सुप्रीम कोर्ट के निर्देश : अब हर घर में अलग रखना होगा चार तरह का कचरा, नियम तोड़ा तो जुर्माना
समझें क्या है पूरा मामला
- 4 तरह का कचरा अलग: अब हर घर को कचरा चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटना होगा।
- बिजली-पानी कनेक्शन कटेगा: कचरा प्रबंधन के नियम तोड़ने पर सख्त जुर्माना और कनेक्शन कटेगा।
- कलेक्टरों को विशेष अधिकार: कलेक्टरों को नियम लागू कराने के लिए एक साल की विशेष पावर मिली।
- मोहल्ले में स्वच्छता समितियां: हर वार्ड में समितियां बनेंगी और सुपरवाइजर सीधे जनता का चालान काटेंगे।
- बजट पर सीधी रोक: नियम न मानने वाले नगर निगमों का सरकारी फंड रोक दिया जाएगा।
देश की सबसे बड़ी अदालत ने कचरा प्रबंधन को लेकर अब सख्त रुख अपना लिया है। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को कचरा प्रबंधन के नए नियमों की बड़ी समीक्षा करेगा। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने साफ कह दिया है कि अब बहानेबाजी बिल्कुल नहीं चलेगी।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश दिया था। हर घर और संस्था को अब चार श्रेणियों में कचरा अलग करना होगा। ऐसा नहीं करने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। केंद्र सरकार को सभी राज्यों की प्रगति रिपोर्ट आज पेश करनी है। अदालत ने चेतावनी दी थी कि हालात अब 'अब या कभी नहीं' वाले हैं। कानून का पालन करना सरकार और जनता दोनों की ही जिम्मेदारी है।
जिला कलेक्टर करेंगे निगरानी, कटेगा बिजली-पानी कनेक्शन
अदालत ने इस नए नियम को लागू कराने की पूरी जिम्मेदारी कलेक्टरों को दी है। केंद्र सरकार कलेक्टरों को पर्यावरण संरक्षण एक्ट के तहत विशेष अधिकार देगी। यह विशेष अधिकार शुरुआत में पूरे एक साल के लिए दिए जाएंगे।
हर जिले में अब स्पेशल सेल बनाई जाएगी। इस सेल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बड़े अधिकारी भी शामिल होंगे। यह टीम नियम तोड़ने वाले बड़े कचरा उत्पादकों पर सीधी कार्रवाई करेगी। गंभीर मामलों में सीधे बिजली और पानी के कनेक्शन काट दिए जाएंगे।
हर 15 दिन में जाएगी रिपोर्ट
जिला स्तर से हर 15 दिन में राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके बाद राज्य सरकारें हर महीने केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजेंगी। यह फाइनल रिपोर्ट हर महीने सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की जाएगी। कचरा प्रबंधन में लापरवाही पर अब सीधे आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा। व्यवस्था फेल होने पर बड़े सरकारी अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी।
मोहल्ले-मोहल्ले बनेगी स्वच्छता समिति
नए नियमों के मुताबिक हाउसिंग सोसायटियों को अब खुद काम करना होगा। उन्हें अपने परिसर के अंदर ही गीले कचरे से खाद बनानी होगी। अगर कोई सोसायटी ऐसा नहीं करेगी, तो नगर निगम सख्त एक्शन लेगा।
अब आपके अपने वार्ड में भी एक खास स्वच्छता समिति बनाई जाएगी। इस समिति में स्थानीय पार्षद और मोहल्ले के जिम्मेदार लोग शामिल होंगे। जो लोग कचरा अलग नहीं करेंगे, उनका सीधे चालान काटा जाएगा। नगर निगम के सफाई सुपरवाइजर को चालान काटने का अधिकार मिला है।
कैमरे रखेंगे कचरे पर नजर, खुलेंगे विशेष सेंटर
कचरा फेंकने वाली संवेदनशील जगहों पर अब डिजिटल कैमरे लगाए जाएंगे। हर इलाके में अब स्पेशल आरआरआर (Reduce-Reuse-Recycle) सेंटर खोले जाएंगे। यहां लोग अपने पुराने कपड़े, किताबें और इलेक्ट्रॉनिक सामान जमा कर सकेंगे। इन पुराने सामानों को दोबारा इस्तेमाल या रीसायकल किया जाएगा। इससे शहरों में कचरे के बड़े पहाड़ों को कम किया जा सकेगा।
नियम नहीं माना तो रुक जाएगा पूरा सरकारी बजट
सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगमों की जेब पर भी सीधा वार किया है। शहरी निकायों को बजट का एक हिस्सा कचरा प्रबंधन में लगाना होगा। जो निकाय इस नियम को लागू नहीं करेंगे, उनका फंड रुक जाएगा। केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से मिलने वाली ग्रांट बंद हो जाएगी।
सालों से पड़े पुराने कचरे को हटाना अब स्थानीय निकाय प्रमुखों का काम होगा। खुले में कचरा फेंकने पर अब पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। कचरा अब सिर्फ पूरी तरह से बंद गाड़ियों में ही ले जाया जाएगा। रास्ते में कचरा फैलाया तो गाड़ी मालिक पर बड़ा जुर्माना होगा।
सुप्रीम कोर्ट की पिछली दो बड़ी सुनवाइयां और सख्त तेवर
यह मामला काफी समय से सुप्रीम कोर्ट में बहुत गरमाया हुआ है। आइए आपको बताते हैं कि पिछली दो सुनवाइयों में कोर्ट ने क्या कहा था।
19 फरवरी 2026 की सुनवाई: कोर्ट ने संविधान के 'अनुच्छेद 21' का बड़ा हवाला दिया था। स्वच्छ वातावरण में जीना हर नागरिक का बुनियादी और मौलिक अधिकार है। देश में रोज 1.70 लाख टन से ज्यादा ठोस कचरा निकलता है। इस भारी-भरकम कचरे का वैज्ञानिक तरीके से कोई निस्तारण नहीं हो रहा है।
29 अप्रैल 2026 की सुनवाई: इस आदेश में कोर्ट ने सभी प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने को कहा था। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को खुद कोर्ट में पेश होने का आदेश मिला था। मुख्य सचिवों ने वर्चुअली पेश होकर अपनी पूरी कार्ययोजना कोर्ट के सामने रखी थी।
FAQ
- कचरा अलग करने के नियम क्या हैं?
हर घर और संस्थान में कचरा सूखा, गीला, ई-वेस्ट और हानिकारक चार श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य है। - नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई होगी?
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत आपराधिक कार्रवाई होगी। गंभीर उल्लंघन पर बिजली और पानी के कनेक्शन काटे जा सकते हैं। - RRR सेंटर का क्या महत्व है?
RRR सेंटर (Reduce-Reuse-Recycle) में पुराने कपड़े, किताबें और इलेक्ट्रॉनिक सामान जमा कर उनका पुनः उपयोग और रिसाइक्लिंग सुनिश्चित होती है।
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