सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में अब मिलेगी चिकन बिरयानी! जानें क्या है पूरा मामला

Sanjay Dhiman | Jul 29, 2026, 18:04 IST
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सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में हफ्ते में एक दिन चिकन बिरयानी शामिल करने पर विचार कर किया जा रहा है। तमिलनाडु के सरकारी टीचर एसोसिएशन ने यह मांग रखी थी।

सरकार मिड-डे मील स्कीम में बदलाव पर विचार कर रही है। हफ्ते में एक दिन बच्चों को चिकन बिरयानी दी जा सकती है। यह सुझाव तमिलनाडु टीचर एसोसिएशन ने रखा था। स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने कहा कि सरकार इस पर गंभीरता से सोच रही है। फैसला आगामी बजट के आसपास आ सकता है।



सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों के लिए यह खबर खास है। अभी उन्हें मिड-डे मील योजना के तहत रोज का सामान्य भोजन मिलता है। अब सरकार इसमें एक नया और पौष्टिक विकल्प जोड़ने पर विचार कर रही है। यह प्रस्ताव सीधे मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय तक पहुंच चुका है।



राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने बताया कि यह सुझाव मुख्यमंत्री के सामने रखा जा चुका है। सरकार फिलहाल इसके अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा कर रही है। टीचर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी यही मांग दोहराई है। उनका कहना है कि इससे बच्चों को बेहतर पोषण मिलेगा।



टीचर्स ने क्यों उठाई मांग

टीचर एसोसिएशन का कहना है कि मौजूदा मिड-डे मील में दिए जाने वाले चावल की क्वालिटी ठीक नहीं है। इसे सुधारा जाना चाहिए। साथ ही हफ्ते में एक दिन बिरयानी देने से खाना ज्यादा पौष्टिक और आकर्षक बनेगा। इससे स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति भी बढ़ सकती है।



यह मांग एक बड़ी बैठक में उठी। मंगलवार 28 जुलाई को एक परामर्श बैठक हुई। इसमें राज्यभर से 80 से ज्यादा टीचर एसोसिएशन के प्रतिनिधि शामिल हुए। यह बैठक 5 अगस्त को पेश होने वाले तमिलनाडु बजट से पहले रखी गई थी। मकसद था शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार को सुझाव देना।



सरकार का क्या है रुख

स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने कहा कि सरकार पहले से ही इस सुझाव पर विचार कर रही है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अगर मिड-डे मील में बिरयानी शामिल करने का फैसला होता है, तो इसके लिए एक और विभाग से बात करनी होगी। सामाजिक कल्याण एवं महिला सशक्तिकरण विभाग (Department of Social Welfare and Women Empowerment) इस योजना को लागू करता है। इसलिए अंतिम फैसले से पहले उससे चर्चा जरूरी होगी। सरकारी सूत्रों के मुताबिक सरकार इस प्रस्ताव को सकारात्मक तरीके से देख रही है।



नाश्ता योजना में भी बदलाव की मांग

बैठक में एक और बड़ी मांग उठी। टीचर एसोसिएशन चाहते हैं कि मुख्यमंत्री नाश्ता योजना (Chief Minister's Breakfast Scheme) चलाने की जिम्मेदारी नून मील कर्मचारियों को दी जाए। साथ ही उनकी नौकरी को नियमित किया जाए। अभी यह योजना क्लास 1 से 8वीं तक लगभग 32 लाख बच्चों तक पहुंच रही है।



टीचर एसोसिएशन ने यह भी मांग की कि नाश्ता योजना और मिड-डे मील स्कीम का दायरा क्लास 12वीं तक बढ़ाया जाए। अभी मिड-डे मील स्कीम क्लास 10 तक करीब 40 लाख छात्रों को मिल रही है। अगर इसे क्लास 11 और 12 तक बढ़ाया जाता है, तो करीब 8 लाख और छात्रों को फायदा होगा।



TET परीक्षा का मुद्दा भी उठा

बैठक में स्पेशल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी टीईटी (TET – Teacher Eligibility Test) का मुद्दा भी छाया रहा। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद यह परीक्षा अनिवार्य कर दी गई है। टीचर एसोसिएशन ने इसमें बैठने वाले शिक्षकों को राहत देने की मांग की है।



उनका कहना है कि यह स्पेशल टीईटी नई भर्ती के लिए नहीं है। यह सिर्फ मौजूदा शिक्षकों की सेवा जारी रखने के लिए है। इसलिए अनुभव के आधार पर अतिरिक्त अंक दिए जाने चाहिए। साथ ही न्यूनतम पासिंग नंबर कम करने और सभी वर्गों के लिए एक जैसे पासिंग मार्क्स तय करने की भी मांग की गई।



आगे क्या हो सकता है

फिलहाल सरकार इन सभी सुझावों पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि आगामी बजट में या उसके बाद इस पर बड़ा ऐलान हो सकता है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक टीचर एसोसिएशन ने सरकार से टीईटी परीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षकों को राहत देने का आग्रह किया है।



तमिलनाडु हाई एंड हायर सेकेंडरी स्कूल ग्रेजुएट टीचर्स एसोसिएशन के संस्थापक ए. मायावन ने कहा कि यह स्पेशल टीईटी सेवा जारी रखने के लिए है, नई नियुक्ति के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि अनुभव के लिए वेटेज मार्क्स देने या क्वालिफाइंग मार्क्स घटाने पर कोई कानूनी रोक नहीं है। सभी वर्गों के लिए पासिंग मार्क्स एक समान होने चाहिए।



अब सबकी नजर आगामी तमिलनाडु बजट पर टिकी है। देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या फैसला लेती है।



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