खाड़ी युद्ध की वजह से बढ़ी खाद की कीमत: अब सरकार चुकाएगी पैसा, किसानों को राहत
News In Short
- खाड़ी युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद की कीमत बढ़ गई है।
- वहीं केंद्र सरकार ने तय किया है कि यह बोझ किसानों पर नहीं पड़ेगा।
- कैबिनेट ने यूरिया 266 रुपए और डीएपी 1350 रुपए प्रति बोरी देने का फैसला किया है।
- फर्टिलाइजर सब्सिडी (Fertilizer Subsidy) में 41 हजार करोड़ रुपए की बढ़ोतरी की गई है।
- कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्वालियर में मीडिया से बात करते हुए यह जानकारी दी।
News In Detail
कृषि मंत्री का किसानों को बड़ा तोहफा
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार, 20 अप्रैल को अल्प प्रवास पर ग्वालियर पहुंचे। यहां अक्षय तृतीया के मौके पर आयोजित किरार समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में उन्होंने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने मीडिया से भी बात की और किसानों के लिए एक बड़े फैसले की जानकारी दी।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने साफ कहा कि खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध की वजह से दुनियाभर में खाद की कीमतें बढ़ी हैं। वहीं, केंद्र सरकार यह बढ़ा हुआ बोझ किसानों पर नहीं डालेगी। सरकार खुद यह कीमत वहन करेगी।
यूरिया और डीएपी की तय कीमत
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक अब किसानों को यूरिया 266 रुपए प्रति बोरी में मिलेगी। डीएपी (Di-Ammonium Phosphate) की कीमत 1350 रुपए प्रति बोरी तय की गई है। यानी बाजार में खाद चाहे जितनी महंगी हो जाए, किसान को यही दाम चुकाने होंगे।
इसके अलावा सरकार ने फर्टिलाइजर सब्सिडी में 41 हजार करोड़ रुपए की बढ़ोतरी की है। यह रकम सीधे खाद कंपनियों को दी जाएगी ताकि किसान तक खाद सस्ती कीमत पर पहुंच सके।
खाड़ी युद्ध का असर, पर किसान सुरक्षित
शिवराज सिंह चौहान ने माना कि खाड़ी देशों में जारी संघर्ष से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। कच्चे माल की कीमतें बढ़ी हैं और इसका असर खाद पर भी पड़ा है। वहीं, उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा सरकार आम जन को और खासतौर पर किसानों को परेशान नहीं होने देगी।
उनका कहना था कि सरकार की यह जिम्मेदारी है कि अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल का बोझ देश के किसान तक न पहुंचे। इसी सोच के साथ यह फैसला लिया गया है।
महिला आरक्षण पर भी बोले मंत्री
ग्वालियर में मीडिया से बात करते हुए कृषि मंत्री ने नारी वंदना विधेयक पर विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि यह विधेयक 2029 से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए लाया गया था। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता थी।
कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि संसद में इस विधेयक को गिराना विपक्ष का पाप है। उन्होंने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर आरोप लगाया कि उन्होंने महिलाओं के सम्मान और उनके सपनों को कुचला। जब उनसे पूछा गया कि कांग्रेस ने विधेयक का नहीं बल्कि परफॉर्मेंस का विरोध किया था, तो उन्होंने पलटवार किया। उनके शब्दों में, ऐसा था तो पारित क्यों नहीं होने दिया? बढ़ती सीटों से उनको क्या दिक्कत थी?
किसानों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
खेती की लागत में खाद का हिस्सा सबसे बड़ा होता है। यूरिया और डीएपी दोनों ही खरीफ और रबी, दोनों फसलों के लिए जरूरी हैं। यदि इनकी कीमत बढ़ती तो किसान की जेब पर सीधा असर पड़ता। ऐसे में सरकार का यह फैसला बुआई के सीजन से पहले किसानों के लिए राहत की खबर है।
ये खबर भी पढ़िए...
किसानों के लिए 'किसान मित्र छड़ी' का आविष्कार : अब खेतों में सांपों का डर खत्म, शिवराज ने की तारीफ
News Strike : शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के मुनाफे पर क्या कहा, कांग्रेस ने क्यों साधा निशाना?