तहलका के तरुण तेजपाल को रेप केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 साल जेल की सजा सुनाई

Pawan Modiya | Aug 06, 2026, 17:30 IST
तरुण तेजपाल
बॉम्बे हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को गोवा के 2013 रेप केस में दोषी ठहराते हुए 10 साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई। 354A और 354B में भी अलग सजा मिली। कोर्ट ने दो हफ्ते में सरेंडर का आदेश दिया। तेजपाल फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

समझें क्या है पूरा मामला

  • बॉम्बे हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को 2013 के रेप केस में दोषी करार दिया।
  • इसी दिन कोर्ट ने उन्हें 10 साल की सश्रम कैद की सजा भी सुनाई।
  • 354A और 354B में अलग सजा मिली, सभी सजाएं साथ चलेंगी।
  • कोर्ट ने तेजपाल को दो हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया है।
  • तेजपाल ने इसे राजनीतिक साजिश बताया, सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही।

तेजपाल पर हाईकोर्ट का फैसला

गोवा की बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने तेहलका पत्रिका के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया। यह मामला 2013 के एक कथित यौन उत्पीड़न केस से जुड़ा है। इससे पहले निचली अदालत ने तेजपाल को बरी कर दिया था। गोवा सरकार ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसांडेकर की बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने निचली अदालत का आदेश रद्द कर दिया।



कोर्ट ने क्या कहा

बेंच ने साफ शब्दों में कहा कि तेजपाल का बरी होना गलत था। कोर्ट के आदेश में भारतीय दंड संहिता (IPC) का जिक्र है। इसकी धारा 376(2)(f) में तेजपाल को दोषी ठहराया गया है। धारा 376(2)(k) में भी दोष साबित हुआ है। इसके अलावा धारा 354A और 354B में भी दोष सिद्ध हुआ है। धारा 376(2)(f) किसी भरोसेमंद पद पर बैठे व्यक्ति के रेप से जुड़ी है। धारा 354A यौन उत्पीड़न से जुड़ी है। इसमें अनचाही शारीरिक हरकत और अनुचित मांग शामिल होती है। धारा 354B का संबंध जबरन कपड़े उतारने से है। इसमें महिला के खिलाफ बल प्रयोग शामिल होता है।



क्या था पूरा मामला

यह घटना साल 2013 की है। गोवा के एक पांच सितारा होटल में थिंक फेस्टिवल चल रहा था। आरोप है कि तेजपाल ने अपनी जूनियर सहयोगी के साथ लिफ्ट में छेड़छाड़ की। यह घटना 7 और 8 नवंबर 2013 को हुई बताई गई। पीड़िता ने इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। गोवा पुलिस ने तेजपाल के खिलाफ FIR (First Information Report) दर्ज की। इसमें रेप सहित कई धाराएं शामिल थीं। नवंबर 2013 में तेजपाल को गिरफ्तार किया गया। जुलाई 2014 में उन्हें जमानत मिल गई थी। इसके बाद मामला अदालत में लंबा खिंचा।



निचली अदालत में क्या हुआ था

इस केस की सुनवाई 2017 में शुरू हुई थी। मई 2021 में एडिशनल सेशन जज क्षमा जोशी ने फैसला सुनाया। जज ने तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि जांच अधिकारी से कई गलतियां हुईं। कोर्ट ने यह भी कहा कि जरूरी सबूत पेश नहीं किए गए। इसमें सीसीटीवी (Closed Circuit Television) फुटेज भी शामिल थी। इसी वजह से अभियोजन पक्ष अपना केस साबित नहीं कर पाया था। इस फैसले के बाद गोवा सरकार ने हाईकोर्ट का रुख किया।



सरकार का पक्ष क्या था

गोवा सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने दलील दी कि निचली अदालत ने गलत तरीके से फैसला दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक मेहता ने एक बात पर जोर दिया। कोर्ट ने पीड़िता के व्यवहार पर ज्यादा फोकस किया। उनके मुताबिक ध्यान आरोपी के आचरण पर होना चाहिए था। मेहता के मुताबिक निचली अदालत ने पीड़िता की निजी जिंदगी को गलत आधार बनाया। इसमें उसके व्हाट्सऐप चैट भी शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि तेजपाल की माफी वाली ईमेल भी अहम सबूत थी। मेहता की मदद के लिए एडवोकेट जनरल देविदास पंगम भी मौजूद थे। सरकारी वकील शैलेंद्र भोबे और प्रवीण फलदेसाई ने भी पैरवी की।



तेजपाल के वकील की दलील

तेजपाल की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने बहस की। रिपोर्ट्स के मुताबिक पोंडा ने पीड़िता के बयान पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि यह सबूतों से मेल नहीं खाता। उन्होंने लिफ्ट की तकनीकी बनावट और सीसीटीवी फुटेज का हवाला दिया। पोंडा ने दावा किया कि पीड़िता के मैसेज सामान्य व्यवहार दिखाते हैं। उनके मुताबिक इसमें किसी तरह का सदमा नजर नहीं आता। बचाव पक्ष ने कहा कि मीडिया और संस्थागत दबाव में केस बना। पोंडा ने पूरी घटना से इनकार किया, न कि सहमति की बात कही। उनकी मदद के लिए वकील सुभाष जाधव और रौनक राव भी मौजूद थे।



तेजपाल और तहलका की कहानी

तरुण तेजपाल तहलका पत्रिका के संस्थापक संपादक रहे हैं। तहलका अपनी खोजी पत्रकारिता के लिए जानी जाती थी। यह मामला साल 2013 में सामने आया था। इसके बाद तजपाल ने पत्रिका छोड़ दी। इस केस ने उस समय पूरे देश में हलचल मचाई थी। कई पत्रकार संगठनों और महिला अधिकार समूहों ने इस पर प्रतिक्रिया दी थी। सालों तक चली सुनवाई के बाद अब हाईकोर्ट का यह फैसला आया है। यह मामला कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की बहस से भी जुड़ा रहा है।



आगे क्या होगा

हाईकोर्ट ने तेजपाल को 10 साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई है। यह सजा रेप की धाराओं में दी गई है। धारा 354A में एक साल की सजा भी मिली है। धारा 354B में दो साल की कैद सुनाई गई है। कोर्ट ने कहा कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। तेजपाल को दो हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया गया है। तेजपाल ने इस फैसले को राजनीतिक साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उनके मुताबिक सबूतों को सही तरीके से नहीं परखा गया।



जरूरी FAQ

तरुण तेजपाल को रेप केस में कितनी सजा मिली है?


बॉम्बे हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को रेप की धाराओं में 10 साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा धारा 354A में एक साल और धारा 354B में दो साल की सजा भी दी गई है। कोर्ट के मुताबिक सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। यानी तेजपाल को कुल 10 साल जेल में रहना होगा।



तेजपाल को कब तक सरेंडर करना होगा?


बॉम्बे हाईकोर्ट ने सजा सुनाने के साथ ही तेजपाल को दो हफ्ते का समय दिया है। इस दौरान उन्हें सरेंडर करके जेल जाना होगा। कोर्ट ने यह आदेश 6 अगस्त को सजा सुनाते समय दिया। अगर वे तय समय में सरेंडर नहीं करते तो पुलिस कार्रवाई कर सकती है।



तेजपाल ने फैसले पर क्या प्रतिक्रिया दी है?


तरुण तेजपाल ने इस फैसले को राजनीतिक साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि मामले में मौजूद सबूतों को सही तरीके से नहीं परखा गया। तेजपाल के मुताबिक वे इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए न्याय की उम्मीद जताई है।



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