एलन मस्क ने मुकेश अंबानी को कहा प्रधानमंत्री अंबानी, स्टारलिंक विवाद में एकाधिकार का आरोप, सिंधिया ने दिया जवाब
समझें क्या है पूरा मामला
- एलन मस्क ने शुक्रवार को एक्स पर नया पोस्ट किया।
- उन्होंने मुकेश अंबानी को तंज में प्रधानमंत्री अंबानी कहा।
- मस्क ने पूछा कि क्या स्टारलिंक को मुकाबले की इजाजत मिलेगी।
- सिंधिया ने कहा कि तीन कंपनियों को सैटकॉम लाइसेंस मिल चुका है।
- दूरसंचार मंत्रालय ने भेदभाव के आरोप को बेबुनियाद बताया है।
मस्क के पोस्ट में क्या कहा गया?
मस्क ने गुरुवार को पूछा था कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं। शुक्रवार शाम उन्होंने नया पोस्ट किया। इन पोस्ट से Elon Musk Starlink विवाद और गरमा गया है।
मस्क ने कहा कि भारत के कई इलाकों में इंटरनेट नहीं है। इससे बच्चों को पढ़ाई का मौका नहीं मिलता। छोटे कारोबारी भी वैश्विक बाजार तक नहीं पहुंच पाते। उनके मुताबिक स्टारलिंक उनकी जिंदगी बेहतर बना सकता है। उन्होंने लिखा कि आपदाओं में स्टारलिंक जान बचाने में अहम रहा है।
पहले भी लगाया था एकाधिकार का आरोप
मस्क ने हाल ही में आरोप लगाया कि कारोबारी हितों के कारण स्टारलिंक की सेवा शुरू नहीं हो पा रही है। उन्होंने कुछ बड़े कारोबारियों पर बाजार में अपना दबदबा बनाए रखने का आरोप लगाया।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस में दूरसंचार विभाग ने इन आरोपों को खारिज किया था। विभाग ने कहा था कि भारतीय कारोबारियों के हित स्टारलिंक की राह में रुकावट नहीं हैं। इसके बाद मस्क ने सवाल उठाया कि मुकेश अंबानी के पीछे असली ताकत कौन है। अंबानी पर उनके इस तंज के बाद भारत में स्टारलिंक की एंट्री फिर चर्चा में आ गई है।
क्या है स्टारलिंक विवाद
भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक की सेवाएं शुरू होने में देरी को लेकर विवाद बढ़ गया है। एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सवाल उठाया कि उनकी कंपनी को 165 से ज्यादा देशों में मंजूरी मिल चुकी है। भारत में भी कंपनी पिछले पांच साल से नियमों का पालन कर रही है। इसके बावजूद सेवाएं शुरू करने की अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। मस्क ने मुकेश अंबानी के प्रभाव पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?
इस पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत में सभी कंपनियों के लिए एक जैसे नियम हैं। किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक स्टारलिंक समेत दूसरी कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं। हालांकि सेवाएं शुरू करने से पहले सुरक्षा से जुड़ी सभी शर्तें पूरी करनी होंगी।
इनमें भारतीय यूजर्स का डेटा देश में ही सुरक्षित रखना और स्थानीय गेटवे स्टेशन बनाना शामिल है। इस विवाद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भी एंट्री हो गई है। उन्होंने मस्क की पोस्ट को शेयर किया। वहीं रिलायंस जियो की ओर से आकाश अंबानी ने कहा कि उनकी कंपनी का ध्यान भारतीय ग्राहकों को बेहतर इंटरनेट सेवा देने पर है।
सिंधिया ने एकाधिकार पर क्या सफाई दी?
सिंधिया ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस की ब्रीफिंग में यह कहा। उन्होंने कहा कि एक खास कंपनी की चर्चा बहुत है। लेकिन तीन कंपनियों को लाइसेंस मिल चुका है।
किन तीन कंपनियों को मिला सैटकॉम लाइसेंस?
सिंधिया के मुताबिक तीन कंपनियों के पास सैटकॉम लाइसेंस है। ये हैं स्टारलिंक, जियो सैटकॉम और भारती समर्थित यूटेलसैट वनवेब। जियो सैटकॉम रिलायंस जियो की सैटेलाइट कंपनी है। एमेजॉन के कुइपर ने रुचि दिखाई है। उसे तय प्रक्रिया से गुजरना होगा।
सेवा कब शुरू होगी?
सिंधिया के मुताबिक सरकार राजस्व आधारित शुल्क व्यवस्था तय करेगी। इसके बाद इन तीनों कंपनियों को स्पेक्ट्रम दिया जाएगा। स्पेक्ट्रम यानी सैटेलाइट संचार के लिए जरूरी रेडियो तरंगें। कंपनियां अलग-अलग सुरक्षा शर्तें पूरी करेंगी। उसके बाद वे सेवा शुरू कर सकेंगी। ट्राई यानी दूरसंचार नियामक प्राधिकरण। ट्राई और दूरसंचार विभाग कीमत पर फैसले के करीब हैं।
मस्क का सवाल, अब तक लाइसेंस क्यों नहीं?
मस्क के मुताबिक स्टारलिंक 165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस प्राप्त है। कंपनी पांच साल से हर कानून और जरूरत का पालन कर रही है। फिर अब तक लाइसेंस क्यों नहीं? सिंधिया की बात इससे अलग दिखती है। वे कहते हैं कि स्टारलिंक समेत तीन कंपनियां लाइसेंस पा चुकी हैं। रिपोर्ट इस फर्क को साफ नहीं करती। यह Starlink monopoly row का अहम सवाल बना हुआ है।
दूरसंचार मंत्रालय ने क्या कहा?
मंत्रालय ने कहा कि अनुमति का ढांचा निष्पक्ष और भेदभाव रहित है। उसने चुनिंदा तरीके से लागू होने की बात को बेबुनियाद बताया।
कांग्रेस पर क्या बोले सिंधिया?
राहुल गांधी और मस्क के बीच एक्स पर बातचीत हुई थी। इसकी पृष्ठभूमि में सिंधिया ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उनका कहना है कि कांग्रेस को अपनी दिशा खुद नहीं पता। सिंधिया के मुताबिक कांग्रेस को पहले एक खास व्यक्ति के लाइसेंस पर आपत्ति थी। अब वह उसी व्यक्ति के साथ खड़ी है, ऐसा उन्होंने कहा। रिपोर्ट में कांग्रेस की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
तीन कंपनियां लाइसेंस पा चुकी हैं, तो सेवा में देरी क्यों? क्या दूरदराज के लोगों तक इंटरनेट पहुंचाने की बहस जल्द किसी नतीजे पर पहुंचेगी? अब नजर ट्राई और दूरसंचार विभाग के अंतिम फैसले पर है।
FAQ
1. एलन मस्क ने मुकेश अंबानी को लेकर क्या कहा?
मस्क ने एक्स पर अंबानी को तंज में प्रधानमंत्री अंबानी कहा। उन्होंने एकाधिकार बचाने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा कि क्या वे स्टारलिंक को मुकाबले की इजाजत देंगे।
2. भारत में किन कंपनियों को सैटकॉम लाइसेंस मिला है?
सिंधिया के मुताबिक स्टारलिंक, जियो सैटकॉम और भारती समर्थित यूटेलसैट वनवेब को लाइसेंस मिला है। एमेजॉन के कुइपर ने रुचि दिखाई है। उसे तय प्रक्रिया से गुजरना होगा।
3. क्या स्टारलिंक भारत में सेवा शुरू कर सकता है?
सिंधिया के मुताबिक शर्तें पूरी होने के बाद ही सेवा शुरू हो सकेगी। सरकार राजस्व आधारित शुल्क व्यवस्था तय करेगी, तब स्पेक्ट्रम मिलेगा। कंपनियों को सुरक्षा शर्तें भी पूरी करनी होंगी।