सुप्रीम कोर्ट ने शुरू किया One Case One Data सिस्टम, पेंडिंग केसों का अब होगा तुरंत समाधान
समझें क्या है पूरा मामला
- सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल न्याय के लिए वन केस वन डेटा सिस्टम लॉन्च किया है।
- अब देशभर की सभी अदालतों का केस डेटा एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेगा।
- सीजेआई सूर्यकांत ने इस नई तकनीक और SU Sahay AI चैटबॉट की शुरुआत की।
- भारत की अदालतों में फिलहाल करीब 5.5 करोड़ मामले लंबित पड़े हुए हैं।
- इस सिस्टम से केसों की ट्रैकिंग आसान होगी और न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार 11 मई को डिजिटल क्रांति की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। देश की शीर्ष अदालत ने One Case One Data सिस्टम की औपचारिक शुरुआत की है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस नई डिजिटल पहल को हरी झंडी दिखाकर लॉन्च किया। यह सिस्टम देशभर की अदालतों में केस मैनेजमेंट को पहले से मजबूत करेगा। इस तकनीक के जरिए अब एकीकृत डेटा एक्सेस की सुविधा वकीलों को मिल सकेगी। यह हाई कोर्ट, जिला और निचली अदालतों को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ेगा।
One Case One Data सिस्टम कैसे करेगा काम?
इस नए सिस्टम से किसी भी मामले की मल्टी-लेवल जानकारी प्राप्त करना आसान होगा। अब केस की ट्रैकिंग, पुराने रिकॉर्ड और हिस्ट्री एक ही जगह उपलब्ध होगी। रजिस्ट्रार जनरल के अनुसार इससे अदालतों के बीच आपसी समन्वय में काफी सुधार होगा। अब जानकारी जुटाने के लिए फाइलों को इधर-उधर खोजने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
डेटा शेयरिंग और मॉनिटरिंग में सुधार से न्याय मिलने की गति भी बढ़ेगी। डिजिटल पारदर्शिता बढ़ने से अदालती कार्यों में भ्रष्टाचार पर भी लगाम कसना संभव होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने इस सिस्टम के साथ SU Sahay नामक एआई चैटबॉट भी पेश (एआई चैटबॉट का यूज) किया। यह चैटबॉट Supreme Court की आधिकारिक वेबसाइट पर वकीलों के लिए उपलब्ध रहेगा। पक्षकार भी इस एआई चैटबॉट के जरिए अपने केस की स्थिति जान सकेंगे। यह टूल केस से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी तुरंत प्रदान करने में सक्षम है।
डिजिटल तकनीक का यह उपयोग आम आदमी के लिए अदालती प्रक्रिया सरल बनाएगा। कोर्ट अधिकारियों का मानना है कि यह बदलाव न्याय व्यवस्था में मील का पत्थर है।
भारत में लंबित केसों का चौंकाने वाला आंकड़ा
भारत की विभिन्न अदालतों में मई 2026 तक का डेटा काफी चिंताजनक है। वर्तमान में देशभर में करीब 5.5 करोड़ केस लंबित पड़े हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट में 93 हजार और हाई कोर्ट्स में 63.6 लाख मामले अटके हैं। सबसे ज्यादा बोझ जिला और निचली अदालतों पर है जहां 4.76 करोड़ केस हैं। कुल पेंडिंग केसों में से लगभग 85 से 90 प्रतिशत निचली अदालतों में हैं। इतनी बड़ी संख्या में पेंडिंग केस न्याय व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती हैं।
आखिर अदालतों में क्यों बढ़ रहा है केसों का बोझ?
देश में केस लंबित होने का सबसे बड़ा कारण जजों की भारी कमी है। भारत में 10 लाख लोगों की आबादी पर केवल 22 जज उपलब्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में प्रति 10 लाख लोगों पर 50 जज की सिफारिश की थी। दूसरा बड़ा कारण 62 लाख केसों में वकीलों का न मिलना भी है। इसके अलावा सरकार खुद सबसे बड़ी वादी (पार्टी) के रूप में कोर्ट में खड़ी है। करीब 50 प्रतिशत मामलों में सरकार खुद एक पक्षकार के तौर पर शामिल है।
डिजिटल सिस्टम से कम होगा लंबित मामलों का दबाव
वन केस वन डेटा सिस्टम से केसों का बेहतर प्रबंधन करना मुमकिन होगा। पेंडिंग केसों के निपटारे के लिए यह तकनीक एक मास्टर प्लान की तरह है। डेटा के एक ही जगह होने से जजों का कीमती समय भी बचेगा। लाखों लंबित मामलों को तेजी से सुलझाने में यह तकनीक मददगार साबित होगी। न्याय प्रक्रिया में गति आने से आम जनता का भरोसा कोर्ट पर बढ़ेगा। उम्मीद है कि यह डिजिटल पहल कानूनी व्यवस्था में नया सवेरा लेकर आएगी।
FAQ
- सुप्रीम कोर्ट का वन केस वन डेटा सिस्टम क्या है और यह कैसे काम करेगा?
यह एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और जिला अदालतों के केस डेटा को आपस में जोड़ता है। इसके जरिए किसी भी केस की ट्रैकिंग, उसकी कानूनी हिस्ट्री और सुनवाई का पूरा रिकॉर्ड एक ही जगह उपलब्ध होगा। यह सिस्टम यूनिफाइड डेटा एक्सेस के सिद्धांत पर काम करता है, जिससे अलग-अलग अदालतों के बीच समन्वय बढ़ता है और फाइलों की मैन्युअल सर्चिंग की जरूरत खत्म हो जाती है। - नया AI चैटबॉट SU Sahay वकीलों और आम जनता की मदद कैसे करेगा?
SU Sahay एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैटबॉट है जो सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध है। यह वकीलों और वादियों को उनके केस से जुड़ी जानकारी तुरंत प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी को केस की अगली तारीख या स्टेटस जानना है, तो वे सीधे चैटबॉट से पूछ सकते हैं। यह चौबीसों घंटे काम करता है, जिससे जानकारी के लिए कोर्ट ऑफिस के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
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