SSC परीक्षा में गड़बड़ी पर छात्रों का हल्ला बोल, पुलिस ने किया लाठी चार्ज, राहुल बोले- डरपोक सरकार की पहचान
कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की परीक्षाओं में गड़बड़ी और अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस के जरिए रविवार (24 अगस्त) रात लाठीचार्ज किया गया। यह घटना दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई। यहां हजारों छात्र और शिक्षक अपनी मांगों को लेकर एकत्र हुए थे। SSC परीक्षा के परिणामों और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर छात्रों ने आवाज उठाई थी, लेकिन प्रदर्शन के दौरान पुलिस की हिंसक कार्रवाई ने इसे एक नया मोड़ दिया।
राहुल गांधी ने मामले पर सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे मोदी सरकार की डरपोक पहचान बताया।
उन्होंने आगे कहा, युवाओं ने सिर्फ अपना हक मांगा था - रोजगार और न्याय। लेकिन उन्हें क्या मिला? लाठियां। साफ है कि मोदी सरकार को न देश के युवाओं की चिंता है, न उनके भविष्य की।
राहुल गांधी का आरोप था कि यह सरकार जनता के वोटों से नहीं, बल्कि वोट चुराकर सत्ता में आई है। उन्होंने कहा कि पहले वोट चुराए जाएंगे, फिर परीक्षा चुराएंगे, फिर नौकरियां चुराएंगे, और अंत में जनता का हक और आवाज दोनों कुचल दिए जाएंगे।
दो दिन प्रदर्शन करने की मिली थी अनुमति
यह घटना रविवार रात की है, जब छात्रों और शिक्षकों ने रामलीला मैदान में विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि उन्हें दो दिन तक प्रदर्शन करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसे नकारते हुए उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाने का प्रयास किया। जब प्रदर्शनकारी हटने से इनकार करने लगे, तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया।
छात्रों और शिक्षकों को किया गया गिरफ्तार
अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने रात को प्रदर्शन स्थल की बिजली काट दी और सिविल वर्दी में कुछ पुलिसकर्मी आए। इन्होंने अभ्यर्थियों को हटाने के लिए दबाव डाला। इस दौरान कई छात्रों को हिरासत में लिया गया। इन छात्रों में शिक्षक विक्रमजीत और आदित्य रंजन भी शामिल थे।
राहुल गांधी ने इस घटना पर कहा कि पुलिस ने लड़कियों के साथ भी दुर्व्यवहार किया और कई छात्रों को चोटें आईं। उनका कहना था कि इस तरह की कार्रवाई से यह साफ हो जाता है कि सरकार का उद्देश्य युवाओं के भविष्य को कुचलना है।
SSC 2025 अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल
एक अभ्यर्थी, नीतिन ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी सिविल वर्दी में थे, जिन्हें उन्होंने अनुमति पत्र भी दिखाया था। लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटने के लिए कहा गया। शिक्षक गौरव सिंह ने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक वह प्रदर्शन स्थल से नहीं हटेंगे।
अभ्यर्थियों ने पुलिस की कार्रवाई को बर्बर बताते हुए कहा कि यह किसी लोकतांत्रिक देश में नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी सवाल किया कि यदि उन्हें शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने की अनुमति दी गई थी, तो पुलिस ने इस कार्रवाई को क्यों अंजाम दिया।
44 प्रदर्शनकारियों को किया गिरफ्तार
पुलिस उपायुक्त (मध्य दिल्ली) निधिन वाल्सन ने कहा कि रामलीला मैदान में लगभग 1500 प्रदर्शनकारी एकत्र हुए थे। इनमें से 100 प्रदर्शनकारी प्रदर्शन स्थल से हटने के लिए तैयार नहीं हुए। इसके बाद पुलिस ने 44 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जबकि बाकी लोग चले गए।
निधिन वाल्सन ने यह भी कहा कि प्रदर्शन स्थल पर समयसीमा खत्म होने के बाद पुलिस ने कई बार अनुरोध किया, लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं माने। इसके बाद पुलिस को यह कार्रवाई करनी पड़ी।
जानें SSC परीक्षा में गड़बड़ी का मामला क्या है...
SSC परीक्षा के परीक्षार्थियों का कहना है कि, परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों को 500-500 किलोमीटर दूर स्थित परीक्षा केंद्रों पर भेजा जाता है, लेकिन वहां पहुंचने के बाद यह पता चलता है कि परीक्षा रद्द कर दी गई है। कुछ स्थानों पर छात्र ऊपर की मंजिल पर परीक्षा दे रहे थे, जबकि नीचे मवेशियों के कटे हुए सिर पड़े थे। विरोध करने वाले परीक्षार्थियों को चुप कराने के लिए बाउंसर तैनात किए गए थे। कई कंप्यूटरों पर माउस काम नहीं कर रहे थे और सिस्टम भी हैंग हो रहे थे।
परीक्षार्थियों के अनुसार, एसएससी के डायरेक्टर से हुई बैठक में अधिकारियों ने खुद स्वीकार किया कि इस परीक्षा से संबंधित 55 हजार से अधिक शिकायतें आई हैं।
छात्रों की यह है अहम मांग...
- परीक्षा केंद्रों में गड़बड़ी करने वालों को ब्लैकलिस्ट किया जाए और उन पर जुर्माना लगाया जाए।
- प्राइवेट एजेंसियों को जवाबदेह ठहराया जाए, और उनकी लापरवाही के मामले में उनका अनुबंध रद्द किया जाए।
- प्रभावित छात्रों को परीक्षा फीस वापस की जाए, साथ ही यात्रा भत्ता या अतिरिक्त परीक्षा देने का अवसर प्रदान किया जाए।
- परीक्षा की आंसर-की समय पर जारी की जाए, और परिणाम घोषित होने से पहले आपत्ति दर्ज करने का अवसर दिया जाए।
- एक निश्चित परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाए, ताकि भर्ती की प्रक्रिया 6 से 8 महीने में पूरी हो सके।
- यूपीएससी अभ्यर्थियों को कोविड-19 के दौरान छूटे प्रयास की भरपाई की सुविधा दी जाए, और ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को ओबीसी जैसी छूट प्रदान की जाए।
- छात्रों के लिए एक "स्टूडेंट्स कमीशन ऑफ इंडिया" का गठन किया जाए, ताकि उनकी शिकायतों का समाधान एक ही स्थान पर हो सके।
- फर्जी प्रमाणपत्रों की पहचान होने पर सख्त कार्रवाई की जाए।
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