UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
सुप्रीम कोर्ट ने UPI पेमेंट पर लगने वाले MDR पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। 15 अक्टूबर से नया शुल्क लागू होगा। 2,000 रुपए से ज्यादा के चुनिंदा UPI पेमेंट पर दुकानदार को 0.4 फीसदी शुल्क देना होगा।
कोर्ट ने सोमवार को याचिका पर सुनवाई की। अपीलकर्ताओं को तत्काल राहत नहीं मिली। लेकिन केंद्र सरकार और बाकी पक्षों को चार हफ्ते में जवाब देना होगा। यानी मामला अभी खत्म नहीं हुआ है।
समझें क्या है पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यूपीआई (UPI – Unified Payments Interface) के शुल्क पर रोक लगाने से इंकार कर दिया। 2,000 रुपए से ज्यादा के चुनिंदा पेमेंट पर 15 अक्टूबर से 0.4 फीसदी लगेगा। यह शुल्क ग्राहक नहीं, दुकानदार देगा। कोर्ट ने केंद्र और बाकी पक्षों से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। तब तक 15 अक्टूबर की तारीख नहीं बदली है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने सुनवाई की। याचिका वकील अंजन दत्ता की है। इसमें वित्त मंत्रालय के 14-15 सितंबर के नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता ने जवाब आने तक रोक लगाने की मांग की थी। केंद्र, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI – Reserve Bank of India) और बाकी पक्ष चार हफ्ते में जवाबी हलफनामा (लिखित जवाब) देंगे।
केंद्र ने कोर्ट में क्या कहा?
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने पूछा कि यह टैक्स है या फीस। केंद्र के वकील ने कहा कि यह न टैक्स है, न फीस।
कोर्ट ने इसे तकनीकी क्यों कहा?
बेंच ने जवाब मांगे, पर अंतरिम रोक नहीं दी।
याचिकाकर्ता को क्यों है ऐतराज?
याचिका के मुताबिक इससे छोटे और कम मार्जिन वाले दुकानदारों पर बोझ बढ़ेगा।
15 अक्टूबर से क्या बदलेगा?
नया नियम ग्राहक से दुकानदार को जाने वाले पेमेंट पर लागू होगा। शुल्क 0.4 फीसदी है, पर 2,000 रुपए से ऊपर के पेमेंट पर ही लगेगा। 75,000 रुपए या उससे ज्यादा पर अधिकतम शुल्क 300 रुपए तय है।
MDR क्या है और कौन देगा?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR – Merchant Discount Rate) दुकानदार से लिया जाने वाला शुल्क है।
सोचिए एक बार। 10,000 रुपए के पेमेंट पर दुकानदार को 40 रुपए देने होंगे। 1 लाख रुपए के पेमेंट पर 0.4 फीसदी यानी 400 रुपए बनते हैं। अधिकतम टैक्स सीमा तय होने की वजह से सिर्फ 300 रुपए लगेंगे, यानी असल में 0.3 फीसदी।
किन्हें मिलेगी छूट?
2,000 रुपए से कम के पेमेंट MDR के दायरे से बाहर हैं। छोटे दुकानदारों को राहत दी गई है। क्यूआर (QR – Quick Response) कोड से हर महीने 1 लाख रुपए तक कमाने वालों को छूट है।
कुछ सेक्टर में MDR को फिक्स कर दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रेलवे और टेलीकॉम पर 5 रुपए लगेंगे।
आम ग्राहक की जेब पर असर?
UPI पेमेंट पर चार्ज ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति के ट्रांसफर पर भी कोई शुल्क नहीं है। 2,000 रुपए तक का पेमेंट भी टैक्स फ्री रखा गया है। सरकार ने साफ किया है कि दुकानदार यह शुल्क ग्राहकों से नहीं वसूल सकते।
कारोबारियों ने वित्त मंत्रालय को भरोसा दिया है कि बोझ ग्राहक पर नहीं डालेंगे। तो क्या दुकानदार कीमतें बढ़ाकर इन UPI charges की भरपाई करेंगे? यह सवाल अभी खुला है। सरकारी सूत्रों ने UPI पर जीएसटी (GST – Goods and Services Tax) की चर्चा को अफवाह बताया है।
2020 से फ्री UPI, अब MDR क्यों?
जनवरी 2020 से दुकानदारों के UPI पेमेंट पर MDR हटा हुआ था। जून 2025 में वित्त मंत्रालय ने MDR लगने के दावों को झूठा बताया था। इस दौरान UPI लेनदेन तेजी से बढ़ा। 2019-20 में यह 21.3 लाख करोड़ रुपए था। मार्च 2025 तक यह 260.56 लाख करोड़ रुपए हो गया, यानी करीब 12 गुना।
पेमेंट इंडस्ट्री लंबे समय से लागत का मुद्दा उठा रही है। उसने बड़े मर्चेंट पर 0.3 फीसदी MDR सुझाया था। इंडस्ट्री का दावा है कि UPI का सालाना खर्च करीब 10,000 करोड़ रुपए है। सरकारी इंसेंटिव सिर्फ 1,500 करोड़ रुपए का है (यह आंकड़ा अभी confirm नहीं हुआ है)।
क्रेडिट कार्ड पर आमतौर पर 1.5 से 2.5 फीसदी शुल्क लगता है। डेबिट कार्ड पर अधिकतम करीब 0.9 फीसदी लगता है। इनके मुकाबले UPI का 0.4 फीसदी काफी कम है। आखिर UPI चलाने का खर्च कौन उठाए?
यही सवाल इस पूरी बहस की जड़ है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल 15 अक्टूबर की तारीख नहीं बदली है। केंद्र को चार हफ्ते में जवाब देना है। उसके बाद कोर्ट का रुख तय करेगा कि यह व्यवस्था आगे कैसे चलेगी। तब तक दुकानदारों को नए नियम की तैयारी करनी होगी।
- UPI पेमेंट पर चार्ज कब से लगेगा?
UPI पेमेंट पर यह चार्ज 15 अक्टूबर से लगेगा। यह सिर्फ 2,000 रुपए से ज्यादा के चुनिंदा पेमेंट पर लगेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अंतरिम रोक नहीं लगाई है। - क्या आम ग्राहक को MDR देना होगा?
नहीं, ग्राहक को MDR नहीं देना होगा। यह शुल्क दुकानदार देंगे। सरकार के मुताबिक दुकानदार इसे ग्राहकों से नहीं वसूल सकते। - 1 लाख रुपए के UPI पेमेंट पर दुकानदार को कितना शुल्क देना होगा?
दुकानदार को 300 रुपए देने होंगे। 0.4 फीसदी के हिसाब से शुल्क 400 रुपए बनता है, लेकिन 75,000 रुपए या उससे ज्यादा पर अधिकतम सीमा 300 रुपए है। क्यूआर कोड से महीने में 1 लाख रुपए तक कमाने वाले छोटे दुकानदारों को छूट है।