अपार आईडी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जबरन नहीं मांग सकते बच्चों का आधार
समझें क्या है पूरा मामला...
- सुप्रीम कोर्ट ने अपार आईडी को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है।
- कोर्ट ने कहा कि अपार आईडी बनाने के लिए माता-पिता को मजबूर नहीं कर सकते।
- यह फैसला 24 करोड़ छात्रों को प्रभावित करेगा।
- याचिकाकर्ताओं ने इसे प्राइवेसी और निगरानी से जुड़ा मुद्दा बताया था।
- कोर्ट ने अपार के फायदे भी माने, लेकिन अनिवार्यता को गलत ठहराया।
स्कूलों पर दबाव का आरोप
दरअसल तीन अभिभावकों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। उनका कहना था कि स्कूल अपार आईडी बनाने के लिए बच्चों का आधार नंबर मांग रहे हैं।
यह सीधे तौर पर आधार को अनिवार्य बना रहा है। जबकि पुट्टस्वामी मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि आधार वैकल्पिक है।
जयसिंह ने अदालत को बताया कि अपार से जुड़ा डेटा बच्चे के पूरे जीवन तक सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि आगे चलकर कोई नहीं चाहेगा कि उसके स्कूली प्रदर्शन की जानकारी सार्वजनिक हो। उनके शब्दों में यह पूरी तरह निजता के अधिकार का मामला है।
डेटा सुरक्षा कानून लागू नहीं
जयसिंह ने यह भी बताया कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के प्रावधान अपार योजना पर लागू ही नहीं किए गए हैं।
यानी छात्रों का डेटा बिना किसी ठोस कानूनी सुरक्षा के जमा हो रहा है। उन्होंने शिक्षा को मौलिक अधिकार बताते हुए कहा कि यह सरकार की कोई एहसान वाली सेवा नहीं है।
जयसिंह ने अदालत को याद दिलाया कि नौ जजों की बड़ी पीठ पहले ही कह चुकी है। किसी सेवा के लिए पहचान साबित करने को आधार अनिवार्य नहीं किया जा सकता।
ओडिशा हाईकोर्ट का हवाला
सुनवाई के दौरान ओडिशा हाईकोर्ट के एक आदेश का जिक्र आया। हाईकोर्ट ने अपार सहमति फॉर्म पर आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि फॉर्म में ऑप्ट आउट यानी बाहर होने का विकल्प ही नहीं दिया गया। राज्य सरकार को फॉर्म में संशोधन का निर्देश भी दिया गया था।
मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने पूछा कि क्या इस आदेश को चुनौती दी गई है। जवाब मिला कि आदेश अंतिम रूप ले चुका है। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह इसी तर्ज पर पूरे देश के लिए आदेश जारी करेगा।
कोर्ट ने गिनाए अपार के फायदे भी
फैसला सुनाने से पहले पीठ ने संतुलित रुख दिखाया। कोर्ट ने कहा कि हर चीज को शक की नजर से देखना ठीक नहीं। पीठ के मुताबिक अपार आईडी स्कूल बदलने की प्रक्रिया आसान बनाती है। पहले ट्रांसफर सर्टिफिकेट और कागजी रिकॉर्ड में महीनों लग जाते थे। अब रिकॉर्ड तुरंत ट्रांसफर हो सकेंगे।
निगरानी जैसी व्यवस्था का आरोप
याचिकाकर्ताओं ने अपार को राज्य की निगरानी व्यवस्था जैसा बताया। उनका तर्क था कि केंद्रीकृत डेटा और लगातार अपडेट बच्चों की लंबी प्रोफाइलिंग कर सकते हैं। यह जानकारी शिक्षा के अलावा भी इस्तेमाल हो सकती है, ऐसा उनका कहना था।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि अपार आधिकारिक रूप से स्वैच्छिक है। लेकिन असल में स्कूल दाखिला रोकने की धमकी देकर आधार डिटेल मांग रहे हैं। यह योजना को व्यावहारिक रूप से अनिवार्य बना देता है।
सीबीएसई का नया नियम
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि सीबीएसई ने अपार आईडी कार्ड को अनिवार्य कर दिया है। यह नियम 2026 से बोर्ड परीक्षा देने वाले कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्रों पर लागू होगा। इससे लाखों छात्र सीधे प्रभावित होंगे।
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