सुप्रीम कोर्ट में बढ़ी जजों की संख्या, राष्ट्रपति ने 33 से बढ़ाकर 37 करने का अध्यादेश किया जारी
शॉर्ट में समझें पूरा मामला...
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 16 मई 2026 को एक अध्यादेश जारी किया था।
- इस अध्यादेश से सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़कर 37 हो जाएगी।
- सुप्रीम कोर्ट में अभी 93 हजार से भी ज्यादा मामले लंबित हैं।
- संसद सत्र में नहीं है, इसलिए अध्यादेश का रास्ता अपनाया गया।
- यह अध्यादेश संसद के अगले सत्र में दोनों सदनों के सामने रखा जाएगा।
क्यों जरूरी पड़ा यह फैसला
सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। अभी 93 हजार से भी ज्यादा मामले पेंडिंग हैं। जून में जब कोर्ट की गर्मी की छुट्टियां होंगी तब यह आंकड़ा एक लाख के करीब पहुंच सकता है। यह स्थिति न्याय व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है।
कोरोना महामारी के बाद से ई-फाइलिंग की सुविधा बढ़ी। इससे मामले दाखिल करना आसान हो गया और लंबित मुकदमों की तादाद तेजी से बढ़ी। इसी के चलते ज्यादा जजों की जरूरत महसूस की जा रही थी।
छह साल बाद मिली मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने को सरकार की मंजूरी छह साल के लंबे इंतजार के बाद मिली है। इससे पहले संसद ने सुप्रीम कोर्ट (नंबर ऑफ जज) एक्ट 1956 में 2019 में संशोधन किया था। उस वक्त जजों की स्वीकृत संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी। यह गिनती मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर होती है।
इस बार जो अध्यादेश जारी हुआ है उसने उसी एक्ट की धारा 2 में तैंतीस की जगह सैंतीस कर दिया है। यानी मुख्य न्यायाधीश को मिलाकर अब कुल जजों की संख्या 38 होगी।
अध्यादेश कैसे काम करता है
संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति तब अध्यादेश जारी कर सकते हैं जब संसद का सत्र नहीं चल रहा हो। यह अध्यादेश कानून की तरह काम करता है लेकिन इसकी उम्र सीमित होती है।
संसद के अगले सत्र शुरू होने के छह हफ्ते के अंदर इसे दोनों सदनों से पारित करवाना जरूरी होता है। ऐसा नहीं हुआ या दोनों सदनों ने इसे नामंजूर कर दिया तो यह खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगा। राष्ट्रपति चाहें तो इसे कभी भी वापस भी ले सकते हैं।
कैबिनेट की मोहर के लगभग दो हफ्ते बाद यह अध्यादेश जारी हुआ है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जजों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। उसके बाद राष्ट्रपति भवन से अधिसूचना 16 मई को जारी हुई।
जजों के पद खाली क्यों हैं
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में दो पद खाली हैं। पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई नवंबर 2025 में सेवानिवृत्त हो गए थे। न्यायमूर्ति राजेश बिंडल अप्रैल 2026 में पद छोड़ चुके हैं।
इसके अलावा तीन और जज जल्द रिटायर होने वाले हैं। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल जून में और न्यायमूर्ति संजय करोल अगस्त में सेवानिवृत्त होंगे। यानी आने वाले महीनों में और सीटें खाली होंगी। ऐसे में संख्या बढ़ाना और भी जरूरी हो गया था।
कुल ताकत कितनी होगी
नए अध्यादेश के बाद सुप्रीम कोर्ट की कुल स्वीकृत न्यायिक शक्ति 38 हो जाएगी। इसमें मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं। यानी 34 की जगह अब 38 जज होंगे। भारत के मुख्य न्यायाधीश को इस गिनती में अलग से जोड़ा जाता है।
संविधान का इतिहास क्या कहता है
संविधान के मूल अनुच्छेद 124(1) में सुप्रीम कोर्ट के लिए मुख्य न्यायाधीश और सात से अधिक नहीं जजों का प्रावधान था। यानी पहले कुल आठ जज ही होते थे।
जब1956 का एक्ट लागू हुआ तो जजों की संख्या बढ़कर 10 हो गई। फिर 1960 में 13 इसके बाद 1977 में 17, 1986 में 25 और 2009 में 30 तक पहुंची। 2019 में 33 हुई और अब 2026 में 37 होने जा रही है।
यह खबर क्यों जरूरी है
भारत में न्याय मिलने में देरी एक पुरानी और बड़ी समस्या रही है। सुप्रीम कोर्ट देश की सर्वोच्च अदालत है। यहां लंबित मुकदमों का बोझ बढ़ना सीधे आम नागरिकों के अधिकारों पर असर डालता है।
जब मामले सालों तक नहीं सुने जाते तो न्याय मिलने में देरी होती है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ है। जजों की संख्या बढ़ाना इस दिशा में एक ठोस कदम है।
यह फैसला न केवल कानूनी व्यवस्था बल्कि देश के करोड़ों उन लोगों के लिए राहत की खबर है जो न्याय की आस में बरसों से इंतजार कर रहे हैं।
साथ ही यह संसदीय लोकतंत्र की उस प्रक्रिया को भी दर्शाता है जिसमें कार्यपालिका तत्काल जरूरत पड़ने पर अध्यादेश के जरिए काम करती है और फिर संसद के जरिए जनादेश लेती है।
FAQ
- सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या क्यों बढ़ाई गई?
सुप्रीम कोर्ट में अभी 93,000 से ज्यादा मामले लंबित हैं। जून में गर्मी की छुट्टियां शुरू होने से पहले यह संख्या एक लाख तक पहुंच सकती है। जजों की कमी के चलते मामलों की सुनवाई में देरी हो रही थी। इसीलिए सरकार ने अध्यादेश के जरिए जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का फैसला किया। - अध्यादेश क्या होता है और यह कितने समय के लिए वैध है?
अध्यादेश एक अस्थायी कानून होता है जिसे राष्ट्रपति तब जारी करते हैं जब संसद का सत्र नहीं चल रहा हो। यह संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत जारी होता है। यह कानून जैसा ही काम करता है लेकिन संसद के अगले सत्र शुरू होने के छह हफ्ते के अंदर दोनों सदनों से पारित होना जरूरी है, नहीं तो यह खुद खत्म हो जाता है। - सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या पहले कितनी थी और कैसे बढ़ती रही?
शुरुआत में संविधान में सुप्रीम कोर्ट के लिए मुख्य न्यायाधीश के अलावा सात जजों का प्रावधान था। 1956 में यह 10 हुई, 1960 में 13, 1977 में 17, 1986 में 25, 2009 में 30 और 2019 में 33 हो गई। अब 2026 में इसे 37 किया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश को मिलाकर कुल संख्या 38 होगी।
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