अमेरिका-ईरान की जंग से 56% तक महंगे हुए रोजमर्रा के सामान, 44% तक बढ़ा माल भाड़ा
समझें क्या है पूरा मामला...
- अमेरिका-ईरान जंग के कारण समुद्री रास्ते से माल ढुलाई का किराया 44% तक बढ़ गया है।
- इसका सीधा असर जरूरी चीजों की कीमतों पर पड़ा है।
- कोकोआ से लेकर सोयाबीन तेल तक हर चीज महंगी हुई है।
- बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के मुताबिक आगे भी राहत की उम्मीद कम है।
अमेरिका-ईरान युद्ध की आंच सिर्फ पश्चिम एशिया (पश्चिम एशिया विवाद) तक सीमित नहीं रही। इसका सीधा असर भारतीयों की जेब पर पड़ रहा है। शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं है।
कच्चे तेल की ढुलाई महंगी होने से आयात लागत बढ़ रही है। यह बोझ आखिरकार आम उपभोक्ता को ही उठाना पड़ रहा है। हर रोज इस्तेमाल होने वाली चीजों के दाम बढ़ने लगे हैं।
क्यों बढ़ा जहाजों का भाड़ा
दरअसल यह बात बैंक ऑफ बड़ौदा की रिसर्च रिपोर्ट में सामने आई है। फरवरी से जुलाई के बीच स्वेजमैक्स जहाजों का भाड़ा 40.4% बढ़ा है। बाल्टिक ड्राई इंडेक्स, जो गैर-तेल कमोडिटी को मापता है, 36% उछला है।
इसी दौरान बाल्टिक सुप्रामैक्स इंडेक्स में 44.4% की बढ़ोतरी हुई। बाल्टिक कैपसाइज इंडेक्स 38.3% बढ़ा है। आयरनमैक्स का किराया भी 4.30% बढ़ा है।
हालांकि हर जहाज का भाड़ा नहीं बढ़ा है। सबसे बड़े तेल टैंकर वीएलसीसी का किराया 7.40% घटा है। इसकी वजह ईरान के तेल निर्यात ढांचे पर हुए हमले हैं, जिससे मांग ही कम हो गई।
वहीं छोटे टैंकरों को स्वेज नहर की जगह अफ्रीका का लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। वे केप ऑफ गुड होप से होकर गुजर रहे हैं। इस लंबे रास्ते की वजह से इनका भाड़ा बढ़ गया है।
भारत में भी इसका असर दिखा है। ट्रक भाड़ा भी 15% तक बढ़ गया है। दिल्ली-देहरादून रूट पर यह बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
किन चीजों के दाम बढ़े
समुद्री ढुलाई महंगी होने का सबसे ज्यादा असर कमोडिटी कीमतों पर पड़ा है। फरवरी से जुलाई के बीच कोकोआ की कीमत 56.3% तक बढ़ी है। सोयाबीन तेल 29.5% महंगा हुआ है।
प्राकृतिक गैस के दाम 25.1% बढ़े हैं। खाद की कीमत में 16.3% की बढ़ोतरी हुई है। गेहूं 15.9% और चावल 14.5% तक महंगा हुआ है।
चाय की कीमत 10.5% बढ़ी है। कोयला 8.90% और कॉफी 8.50% महंगी हुई है। यह आंकड़े वर्ल्ड बैंक की पिंक शीट और बैंक ऑफ बड़ौदा रिसर्च रिपोर्ट से लिए गए हैं।
आम आदमी पर कैसे पड़ेगा असर
महंगी ढुलाई का सीधा असर आयातित सामान पर पड़ेगा। तेल, कोयला, खाद और खाने के तेल की लागत बढ़ेगी। इससे रिटेल महंगाई भी बढ़ सकती है।
हवाई सफर करने वालों को भी झटका लग सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी से जून के बीच विमान ईंधन की कीमत 84% तक बढ़ गई। इससे आगे हवाई किराया और महंगा हो सकता है।
शेयर बाजार और व्यापार पर असर
शिपिंग, विमानन और आयात पर निर्भर कंपनियों की लागत बढ़ रही है। इससे इनका मुनाफा मार्जिन घट सकता है। इन सेक्टरों के शेयर गिरने का खतरा बना हुआ है।
व्यापार घाटे पर भी असर पड़ सकता है। महंगी ढुलाई से भारत का आयात बिल बढ़ेगा। इसका सीधा असर डॉलर के मुकाबले रुपए की चाल पर पड़ सकता है।
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