सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन, हिरासत में लिए गए वकीलों के लिए CJI सूर्यकांत ने किया हस्तक्षेप
प्रदर्शनकारी वकीलों की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट में हलचल
सुप्रीम कोर्ट के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कई वकीलों को हिरासत में लेने का मामला शीर्ष अदालत पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। एसोसिएशन के मुताबिक, हिरासत में लिए गए वकीलों में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ महिला वकील भी शामिल हैं। उन्हें पुलिस ने हिरासत में लेकर यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स पहुंचाया था।
CJI सूर्यकांत ने अधिकारियों को दिए रिहाई के निर्देश
मामले की जानकारी मिलते ही चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने हिरासत में लिए गए वकीलों की रिहाई के निर्देश दिए। सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता देवव्रत ने भी मुख्य न्यायाधीश को इस घटनाक्रम से अवगत कराया। उन्होंने पुष्टि की कि वकीलों की रिहाई के लिए अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है। इस मामले में भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के भी हस्तक्षेप करने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद वकीलों की जल्द रिहाई की उम्मीद जताई गई।
SCBA ने पुलिस की कार्रवाई पर जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने इस मामले में प्रस्ताव पारित कर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। उसने मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया कि वे मामले का संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों से तत्काल बात करें। साथ ही हिरासत में लिए गए वकीलों के ठिकाने और सुरक्षा की जानकारी सुनिश्चित करने की मांग की।
वकीलों को कानूनी सहायता देने की भी मांग
बार एसोसिएशन ने अपने पत्र में हिरासत में लिए गए अधिवक्ताओं को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। SCBA ने कहा कि जिन वकीलों को हिरासत में रखने का कोई वैध आधार नहीं है, उनकी तत्काल रिहाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश के हस्तक्षेप के बाद अब संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर नजर है।
SIR के विरोध में उतरे वकील, पुलिस ने रोका
आज 10अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के पास प्रदर्शन कर रहे कई वकीलों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। यह कार्रवाई CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR मतदाता सूची संशोधन के विरोध में जंतर-मंतर मार्च के दौरान हुई थी। वकील सुप्रीम कोर्ट से जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे थे। भगवान दास रोड पर बैरिकेडिंग के पास पुलिस ने उन्हें रोका। दिल्ली पुलिस और CRPF ने कई वकीलों को हिरासत में लेकर बस में डाल दिया था।
जंतर-मंतर पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने प्रदर्शन का ऐलान किया था। इसे देखते हुए पुलिस पहले से ही सतर्क थी। जंतर-मंतर और उसके आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने 400 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। किसी भी प्रदर्शनकारी को जंतर-मंतर पर इकट्ठा नहीं होने दिया गया। यहां बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे। इस बीच जंतर-मंतर का एक वीडियो भी सामने आया है।
इसमें आमतौर पर धरना-प्रदर्शन के लिए पहचानी जाने वाली जगह पूरी तरह खाली नजर आ रही है। जहां प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुटने की उम्मीद थी, वहां सन्नाटा पसरा दिखाई दिया।
FAQs:
- सुप्रीम कोर्ट में वकीलों की हिरासत का मामला कब और क्यों हुआ?
यह मामला 10 अक्टूबर को तब हुआ जब कई वकील दिल्ली के जंतर-मंतर पर सॉलिसिटर जनरल के इस्तीफे और मतदाता सूची संशोधन के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें भगवान दास रोड पर बैरिकेडिंग के पास रोका और हिरासत में लिया। - सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने किन मुद्दों पर चिंता जताई?
SCBA ने पुलिस की कार्रवाई पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे वकीलों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और उन्होंने हिरासत में लिए गए वकीलों की सुरक्षा की जानकारी सुनिश्चित करने की मांग की। - मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हिरासत में लिए गए वकीलों के मामले में क्या कदम उठाए?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जैसे ही मामले की जानकारी मिली, उन्होंने हिरासत में लिए गए वकीलों की रिहाई के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। SCBA ने भी मुख्य न्यायाधीश से कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की अपील की।