प्याज-टमाटर, दाल-चीनी और तेल के दाम बढ़े, जानें क्यों त्योहारों से पहले बिगड़ रहा बजट

Aman Vaishnav | Aug 23, 2026, 11:05 IST
चीनी और तेल के दाम
देश में चीनी, प्याज, दाल और तेल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। चीनी 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है। आइए जानते हैं आखिर महंगाई बढ़ने की असली वजह है क्या...

समझें क्या है पूरा मामला...

  • पिछले एक महीने से रसोई के सामान महंगे हो रहे हैं।
  • चीनी की कीमत एक हफ्ते में 7 रुपए बढ़ी है।
  • प्याज के दाम भी 4 से 5 रुपए किलो बढ़े हैं।
  • दाल और खाने के तेल की कीमतें भी ऊपर गई हैं।
  • सरकार ने दाम कंट्रोल करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

देशभर में रसोई का बजट अब बिगड़ने लगा है। बीते एक हफ्ते में खाने-पीने की कई चीजें महंगी हुई हैं। चीनी के साथ-साथ प्याज, टमाटर (टमाटर के दाम) और तेल के दाम भी बढ़े हैं। दाल की कीमतों में भी उछाल देखा गया है। आने वाले दिनों में और तेजी की आशंका जताई जा रही है।



सरकार इन बढ़ती कीमतों को थामने के लिए एक्टिव हो गई है। लेकिन आम आदमी की चिंता अभी कम नहीं हुई है। आइए जानते हैं किन वजहों से रसोई का सामान महंगा हो रहा है।



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चीनी क्यों हुई महंगी

पिछले एक हफ्ते में चीनी की कीमत 7 रुपए तक बढ़ी है। एक महीने में यह बढ़ोतरी 17 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। अब चीनी बाजार में 70 रुपए प्रति किलो बिक रही है।



कुछ लोगों का कहना है कि इथेनॉल की वजह से चीनी महंगी हुई है। सरकार ने इस दावे को साफ तौर पर खारिज किया है। सरकार के मुताबिक, कीमतें बढ़ने की असली वजह जमाखोरी की आशंका है।



कुछ मील कारोबारी और व्यापारी चीनी जमा कर रहे हैं, ऐसी आशंका जताई गई है। इसे रोकने के लिए सरकार ने 30 नवंबर तक कारोबारियों के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा तय कर दी है।



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प्याज के दाम की वजह

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 21 अगस्त को प्याज का औसत खुदरा भाव 40.79 रुपए प्रति किलो था। एक हफ्ते पहले यह 36.56 रुपए और एक महीने पहले 34.87 रुपए था।



यानी प्याज की कीमतें 4 से 5 रुपए प्रति किलो तक बढ़ चुकी हैं। कुछ इलाकों में यह बढ़ोतरी 25 फीसदी तक देखी गई है।



इस उछाल की सबसे बड़ी वजह खरीफ प्याज की नई फसल में देरी है। दक्षिण भारत से प्याज की आवक देर से हो रही है। महाराष्ट्र के नासिक इलाके में भी मानसून की देरी से बुवाई प्रभावित हुई है। दाम कंट्रोल करने के लिए सरकार अब बफर स्टॉक से प्याज बेचने जा रही है।



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दाल की कीमतें क्यों बढ़ीं

पिछले एक महीने में अरहर, मूंग, उरद और चना जैसी दालों के दाम बढ़े हैं। यह बढ़ोतरी 1 से 2 रुपए प्रति किलो तक रही है। दाम बढ़ने के पीछे मानसून को बड़ी वजह माना जा रहा है।



आंकड़ों के अनुसार, इस साल दलहन की बुवाई का रकबा पिछले साल से 35 हजार हेक्टेयर कम है। अकेले अरहर की बुवाई का रकबा 1.69 लाख हेक्टेयर घटा है। कमजोर मानसून की आशंका से आगे भी दाल महंगी हो सकती है।



खाने के तेल पर असर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। यह 20 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। इंडोनेशिया पाम ऑयल का सबसे बड़ा उत्पादक देश है।



वहां सूखे की स्थिति के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है। भारत बड़ी मात्रा में पाम ऑयल का आयात करता है, इसलिए यहां भी दाम बढ़ रहे हैं।



सूर्यमुखी तेल का आयात भी घटा है। रूस और यूक्रेन (रूस और यूक्रेन का युद्ध) के बीच युद्ध की वजह से रिफाइंड तेल के आयात पर असर पड़ा है। पिछले एक महीने में खाने के तेल की कीमतें 2 से 3 फीसदी तक बढ़ी हैं। इसमें सरसों तेल की कीमतें भी शामिल हैं।



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सरकार का एक्शन प्लान

चीनी की कीमतों को काबू में करने के लिए सरकार तीन मोर्चों पर काम कर रही है। पहला, बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन ड्यूटी फ्री आयात की मंजूरी दी गई है। दूसरा, जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक सीमा तय की गई है।



तीसरा कदम घरेलू उत्पादन बढ़ाने से जुड़ा है। चीनी मिलों को इस बार जल्दी, यानी 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने को कहा गया है। इसका मकसद है कि नई फसल आने के बाद त्योहारों तक पर्याप्त चीनी बाजार में मौजूद रहे। प्याज के लिए बफर स्टॉक से बिक्री की जाएगी। दालों और तेल की कीमतों पर भी सरकार की नजर बनी हुई है।



FAQ

  1. चीनी की कीमत अभी कितनी है?
    भी चीनी करीब 70 रुपये प्रति किलो बिक रही है। एक महीने में यह 17 रुपये तक महंगी हुई है। सरकार ने दाम काबू करने के लिए आयात मंजूर किया है।
  2. प्याज के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?
    खरीफ प्याज की नई फसल की आवक में देरी हो रही है। दक्षिण भारत और नासिक क्षेत्र में मानसून के कारण बुवाई देर से हुई। इससे बाजार में प्याज की सप्लाई कम है।

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