दोबारा गिरफ्तारी के लिए मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी, बताना होगा कारण', SC का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी को लेकर बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा, गिरफ्तारी की वजह लिखित में बतानी होगी। ऐसा नहीं करने पर गिरफ्तारी गैरकानूनी मानी जाएगी। रिहाई के बाद दोबारा गिरफ्तारी के लिए मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी होगी। यह फैसला एक निजी याचिका पर आया है।
नियम टूटने पर गिरफ्तारी गैरकानूनी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस को गिरफ्तारी के समय वजह लिखित में देनी होगी। अगर ऐसा नहीं किया गया तो गिरफ्तारी गैरकानूनी मानी जाएगी।
कोर्ट ने आगे कहा कि अगर व्यक्ति रिहा हो जाता है और जांच एजेंसी उसे दोबारा पकड़ना चाहती है, तो पुलिस सीधे कार्रवाई नहीं कर सकती। इसके लिए पहले मजिस्ट्रेट से मंजूरी लेनी होगी।
पहली गिरफ्तारी में गलती करने वाले पुलिस अधिकारी की विभागीय जांच होगी। दोबारा गिरफ्तारी होने पर मामले की जांच किसी दूसरे अधिकारी को सौंपी जाएगी।
जसरकरनजीत सिंह की याचिका पर आया फैसला
यह फैसला शिरोमणि अकाली दल से जुड़े जसरकरनजीत सिंह के मामले में आया है। वे मुल्लांपुर दाखा विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी हैं। नाबालिग से जुड़े यौन अपराध के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तारी की वजह लिखित में नहीं बताई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इसे गैरकानूनी माना। सिंह पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। स्थानीय अदालत ने उनकी गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताया था और तुरंत रिहाई का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी।
आसान भाषा में समझाना होगा कारण
जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अतुल चंद्रकुर की बेंच ने यह फैसला दिया। बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत आरोपी को गिरफ्तारी की वजह लिखित में बतानी होगी। वजह ऐसी भाषा में हो, जिसे आरोपी समझ सके। इसकी कॉपी भी जल्द से जल्द देनी होगी।
कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं है। यह व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। इसका उल्लंघन होने पर गिरफ्तारी असंवैधानिक मानी जाएगी। आरोपी को तुरंत रिहाई का अधिकार होगा।
दोबारा गिरफ्तारी के लिए तीन शर्तें
कोर्ट ने कहा कि रिहाई के बाद दोबारा गिरफ्तारी के लिए मजिस्ट्रेट के सामने अर्जी देनी होगी। इस अर्जी में तीन बातें बतानी होंगी।
पहली, दोबारा गिरफ्तारी की वजह और उसकी जरूरत क्या है। दूसरी, पहली बार वजह क्यों नहीं बताई गई। तीसरी, आरोपी को गिरफ्तारी की वजह लिखित में देने के बाद ही अर्जी दाखिल होगी।
जिस अधिकारी ने पहली गिरफ्तारी में गलती की, वह दोबारा गिरफ्तारी का फैसला नहीं ले सकेगा। इस पर सीनियर अधिकारी की सहमति भी जरूरी होगी।
चार्जशीट से गिरफ्तारी सही नहीं होगी
कोर्ट ने साफ कहा कि बाद में चार्जशीट दाखिल होने से गैरकानूनी गिरफ्तारी सही नहीं मानी जाएगी। आरोपी को अपना नुकसान साबित करने की भी जरूरत नहीं होगी। अनुच्छेद 22(1) सामान्य और विशेष, दोनों तरह के मामलों पर लागू होता है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस उल्लंघन पर रिहाई को जमानत नहीं माना जाएगा। इसे गैरकानूनी हिरासत से रिहाई माना जाएगा। जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट मुआवजा भी दे सकता है।
FAQ
- गिरफ्तारी की वजह लिखित में न बताने पर क्या होगा?
ऐसी गिरफ्तारी गैरकानूनी मानी जाएगी। आरोपी को तुरंत रिहाई का अधिकार होगा। यह सुप्रीम कोर्ट का फैसला है। - दोबारा गिरफ्तारी के लिए क्या करना होगा?
पुलिस को मजिस्ट्रेट से मंजूरी लेनी होगी। अर्जी में वजह और पिछली गलती बतानी होगी। बिना मंजूरी दोबारा गिरफ्तारी नहीं हो सकती। - यह नियम किन मामलों पर लागू होता है?
अनुच्छेद 22(1) सामान्य और विशेष, दोनों तरह के मामलों पर लागू होता है। यह हर गिरफ्तारी पर लागू होगा। कोर्ट ने इसे मौलिक अधिकार बताया है।
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