नौ साल की उम्र में देखा क्रिकेटर बनने का सपना
शेफाली वर्मा का जन्म 28 जनवरी 2004 को हरियाणा के रोहतक में हुआ था। उनके पिता संजीव वर्मा भी क्रिकेट खेल चुके हैं। शेफाली को बचपन से ही क्रिकेट का शौक था।
जब शेफाली नौ साल की थीं तब पिता के साथ रणजी मैच देखने गईं। वहां उन्होंने सचिन तेंदुलकर को बल्लेबाजी करते देखा। सचिन का खेल देखकर वह इतनी प्रभावित हुईं कि क्रिकेटर बनने का फैसला कर लिया।
शेफाली के इस सपने को पूरा करने में उनके पिता ने पूरा साथ दिया। उन्होंने बेटी को आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया है।
क्रिकेट सीखने के लिए लड़का बनना पड़ा
शेफाली वर्मा के लिए क्रिकेट सीखने का सफर आसान नहीं था। उस समय रोहतक में लड़कियों के लिए क्रिकेट एकेडमी नहीं थी। उनके पिता ने कई एकेडमियों में दाखिले की कोशिश की। मगर लड़की होने के कारण शेफाली को कहीं एडमिशन नहीं मिला।
आखिरकार उनके पिता ने एक तरकीब निकाली। उन्होंने शेफाली के बाल छोटे करवा दिए। इसके बाद उन्हें लड़का बनाकर क्रिकेट एकेडमी भेजने लगे। वहां शेफाली लड़कों के साथ क्रिकेट की प्रैक्टिस करती थीं। वह लगातार अपनी बल्लेबाजी सुधारने में जुटी रहती थीं।
दलदल से गेंदें लाकर करती थीं प्रैक्टिस
शेफाली वर्मा के परिवार की आर्थिक हालत भी अच्छी नहीं थी। एक बार उनके पिता धोखाधड़ी का शिकार हो गए थे। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति और खराब हो गई। हालात ऐसे थे कि क्रिकेट का सामान खरीदना भी मुश्किल था। नई गेंदें खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे।
ऐसे में शेफाली के पिता पुरानी गेंदें ढूंढकर लाते थे। एक बड़े स्कूल की बाउंड्री के बाहर दलदल में गेंदें पड़ी रहती थीं। शेफाली अपने पिता के साथ वहां जाती थीं। दोनों दलदल से पुरानी गेंदें निकालकर घर लाते थे। शेफाली इन्हीं गेंदों से बल्लेबाजी की प्रैक्टिस करती थीं। पैसों की तंगी के बावजूद उन्होंने क्रिकेट सीखना नहीं छोड़ा।
15 साल की उम्र में भारतीय टीम में मिली जगह
शेफाली वर्मा की मेहनत जल्द ही रंग लाई। सिर्फ 15 साल की उम्र में उनका भारतीय टीम में चयन हो गया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच खेला। उस समय वह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय खिलाड़ी बनी थीं।
शेफाली ने अपनी तेज बल्लेबाजी से जल्द ही सबका ध्यान खींच लिया। उन्हें 2020 के महिला टी20 विश्व कप में भी खेलने का मौका मिला था। इसी साल वह आईसीसी महिला टी20 बल्लेबाजों की रैंकिंग में नंबर एक पर पहुंच गईं।
अंडर-19 विश्व कप में भारत को बनाया चैंपियन
साल 2021 में शेफाली वर्मा ने वनडे और टेस्ट क्रिकेट में भी कदम रखा है। इसके बाद 2023 में उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी मिली। शेफाली को भारतीय अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया। उनकी कप्तानी में भारत ने अंडर-19 महिला टी20 विश्व कप जीता है। इस जीत के बाद शेफाली की पहचान और मजबूत हुई है। उन्होंने दिखा दिया कि वह अच्छी बल्लेबाज के साथ बेहतरीन कप्तान भी हैं।
टीम से बाहर होने पर बढ़ीं मुश्किलें
शेफाली वर्मा के क्रिकेट करियर में एक मुश्किल दौर भी आया था। करीब 20 साल की उम्र में उनके पिता को हार्ट अटैक आया था। इसी दौरान शेफाली को भारतीय टीम से भी बाहर कर दिया गया था। करीब छह महीने तक उन्हें टीम में वापसी का मौका नहीं मिला था।
साल 2025 के महिला विश्व कप की शुरुआती टीम में भी उन्हें जगह नहीं मिली थी। एक खिलाड़ी के चोटिल होने के बाद उनकी किस्मत बदली। शेफाली को दोबारा टीम में शामिल किया गया। वह सेमीफाइनल के समय टीम से जुड़ीं थी। इसके बाद फाइनल मुकाबले में उन्होंने शानदार बल्लेबाजी की। उनके प्रदर्शन ने भारत को विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई है।
स्मृति मंधाना के साथ बनाई रिकॉर्ड साझेदारी
शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना की ओपनिंग जोड़ी काफी सफल रही है। दोनों ने मिलकर कई बड़े रिकॉर्ड बनाए हैं। सात अक्टूबर 2026 तक दोनों ने 107 टी20 अंतरराष्ट्रीय पारियों में साथ बल्लेबाजी की थी। इस दौरान पहले विकेट के लिए चार हजार से ज्यादा रन जोड़े। महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह किसी भी ओपनिंग जोड़ी का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
दोनों की साझेदारी का औसत 39.2 रन रहा। वहीं हर ओवर में औसतन 8.34 रन बनाए। शेफाली और स्मृति ने 32 बार 50 से ज्यादा रन जोड़े। दोनों ने छह बार 100 या उससे ज्यादा रनों की साझेदारी की। साल 2026 में सात अक्टूबर तक दोनों ने मिलकर 973 रन बनाए थे।
स्मृति और शेफाली की साझेदारी से भारत को फायदा
स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा की जोड़ी भारत के लिए फायदेमंद रही है। दोनों ने जिन 100 मैचों में ओपनिंग की और नतीजा निकला। उनमें से भारत ने 60 मैच जीते।
दोनों ने जब 50 से ज्यादा रन की साझेदारी की। तब भारत ने 29 में से 24 मैच जीते। यानी करीब 83 प्रतिशत मैचों में टीम को जीत मिली है।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि दोनों की अच्छी शुरुआत कितनी अहम है। अक्टूबर 2026 में स्मृति मंधाना को टी20 टीम की कप्तानी मिली। वहीं शेफाली वर्मा को उपकप्तान बनाया गया।
संघर्ष के बाद शेफाली को मिली सफलता
शेफाली वर्मा का क्रिकेट सफर आसान नहीं रहा है। उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। एक समय क्रिकेट एकेडमी में दाखिले के लिए लड़का बनना पड़ा। घर की आर्थिक हालत भी अच्छी नहीं थी। इसलिए पुरानी गेंदों से अभ्यास करना पड़ा था। शेफाली ने हार नहीं मानी और मेहनत जारी रखी।
महज 15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया। इसके बाद अंडर-19 विश्व कप जीता और सीनियर टीम में जगह बनाई है। टीम से बाहर होने के बाद भी उन्होंने शानदार वापसी की है। अब आईसीसी पुरस्कार और अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर फिर चर्चा में हैं। शेफाली का सफर बताता है कि मेहनत और हिम्मत से मुश्किलों को पार किया जा सकता है।