तमिलनाडु से ओडिशा तक 6 राज्यों में नए राज्यपाल नियुक्त, मध्य प्रदेश के ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड की कमान
ओडिशा, कर्नाटक और सिक्किम में भी नए राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं।
मध्य प्रदेश के ढाल सिंह बिसेन बने उत्तराखंड के राज्यपाल
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आदेश में मध्य प्रदेश के डॉ. ढाल सिंह बिसेन का नाम भी शामिल है। उन्हें उत्तराखंड के राज्यपाल पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बिसेन मध्य प्रदेश के सिवनी और बालाघाट क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वे तीन बार विधायक और एक बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। अब उन्हें उत्तराखंड में संवैधानिक प्रमुख की जिम्मेदारी मिली है।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दी बधाई
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डॉ. ढाल सिंह बिसेन को राज्यपाल नियुक्त होने पर बधाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर शुभकामनाएं दीं। धामी ने लिखा कि बिसेन का लंबा राजनीतिक अनुभव और जनसेवा के प्रति समर्पण सराहनीय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके अनुभव से उत्तराखंड को लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने उनके सफल और मंगलमय कार्यकाल की कामना भी की।
किस राज्य में किसे मिली जिम्मेदारी?
राष्ट्रपति की ओर से जारी नियुक्ति आदेश के मुताबिक, छह राज्यों में राज्यपालों की जिम्मेदारी इस प्रकार तय की गई है।
- केरल: ओम प्रकाश माथुर
- तमिलनाडु: राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर
- ओडिशा: ब्रज मोहन राम
- कर्नाटक: डॉ. सुधा यादव
- उत्तराखंड: डॉ. ढाल सिंह बिसेन
- सिक्किम: दुष्यंत गौतम
कौन हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन?
डॉ. ढाल सिंह बिसेन मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेताओं में शामिल हैं। उनकी राजनीतिक पहचान मुख्य रूप से सिवनी और बालाघाट क्षेत्र से जुड़ी रही है। वे किसान परिवार से आते हैं और उन्होंने विधानसभा से लेकर लोकसभा तक राजनीतिक सफर तय किया है।
डॉ. बिसेन का जन्म 14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के सिवनी क्षेत्र के पिपरिया गांव में हुआ था। करीब 22 वर्ष की उम्र में वे भारतीय जनसंघ से जुड़े थे। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाई।
तीन बार बरघाट से विधायक बने
डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने 1990 में पहली बार बरघाट विधानसभा सीट से चुनाव जीता था। इसके बाद 1993 और 1998 में भी वे इसी सीट से विधायक चुने गए। विधानसभा में उनके शुरुआती राजनीतिक सफर ने क्षेत्र में उनकी पहचान मजबूत की।
2003 से 2005 के बीच उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया। उपलब्ध राजनीतिक प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने वन, परिवहन और खनन विभागों के साथ स्कूल शिक्षा तथा जेल विभागों की जिम्मेदारी भी संभाली।
राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष भी रहे
डॉ. बिसेन ने 2011 से 2013 तक मध्य प्रदेश के चौथे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें बालाघाट सीट से उम्मीदवार बनाया।
उन्होंने चुनाव जीतकर पहली बार लोकसभा में प्रवेश किया और सांसद बने। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें दोबारा टिकट नहीं दिया। पार्टी ने उनकी जगह भारती पारधी को उम्मीदवार बनाया था, जिन्होंने चुनाव जीतकर बालाघाट सीट हासिल की।
अब उत्तराखंड के राज्यपाल की जिम्मेदारी
डॉ. ढाल सिंह बिसेन की नियुक्ति के साथ उन्हें मध्य प्रदेश की सक्रिय चुनावी राजनीति से अलग संवैधानिक पद की जिम्मेदारी मिली है। राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका उत्तराखंड में संवैधानिक प्रावधानों के तहत निर्धारित होगी। छह राज्यों में हुई इन नियुक्तियों में मध्य प्रदेश के नेता को मिली जिम्मेदारी भी खास चर्चा का विषय है।